दवा के नाम पर नसों में दौड़ा पानी, कोटा में प्रसूताओं को लगे इंजेक्शन जांच में पाए गए घटिया

Jageshwar prasad | May 26, 2026, 12:00 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-26T164242.804
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत के बाद हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है। ड्रग कंट्रोलर ने जिस कंपनी के घटिया इंजेक्शनों पर बैन लगाया है, उसी का उपयोग कोटा की प्रसूताओं के लिए किया गया।

News In Short

  • राजस्थान में प्रसूताओं को लगने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जांच में घटिया मिला।
  • ड्रग कंट्रोल विभाग ने इंजेक्शन की बिक्री और उपयोग पर लगाया प्रतिबंध।
  • यह इंजेक्शन अमृतसर की जैक्सन लेबोरेट्रीज का था, इसमें ऑक्सीटोसिन कंपोनेंट कम मिला।
  • कोटा मेडिकल कॉलेज में 4 महीने में 12,500 महिलाओं को इसी कंपनी का इंजेक्शन लगाया।
  • ड्रग कंट्रोल विभाग ने कंपनी की अन्य दवाओं के सैंपल जांचने के निर्देश दिए हैं।

News In Detail

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में पांच प्रसूताओं की मौत ने पूरे चिकित्सा जगत को हिलाकर रख दिया था। अब इस मामले में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फुला दिए हैं।

ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने जिस फार्मा कंपनी के ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) इंजेक्शन की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है, उसी कंपनी की दवा का भारी-भरकम स्टॉक कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था।

​जब जीवन रक्षक दवा ही बन गई पानी​

ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के मुताबिक पंजाब के अमृतसर की जैक्सन लेबोरेट्रीज के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन TOCIN (5ml) का सैंपल जांच में बेहद घटिया और अमानक पाया गया है।

लैब टेस्टिंग में जो रिपोर्ट सामने आई, वह हैरान करने वाली थी- इंजेक्शन के अंदर मौजूद मुख्य जीवन रक्षक कंपोनेंट ऑक्सीटोसिन की मात्रा लगभग शून्य (जीरो) मिली।

​यानी जिस इंजेक्शन को प्रसूताओं की रगों में जिंदगी बचाने के लिए दौड़ाया जा रहा था, उसमें काम का कोई तत्व था ही नहीं। यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ एक जानलेवा खिलवाड़ जैसा है।

​कोटा में 12,500 महिलाओं को लग चुका था इंजेक्शन

​इस पूरे मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि पिछले 4 महीनों के भीतर कोटा में करीब 12,500 प्रसूताओं को इसी दागी कंपनी का इंजेक्शन लगाया जा चुका है।

अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक कोटा में इस कंपनी के करीब 15,000 इंजेक्शन सप्लाई किए गए थे, जिनमें से अधिकांश का इस्तेमाल डिलीवरी के दौरान कर लिया गया।

​क्या है 1ml और 5ml का पेच?

हालांकि, ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि सरकार ने जिस बैच (बैच संख्या: I-7881) को बैन किया है, वह 5ml क्वांटिटी का है, जबकि कोटा के अस्पतालों में प्रसूताओं को 1ml क्वांटिटी वाले इंजेक्शन लगाए गए थे।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब एक ही कंपनी के एक बड़े बैच में इतनी भारी लापरवाही सामने आई है, तो 1ml वाले इंजेक्शन की गुणवत्ता भी पूरी तरह संदेह के घेरे में आ जाती है। उसमें भी घटिया सामग्री होने की पूरी आशंका है।

3,500 वायल जब्त

जैसे ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, ड्रग कंट्रोल विभाग ने बिना वक्त गंवाए न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के ड्रग स्टोर पर छापा मारा। अस्पताल के काउंटरों और मुख्य स्टोर से ऑक्सीटोसिन दवा के बचे हुए स्टॉक को तुरंत सीज कर दिया गया।

अब तक करीब 3,500 वायल (इंजेक्शन) जब्त किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, जहां-जहां से अस्पताल में इन दवाओं की री-सप्लाई की जा रही थी, उन ठिकानों पर भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है।

​आखिर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए क्यों ब्रह्मास्त्र है ऑक्सीटोसिन?

​चिकित्सा विज्ञान में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। डिलीवरी के समय इसके दो मुख्य काम होते हैं:

​लेबर पेन बढ़ाना: जिन महिलाओं को प्राकृतिक रूप से प्रसव पीड़ा शुरू नहीं होती, उन्हें प्रसव प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए यह दिया जाता है।

​ब्लीडिंग रोकना: बच्चे के जन्म के ठीक बाद मां के गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक रक्तस्त्राव (Postpartum Hemorrhage) को रोकने के लिए यह इंजेक्शन सबसे बड़ा हथियार है।

​यदि इस इंजेक्शन में कंपोनेंट ही जीरो होगा, तो प्रसव के बाद अत्यधिक खून बहने से महिला की मौत भी हो सकती है। कोटा में हुई पांच प्रसूताओं की मौत के पीछे क्या यही असली वजह थी? इसकी कड़ियों को अब बारीकी से जोड़ा जा रहा है।

​राजस्थान में बढ़ेगा जांच का दायरा

​ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने साफ किया है कि मामला सिर्फ एक इंजेक्शन तक सीमित नहीं रहेगा। अब जैक्सन लेबोरेट्रीज द्वारा बनाई जाने वाली अन्य सभी दवाइयों और ऑक्सीटोसिन के अलग-अलग बैचों के सैंपल लेकर भी जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीटोसिन एक तापमान-संवेदनशील (Temperature-sensitive) दवा है। अगर इसे सही कोल्ड-चेन (निर्धारित ठंडे तापमान) में स्टोर न किया जाए, तो भी इसका असर खत्म हो जाता है।

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