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Photograph: (the sootr)
Jaipur. राजस्थान में पंचायतों और स्थानीय निकायों के चुनाव 15 अप्रेल होने में संशय दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तारीख तक ये चुनाव कराने की डेडलाइन तय की है। लेकिन, चुनाव करवाने की राह में पंचायती राज और नगरीय निकायों में ओबीसी वार्ड का निर्धारण नहीं होना बड़ी रुकावट बन रहा है।
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ओबीसी आयोग का कार्यकाल बढ़ा
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप ओबीसी वार्ड तय करने के लिए 9 मई, 2025 को ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग का ग​ठन किया था। आयोग को तीन महीने में अपना काम पूरा करना था। लेकिन, दो बार कार्यकाल बढ़ाने के बावजूद आयोग अब तक काम पूरा नहीं कर पाया है। सरकार ने अब आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर 31 मार्च तक किया है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हर हाल में 15 अप्रेल तक चुनाव करवाकर पंचायतों व निकायों के गठन का काम पूरा करना है।
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रिपोर्ट नहीं मिली तो नहीं होंगे चुनाव
आयोग का कार्यकाल 31 मार्च तक बढ़ाने से 15 अप्रेल तक चुनाव होने में संशय उत्पन्न हो गया है। स्थिति यह है कि ओबीसी वार्ड तय हुए बिना चुनाव नहीं हो सकते हैं। साथ ही 15 अप्रेल तक चुनाव करवाना की बंदिश भी है। उधर, आयोग के सदस्य एडवोकेट गोपालकृष्ण शर्मा का दावा है, हम सभी पहलुओं से परिचित है। आयोग ने 90 फीसदी काम पूरा कर लिया है। हम अगले 10 से 15 दिन में काम पूरा करके सरकार को रिपोर्ट सौंप देंगे।
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निर्वाचन आयोग को भी चाहिए पर्याप्त समय
सूत्रों का कहना है कि पंचायती राज और निकाय चुनाव करवाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को भी पर्याप्त समय चाहिए। आयोग के अनुसार उन्हें वोटर लिस्ट व वार्ड निर्धारण करने के बाद भी कम से कम 30 दिन का समय चाहिए होगा। ऐसे में यदि ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग ने अगले 10 से 15 दिन में रिपोर्ट नहीं दी तो निर्धारित 15 अप्रेल तक चुनाव करवाना संभव नहीं होगा।
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सुप्रीम कोर्ट का ही है आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में पंचायत व निकाय चुनावों से पहले ओबीसी वार्ड तय करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के अनुसार ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट को पूरा करना जरुरी है।
यह है ट्रिपल टैस्ट:
- समर्पित आयोग का गठन: स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभाव की जांच के लिए एक विशेष आयोग बनाना।
- अनुभवजन्य डेटा: आयोग की सिफारिशों के आधार पर प्रत्येक स्थानीय निकायवार (पंचायत/निकाय) आरक्षण के अनुपात का निर्धारण करना।
- 50% की सीमा: कुल आरक्षण एससी-एसटी-ओबीसी को मिलाकर, किसी भी स्थिति में कुल सीटों के 50% से अधिक नहीं हो।
इनमें तय होंगे आरक्षित वार्ड
ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान में पंचायत चुनाव के लिए 14,635 ग्राम पंचायत, 450 पंचायत समिति और 41 जिला परिषद में ओबीसी वार्ड तय होंगे। साथ ही सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख के लिए ओबीसी आरक्षण निर्धारित होगा। निकायों में भी आरक्षण इसी के आधार पर तय हाेगा।
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इसलिए जरूरी ओबीसी आरक्षण
संविधान के अनुच्छेद-243 टी के अनुसार पंचायत व नगर निकाय चुनाव में एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण दिया जाता है। लेकिन यह काम तय सिद्धांतों के अनुसार निष्पक्ष होना चाहिए। ओबीसी के साथ परेशानी यह है कि उनकी जनगणना के आंकडे उपलब्ध नहीं हैं, जबकि एससी व एसटी के जनसंख्या आंकडे उपलब्ध हैं।
ऐसे में राज्य सरकारें फौरी तौर पर बिना कोई सर्वे करवाए ही ओबीसी वार्ड तय कर देती थीं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण दिए बिना पंचायत व निकाय चुनाव करवाने पर पाबंदी लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में विस्तृत आदेश में ओबीसी आरक्षण तय करके ही पंचायत व निकाय चुनाव करवाने के आदेश दिए थे।
मुख्य बिंदू:
- ओबीसी आरक्षण का निर्धारण संविधान के तहत किया गया है, ताकि चुनावों में ओबीसी वर्ग के लोगों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
- अगर रिपोर्ट समय पर नहीं दी जाती है, तो 15 अप्रैल तक चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि ओबीसी वार्ड का निर्धारण जरूरी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' की शर्त रखी थी, जिसके तहत एक विशेष आयोग का गठन, अनुभवजन्य डेटा और 50% की सीमा तय की गई है।
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