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Photograph: (The Sootr)
Chittorgarh: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में नपानिया गांव के युवाओं ने साबित कर दिया कि अपनी मिट्टी को कभी भुलाया नहीं जा सकती हैं। उन्होंने बता दिया की अपनी मिट्टी और गोसेवा के संस्कार कभी भुलाये नहीं जाते हैं। फिर चाहें दुनिया के किसी भी कोने में बसे हों। दुबई, लंदन, अमरीका और जापान जैसे देशों में करियर बना चुके इन युवाओं ने अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए करीब 20 लाख रुपए की लागत से एक विशाल नंदेश्वर गोशाला का निर्माण करवाया है।
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11 देशों से जुड़ी एक सामूहिक पहल
नंदेश्वर गोशाला का निर्माण एक सामूहिक प्रयास का परिणाम हैं। इस पहल में नपानिया गांव के वे युवा शामिल है जो दुनिया भर में रह रहे हैं। 11 देशों के युवाओं ने इस परियोजना के लिए दान और सहयोग किया। इनके साथ स्थानीय भामाशाहों ने भी दिल खोलकर मदद की। इस गोशाला का शुभारंभ 11 जनवरी को किया गया। इस शुभारंभ में स्थानीय 151 गांवों के गामीणो ने भी भाग लिया ।
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गायों को देख हुए पहल
नपानिया गांव के युवा कई देशों में काम करते हैं। जब भी वे त्योहारों पर अपने गांव लौटते, तो सड़कों पर बेसहारा और चोटिल गयों को दुखता देख वे असहज महसूस करते थे। इसी असहजता के कारण पिछले साल उन्होंने इस समस्या का समाधान खोजने का संकल्प लिया। शुरुआत महज 11-11 हजार रुपए के अंशदान से हुई, लेकिन समय के साथ यह पहल बढ़ती गई और स्थानीय और प्रवासी भारतीयों का सहयोग भी मिला।
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20 बीघा ज़मीन पर गोशाला
गोशाला का निर्माण लगभग 20 बीघा भूमि पर किया गया हैं। जो की सांवलियाजी मार्ग पर स्थित है। यहां एक विशाल शेड बनवाया गया है, जिसकी लागत 15 लाख रुपए आई। इस शेड का उद्देश्य गोवंश को हर मौसम से सुरक्षा देना है। कई लोगों ने इस निर्माण कार्य में अपना योगदान दिया। किसी ने नांद (पशु खेळ) बनवाया, तो किसी ने बिजली कनेक्शन और समतलीकरण में श्रमदान किया।
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ग्रामीणों के अनुसार
नपानिया के युवाओं ने इस कार्य को एक ठोस संकल्प में बदला। "सड़कों पर चोटिल गोवंश को देख मन दुखी होता था। हमने तय किया कि अपनी कमाई का एक हिस्सा माटी और गोमाता को अर्पित करेंगे। गांव की एकता से ही यह संभव हुआ," यह कहना था उदयलाल मेनारिया, प्रेम मेनारिया, संजय जाट और अन्य युवाओं का।
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एक विश्वास की मिसाल
"700 वर्ष पहले नरसीजी के भरोसे पर द्वारिकाधीश आए थे, आज उसी अटूट विश्वास के साथ नपानिया के युवा गोमाता के लिए भरोसे की कथा कर रहे हैं। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए एक मिसाल है," पं. राकेश पुरोहित, प्रशासनिक संत ने इस कार्य को एक प्रेरणा बताया।
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नंदेश्वर गोशाला के मुख्य बिंदू:
- नपानिया गांव के युवाओं और प्रवासी भारतीयों ने मिलकर 20 लाख रुपए की लागत से नंदेश्वर गोशाला का निर्माण किया। इसका उद्देश्य गोवंश की सुरक्षा और देखभाल करना है।
- नपानिया के युवाओं ने सड़कों पर बेसहारा और घायल गोवंश को देखकर यह संकल्प लिया कि वे गोसेवा के लिए कार्य करेंगे। उनका उद्देश्य गोवंश को उचित संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करना था।
- नंदेश्वर गोशाला के निर्माण में नपानिया के प्रवासी भारतीयों और स्थानीय भामाशाहों का योगदान रहा। कई लोगों ने श्रमदान, धन दान और अन्य संसाधनों के रूप में मदद की।
- प्रवासी भारतीयों की गोसेवा देख इलाके में चर्चा का विषय बना हैं।
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