भारतीय वायुसेना से विदा लेगा 'उड़ता ताबूत' MiG-21 , राजस्थान से है स्पेशल कनेक्शन, कभी पाकिस्तान के F-104 को दी थी मात

Nitin Kumar Bhal | Jul 23, 2025, 13:24 IST
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MIG 21
Photograph: (The Sootr)

IAF का मिग-21 लड़ाकू विमान 62 साल बाद रिटायर हो रहा है, 'उड़ता ताबूत' कहे जाने वाले मिग-21 को तेजस से बदला जाएगा। पैंथर्स 23 स्क्वाड्रन राजस्थान के नाल एयरबेस पर हैं।

भारतीय वायुसेना (IAF) का सबसे प्रतिष्ठित और लंबे समय तक सेवा देने वाला मिलिट्री एयरक्राफ्ट मिग-21 (MiG-21) अब अपने अंतिम सफर की तैयारी में है। यह विमान भारतीय वायुसेना के लिए 62 सालों तक अहम भूमिका निभाने के बाद रिटायर हो रहा है। मिग-21 का संचालन करने वाली स्क्वाड्रनें राजस्थान (Rajasthan) के बीकानेर में स्थित नाल एयरबेस पर तैनात हैं। इस विमान को विदाई देने के लिए 19 सितंबर को चंडीगढ़ में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया जाएगा।

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1965 के युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक अहम भूमिका

मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक जेट था, जिसने 1965 के युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक हर प्रमुख सैन्य अभियान में अहम भूमिका निभाई। इस विमान ने भारतीय वायुसेना को कई लड़ाइयों में सफलता दिलाई और भारतीय हवाई शक्ति को मजबूती दी। मिग-21 की ऊंची उड़ान और तेज गति ने इसे एक शक्तिशाली लड़ाकू विमान बनाया था। हालांकि, इसके पुराने होने के कारण इसे कई बार 'उड़ता ताबूत' भी कहा गया, क्योंकि इसके साथ कई दुर्घटनाएं भी जुड़ी हैं।

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मिग-21 के बाद 'तेजस' की एंट्री

भारतीय वायुसेना के पास अब मिग-21 की जगह स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) ‘तेजस’ की तैनाती की जाएगी। तेजस तकनीकी रूप से मिग-21 से कहीं अधिक उन्नत और भविष्य के लिए तैयार विमान है। इसकी डिज़ाइन और तकनीक भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तेजस, जिसमें अधिक ताकतवर इंजन और उन्नत प्रणालियां हैं, भारतीय वायुसेना के लिए बेहतर सुरक्षा और शक्ति प्रदान करेगा।

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दुर्घटनाओं के कारण विवादों में आया मिग-21

मिग-21 की ख्याति उसकी तेज गति और शानदार लड़ाकू क्षमता के कारण थी, लेकिन इसकी उम्र और एक के बाद एक दुर्घटनाओं ने इसके बारे में विवाद भी पैदा किया। इसके कई दुर्घटनाओं के कारण इसे 'उड़ता ताबूत' कहा गया, लेकिन भारतीय वायुसेना ने इसके बावजूद इसे अपना विश्वास बनाए रखा और इस विमान ने कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया।

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क्या है मिग—21 का पूरा नाम?

मिकोयान-गुरेविच मिग-21 (अंग्रेज़ी: Mikoyan-Gurevich MiG-21) एक सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है। इसका निर्माण सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो ने किया है।



मिग—21 के बारे में यह भी जानें...

  • मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान था, जिसे 1963 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था।
  • यह विमान 1960-70 के दशक में तकनीकी रूप से काफी उन्नत था।
  • 1970 से 2000 तक मिग-21 भारतीय वायुसेना का अहम हिस्सा रहा, जब तक सुखोई-30 को शामिल नहीं किया गया था।
  • मिग-21 सभी मौसमों में कार्य करने में सक्षम था और यह हवा से जमीन पर मार करने वाले विभिन्न प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम था।
  • मिग-21 ने कई महत्वपूर्ण युद्धों में भाग लिया:
    • 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध
    • 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम
    • 1999 में कारगिल युद्ध
    • 2019 में बालाकोट हवाई हमले।
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी मिग-21 अलर्ट पर था।
  • 1971 के युद्ध में मिग-21 ने पाकिस्तानी ठिकानों पर 500 किलोग्राम बम गिराए थे।
  • मिग-21 और पाकिस्तान के एफ-104ए के बीच पहली मुठभेड़ में मिग-21 ने पाकिस्तान के विमान को नष्ट कर दिया था।
  • मिग-21 की कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये थी और यह रूस से खरीदा गया था।
  • भारत को कुल 874 मिग-21 मिले थे, जिनमें से 600 मिग-21 का निर्माण भारत में ही किया गया था।
  • पिछले कुछ वर्षों में मिग-21 के क्रैश होने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद इसे 'उड़ता ताबूत' कहा जाने लगा।
  • मिग-21 पैंथर्स 23 स्क्वाड्रन का हिस्सा है, जो राजस्थान के नाल एयरबेस पर स्थित है।
  • मिग-21 के सम्मान में चंडीगढ़ एयरबेस पर विदाई समारोह का आयोजन किया जाएगा।
  • मिग-21 की जगह अब भारतीय वायु सेना में एलसीए मार्क 1ए विमान को तैनात किया जाएगा।


मिग-21 का सफर कैसे शुरू हुआ?

मिग-21 को 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। 1962 में चीन के साथ युद्ध में मिली हार के बाद भारतीय वायुसेना को एक ताकतवर और अत्याधुनिक फाइटर जेट की सख्त जरूरत थी। उस समय रूसी मिग-21 दुनिया के सबसे बेहतरीन और उन्नत इंटरसेप्टर विमानों में से एक माना जाता था। यह विमान छोटा, तेज, और फुर्तीला था, और सिंगल इंजन वाला सिंगल-सीटर फाइटर जेट ध्वनि की गति से भी दोगुनी रफ्तार से उड़ सकता था।



तेजस Mk1A की नई खूबियां क्या हैं?

  • AESA रडार : इसमें इज़राइली EL/M-2025 AESA रडार लगाया गया है, जिसे बाद में भारत में विकसित ‘उत्तम’ रडार से बदला जाएगा। यह 200 किलोमीटर से ज्यादा रेंज में कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है।
  • डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम : इससे विमान को बेहद सटीक नियंत्रण मिलता है और यह इलेक्ट्रॉनिक तौर पर उड़ान संचालित करता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम : इसमें रडार वॉर्निंग रिसीवर और एडवांस्ड सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर जैसे आधुनिक सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों और रडार से बचाव करते हैं
  • मल्टी-रोल हथियार क्षमता : तेजस Mk1A के पास 9 हार्डपॉइंट होंगे, जिन पर BVR मिसाइलें, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें तथा बम लगाए जा सकते हैं। भारतीय वायुसेना ने HAL से तेजस Mk1A के 83 विमान ₹36,468 करोड़ की लागत से ऑर्डर किए हैं।
  • डिलीवरी में देरी : GE द्वारा निर्मित F-404 इंजन की आपूर्ति भी दो साल पीछे चल रही है।


FAQ

  1. 1. मिग-21 को क्यों रिटायर किया जा रहा है?
    मिग-21 को रिटायर किया जा रहा है क्योंकि यह विमान अब पुराना हो चुका है और इसकी जगह अधिक उन्नत तकनीक वाला हल्का लड़ाकू विमान 'तेजस' लिया जाएगा।
  2. 2. मिग-21 को 'उड़ता ताबूत' क्यों कहा गया?
    मिग-21 को 'उड़ता ताबूत' इसलिए कहा गया क्योंकि इसके कई हादसों के बाद यह विमान सुरक्षा के लिहाज से विवादों में रहा है।
  3. 3. मिग-21 की जगह कौन सा विमान लेगा?
    मिग-21 की जगह भारतीय वायुसेना में स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) ‘तेजस’ की तैनाती की जाएगी, जो तकनीकी रूप से अधिक उन्नत है।

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