मिड-डे-मील घोटाला : आठ पर एसीबी जांच, तीन आईएएस समेत 32 अफसरों पर चुप्पी

राजस्थान के मिड डे मील घोटाले मामले में ईडी की कार्रवाई के दो साल पूरे होने के बाद भी अब तक सरकार ने कार्मिक विभाग से लेकर शिक्षा विभाग और महिला बाल विभाग के कुल 32 अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

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Jaipur. राजस्थान में मिड-डे-मील घोटाले में ईडी छापों के दो साल बाद बड़ी जानकारी सामने आई है। एसीबी ने जांच के दौरान जिन अधिकारियों को दोषी माना था, उनमें तीन जिम्मेदार विभाग कार्मिक विभाग, शिक्षा विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। कुल 40 दोषियों में से सिर्फ 8 अफसरों के खिलाफ एसीबी जांच की अनुमति दी गई, जबकि 3 आईएएस सहित 32 अफसरों पर कार्रवाई के नाम पर सरकार ने चुप्पी साध ली हैं। इनके खिलाफ एसीबी जांच की मंजूरी नहीं दी गई है।

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जांच में पाए गए दोषी

सहकारिता विभाग ने जांच के दौरान मिड डे मील घोटाले में बड़ी गड़बड़ी मानी थी। विभाग की कमेटी ने प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मानते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई है। इस आधार पर सहकारिता विभाग ने एसीबी की ओर से मिली 15 अधिकारियों की सूची में से 8 के खिलाफ एसीबी जांच की मंजूरी (पीसी एक्ट की धारा 17 ए के तहत) दे दी है। हालांकि, पत्र में इन अधिकारियों के नाम नहीं लिखे।

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सरकार ने साधी चुप्पी 

आठ पर एसीबी जांच, तीन आईएएस समेत 32 अफसरों पर चुप्पी : मिड डे मील घोटाले में 3 आईएएस समेत 32 अफसरों के खिलाफ जांच पर सरकार ने चुप्पी साध ली है। इस पूरे मामले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भी सहकारिता विभाग राजस्थान को पत्र भेजा है, जिसमें संख्या के साथ अफसरों नाम भी पूछे गए हैं। जानकारी में यह भी सामने आया है कि मिड डे मील में गड़बड़ी को लेकर एसीबी को पूरी जानकारी ईडी की ओर दी गई थी। 

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आठ के खिलाफ जांच की अनुमति

सहकारी समितियों की तत्कालीन रजिस्ट्रार ने 24 अगस्त 2024 को एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इसमें एसीबी के पत्र में लगाए आरोप की पूरी जांच पड़ताल की गई। कमेटी ने जांच की मंजूरी की सिफारिश की। मंजूरी पर मुहर के लिए फाइल अप्रैल 2025 में सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक के पास भेजी गई। मंत्री विभाग के निर्णय से सहमत हुए। इसके बाद विभाग ने जून 2025 में एसीबी को पत्र लिख कर बताया कि विभाग के 8 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी जाती है।

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एक्शन के नाम पर सिर्फ मंथन 

सरकार इस पूरे घोटाले पर करीब दो साल से कार्रवाई के नाम पर मंथन कर रहीं है, जो अब तक भी पूरा नहीं हुआ है। सहकारिता विभाग ने तो इस पूरे गड़बड़झाले पर अपना जवाब सरकार को दे दिया, लेकिन सरकार चुप्पी साधे हुए है।

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मिड डे मील घोटाला

मिड डे ​मील घोटाले मामले में 3 आईएएस व लेखा सेवा के अधिकारियों पर कार्मिक विभाग को निर्णय लेना है। शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग से भी अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

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एसीबी ने मांगे अधिकारियों के नाम 

एसीबी ने सहकारी विभाग को भेजे पत्र में 15 नाम लिखे थे। इनमें रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल, कानफैड प्रबंध संचालक वी. के. वर्मा, वित्त अधिकारी चौथमल, सहायक लेखाधिकारी सांवतराम, प्रबंधक (नागरिक आपूर्ति) राजेन्द्र शर्मा, लेखाकार लोकेश कुमार, महाप्रबंधक अनिल कुमार, स.प्रबंधक प्रतिभा सैनी, प्रबंधक राजेन्द्र सिंह, व विनोद कुमार, नेतराम मीणा, योगेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र सिंह, गोदाम कीपर रामधन बैरवा, सुपरवाइजर दिनेश शर्मा का नाम है।

सहकारी विभाग ने अपने जवाब में नाम लिखने के बजाय संख्या 8 लिखी है। अन्य को लेकर निर्णय कार्मिक विभाग स्तर पर बताया गया है।

मुख्य बिंदू :

  • मिड-डे-मील घोटाले में दोषी पाए गए 40 अधिकारियों में से केवल 8 अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी दी गई, जबकि बाकी 32 अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
  • सहकारिता विभाग ने मिड-डे-मील घोटाले में गड़बड़ी की शिकायतें पाई थीं और एसीबी की ओर से जांच की मंजूरी देने की सिफारिश की थी, लेकिन अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।
  • सरकार ने मिड-डे-मील घोटाले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर दो साल से मंथन किया है, लेकिन अब तक किसी ठोस कदम की घोषणा नहीं की गई है।
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