पन्नाधाय बाल गोपाल योजना में पैसों की बर्बादी: बच्चों का दूध डाला जा रहा गड्‌ढों में

राजस्थान में पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत करीब 68,000 स्कूलों में 54 लाख बच्चों को दूध बांटा जा रहा है। बच्चों को दिया जा रहा दूध कई स्कूलों में खराब हो रहा है, जिसका कारण प्रशासनिक लापरवाही और सप्लाई की कमी है।

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Purshottam Kumar Joshi
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News In Short

  1. पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत राजस्थान के 68,000 स्कूलों में 54 लाख बच्चों को दूध बांटा जा रहा है।

  2. कई स्कूलों में बच्चों ने दूध नहीं पिया, और यह दूध एक्सपायर हो गया, जिसे फेंक दिया गया।

  3. सलूंबर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बस्सी के प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में चार महीने से दूध की सप्लाई नहीं हो रही है।

  4. माधोराजपुरा में दूध पाउडर के पैकेट्स अनाज वाली कोठी में बंद पड़े थे, जो दो साल से अधिक पुराने थे।

  5. 2.34 लाख बच्चे कुपोषित हैं और सरकारी योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।

News In Detail

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत बच्चों को दूध दिया जा रहा है, लेकिन कई स्कूलों में यह दूध खराब हो रहा है। कई बच्चों ने इसे नहीं पिया और दूध एक्सपायर हो गया। कुछ स्कूलों में दूध की सप्लाई कई महीने से बंद है। माधोराजपुरा और अन्य स्कूलों में दूध पाउडर भी खराब हो चुका है। इन समस्याओं के कारण सरकारी रुपए की बर्बादी हो रही है। इससे बच्चों को पोषण नहीं मिल पा रहा। इसके अलावा 2.34 लाख बच्चे कुपोषित हैं, जिससे यह योजना विफल होती दिख रही है।

सरकारी स्कूलों में दूध की बर्बादी

पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत राजस्थान के 68,000 स्कूलों के 54 लाख बच्चों को सालाना 722 करोड़ रुपये का दूध वितरित किया जाता है। कई स्कूलों में यह दूध खराब हो रहा है या बच्चों द्वारा पिया ही नहीं जा रहा। शिक्षा विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण सरकारी रुपयों का दुरुपयोग हो रहा है।

कई स्कूलों में दूध एक्सपायर हो चुका है और वह फेंका जा रहा है। राजस्थान मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीन पर स्थिति इससे विपरीत है।

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Photograph: (the sootr)

दूध वितरण में प्रशासनिक लापरवाही

सलूंबर के राउमावि बस्सी के प्रिंसिपल मुकेश भगवान त्रिवेदी के अनुसार, उनके स्कूल में चार महीने से दूध की सप्लाई नहीं हो रही है। कई अन्य स्कूलों में भी दूध पाउडर की सप्लाई नहीं हो रही है। इसके साथ ही कई स्कूलों में बच्चों की संख्या में कमी के कारण दूध पाउडर इधर-उधर पड़ा हुआ है और यह खराब हो रहा है।

पूर्ववर्ती सरकार में दूध वितरण की विफलता

माधोराजपुरा में स्कूलों में दूध पाउडर के पैकेट्स को अनाज वाली कोठी में बंद रखा गया था। ये पैकेट्स दो साल से अधिक पुराने थे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फोटो वाले थे। टीचर्स का कहना था कि नामांकन कम हो जाने के कारण दूध पाउडर बच गया था। अधिकारियों को इसके बारे में सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दूध के खराब होने के कारण

  • स्कूलों में नामांकन में कमी आई है।

  • दूध का स्टॉक दूसरे स्कूलों में नहीं भेजा गया।

  • कई स्कूल बंद हो गए थे, लेकिन सप्लाई जारी रही।

  • कई बच्चे दूध पाउडर को नहीं पीते, जिससे दूध खराब हो जाता है।

कुपोषण का खतरा

राजस्थान में 2.34 लाख बच्चे कुपोषित हैं और यह स्थिति बाल गोपाल योजना के सही तरीके से क्रियान्वयन की कमी को दिखाती है। कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को दूध दिया जाता है। इसमें कक्षा 5 तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है। हालांकि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह दूध भी सही तरीके से बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है।

गड्ढों में दबाए गए दूध के पैकेट

चित्तौड़ा (जयपुर) स्थित सी.सै. स्कूल में पिछले कुछ वर्षों में दूध पाउडर के पैकेट्स को गड्ढों में दबा दिया गया था। प्रिंसिपल कैलाश चौधरी के अनुसार सीबीईओ के निर्देश पर इस दूध पाउडर को नष्ट कर दिया गया था। 15 सितंबर के बाद सप्लाई नहीं आई और स्कूल में 150 बच्चे हैं जो इसका फायदा नहीं उठा पाए।

मुख्य बिंदू: 

  • पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत कक्षा 5 तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर दूध और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है। 
  • दूध खराब होने के मुख्य कारण स्कूलों में नामांकन में कमी, सप्लाई का न होना और बच्चों द्वारा दूध को नहीं पीना शामिल हैं।
  • प्रशासन ने दूध वितरण को सही तरीके से लागू करने के लिए मुख्य सचिव से निर्देश प्राप्त किए हैं, लेकिन स्कूलों में स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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