पंचायत चुनाव: नामांकन खारिज होने पर हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति से भरा था फॉर्म

Ashish Bhardwaj | Oct 22, 2026, 13:11 IST
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कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज
कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज

पंचायत चुनाव में नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेयस प्रत्याशी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका पर सुनवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की की विशेष बेंच ने कांग्रेस प्रत्याशी अनिल की याचिका पर सुनवाई की। हालांकि कोर्ट से याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रीया के बीच दखल देनें से मना कर दिया।

राजस्थान में पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन खारिज होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन उम्मीदवार को राहत नहीं मिली। अलवर जिले की लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के वार्ड नंबर 4 से कांग्रेस प्रत्याशी अनिल सैनी ने अपना नामांकन निरस्त किए जाने पर कोर्ट में चुनौती दी थी। राजस्थान हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने बुधवार, 21 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस रवि चिरानिया ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद नामांकन से जुड़े विवाद को चुनौती देने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।

15 अक्टूबर को भरा था नामांकन

अनिल सैनी ने 15 अक्टूबर 2026 को लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के वार्ड नंबर 4 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। 17 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका पर्चा खारिज कर दिया। इसके बाद अनिल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नामांकन निरस्त करने के आदेश को रद्द करने और 28 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आराधना स्वामी ने अदालत को बताया कि अनिल के खिलाफ वर्ष 2018 में लक्ष्मणगढ़ थाने में FIR दर्ज हुई थी। इस मामले में लक्ष्मणगढ़ की ACJM अदालत ने 18 नवंबर 2021 को संज्ञान लिया था। अनिल ने नामांकन फॉर्म में FIR और अदालत के संज्ञान लेने की जानकारी दी थी।

तारीख भरने में गलती का दिया तर्क

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि नामांकन फॉर्म भरते समय मानवीय भूल हो गई। अदालत का नाम और संज्ञान लेने की तारीख उस कॉलम में दर्ज हो गई, जिसमें यह बताना था कि आपराधिक मामले में आरोप तय हुए हैं या नहीं।

वकील के अनुसार, अनिल के खिलाफ संबंधित मामले में आरोप तय नहीं हुए थे। उनका कहना था कि यह एक तकनीकी या लिपिकीय गलती थी, जिसे ठीक किया जा सकता था। उन्होंने अदालत से नामांकन खारिज करने का आदेश रद्द करने और उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का अवसर देने की मांग की।

सरकार ने चुनाव प्रक्रिया का दिया हवाला

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने और प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत के हस्तक्षेप पर संवैधानिक और कानूनी रोक है।

सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 243-O, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 117 और राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम 80 का हवाला दिया। सरकार की ओर से कहा गया कि नामांकन फॉर्म में अदालत का नाम और तारीख उम्मीदवार ने खुद दर्ज की थी। बाद में दूसरे दस्तावेज देकर उस जानकारी को बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सरकार का तर्क था कि यदि किसी उम्मीदवार को नामांकन खारिज करने के फैसले पर आपत्ति है, तो वह चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान में पंचायत चुनाव की अधिसूचना 3 अक्टूबर और संशोधित अधिसूचना 6 अक्टूबर 2026 को जारी हो चुकी थी। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई थी।

संविधान का अनुच्छेद 243-O पंचायत चुनावों से जुड़े विवादों में अदालतों के हस्तक्षेप को सीमित करता है। ऐसे विवादों को कानून में तय प्रक्रिया के जरिए उठाना होता है। अदालत ने इसी आधार पर अनिल की रिट याचिका खारिज कर दी।

चुनाव के बाद याचिका का विकल्प

इस फैसले में हाईकोर्ट ने नामांकन फॉर्म में हुई कथित गलती की सही या गलत होने पर अंतिम निर्णय नहीं दिया। अदालत का फैसला चुनाव प्रक्रिया के दौरान दखल देने की सीमा से जुड़ा है।

अनिल सैनी के पास चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कानून के मुताबिक चुनाव याचिका दायर कर नामांकन खारिज करने के फैसले को चुनौती देने का विकल्प है। फिलहाल हाईकोर्ट से उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली है।
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