जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026: गौर गोपाल दास बोले- सोशल मीडिया में नहीं रिश्तों में खुशियां ढूंढें

गौर गोपाल दास ने राजस्थान के जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में जीवन के बोझ को हल्का करने और असली खुशी पाने के उपाय बताए। उन्होंने रिश्तों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि सोशल मीडिया के दिखावे से खुशी नहीं मिलती।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  1. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के तीसरे दिन गौर गोपाल दास ने जीवन के बोझ को हल्का करने पर बात की।

  2. उन्होंने सवाल पूछा, "आज आप अपने मन का कौन सा बोझ उतारने को तैयार हैं?"

  3. गौर गोपाल दास ने बताया कि असली संघर्ष रोज़ की चुनौतियों से पार पाना है, न कि मौत से डरना।

  4. रिश्तों की पेचीदगियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि हम रिश्तों को अपने परिवार से सीखते हैं।

  5.  उन्होंने कहा, सोशल मीडिया के दिखावे के बजाय, असली खुशी अपनों के साथ वक्त बिताने में है।

News In Detail

गौर गोपाल दास ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में जीवन की उलझनों को सुलझाने का तरीका बताया। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से सवाल पूछा, "आज आप अपने मन का कौन सा बोझ उतारने को तैयार हैं?" उनका कहना था कि असली संघर्ष जीवन की रोज़ की चुनौतियों से पार पाना है, न कि मौत से डरना।

उन्होंने रिश्तों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि हम रिश्तों को अपने परिवार से सीखते हैं। इसके अलावा, गौर गोपाल दास ने बताया कि असली खुशी सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं, बल्कि अपनों के साथ समय बिताने में है।

जीवन के बोझ को कैसे हल्का करें

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के तीसरे दिन प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने जीवन के उन संघर्षों का समाधान बताया जिनसे आज का युवा वर्ग जूझ रहा है। उन्होंने वहां मौजूद हजारों लोगों से एक अहम सवाल पूछा, "आज आप अपने मन का कौन सा बोझ उतारने को तैयार हैं?" यह सवाल न केवल सोचने पर मजबूर करता है, बल्कि यह जीवन के बोझ को हल्का करने का भी एक तरीका है।

जिंदगी की तीन बड़ी सीख

गौर गोपाल दास ने अपनी बातचीत में जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। सबसे पहले, उन्होंने बताया कि हम अक्सर मौत को लेकर डरते हैं, लेकिन असली चुनौती जीवन की रोज़ की जद्दोजहद से जूझना और उसे सलीके से जीना है। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने मन का बोझ उतारने में सक्षम हो जाते हैं, तो जीवन का सफर अपने आप आसान हो जाएगा। इस सोच से आप अपनी परेशानियों को भी एक नए दृष्टिकोण से देख सकते हैं।

रिश्तों की समझ और उनका महत्व

गौर गोपाल दास ने रिश्तों की पेचीदगियों पर भी बात की और बताया कि हम अपने रिश्तों को कैसे निभाते हैं, यह हमें हमारे परिवार से विरासत में मिलता है। परिवार की संस्कार और कहानियां हमें सही और गलत की पहचान करना सिखाती हैं। वह मानते हैं कि किसी भी रिश्ते में प्यार और गुस्से की अभिव्यक्ति वही होती है जो हमें हमारे परिवार से मिलती है, और यही हमें जीवन में 'रेड' और 'ग्रीन' फ्लैग की पहचान भी देती है।

सफलता और खुशियों का असली मायना

गौर गोपाल दास ने इस बात पर भी जोर दिया कि पैसा और सफलता तब तक बेकार हैं जब तक आपके पास किसी करीबी से अपनी खुशियां और ग़म बांटने के लिए कोई न हो। वह कहते हैं कि असल में इंसान को रिश्तों की जरूरत होती है, अकेलेपन की नहीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी के पास अच्छा परिवार और रिश्ते होने से उनकी असली खुशी मिलती है, न कि सोशल मीडिया के दिखावे से।

सोशल मीडिया और असली खुशी

आजकल की पीढ़ी, खासकर Gen-Z, पर गौर गोपाल दास ने टिप्पणी की कि लोग सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें और सेल्फी तो शेयर कर देते हैं, लेकिन असली मुद्दे या दिल की बात साझा करने के लिए उनके पास कोई नहीं होता। वह कहते हैं कि असली खुशी सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं, बल्कि किसी एक क्षेत्र में गहरी समझ और अपनों के साथ वक्त बिताने में है।

मुख्य बिंदू :

  • जेएलएफ 2026: गौर गोपाल दास ने जीवन को आसान बनाने के लिए बताया कि मन का बोझ उतारना और रोज़ की समस्याओं को सहजता से समझना महत्वपूर्ण है।
  • रिश्तों की पहचान और समझ हमें अपने परिवार से विरासत में मिलती है, जो हमें सही और गलत की पहचान करने में मदद करती है।
  • गौर गोपाल दास के अनुसार, असली खुशी सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं, बल्कि जीवन के किसी एक क्षेत्र में गहरी समझ और अपनों के साथ वक्त बिताने में है।

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