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Photograph: (the sootr)
News In Short
- मार्च में पंचायत राज्य और अप्रैल में हो सकते हैं निकाय चुनाव
- राज्य चुनाव आयोग से मिले संकेत, तीन चरणों में हो सकते हैं पंचायत चुनाव
- ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने पर भी होंगे चुनाव
- कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव करवाने के दे रखे हैं निर्देश
- राज्य चुनाव आयोग चुनाव तैयारियों में जुटा
News In Detail
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव मार्च महीने में तीन चरणों में कराए जा सकते हैं। राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा फरवरी के अंत में या मार्च के पहले सप्ताह में हो सकती है। पंचायत चुनाव के बाद नगरीय निकायों के चुनाव अप्रैल में कराए जा सकते हैं।
अभी तय नहीं हुई ओबीसी सीटें
राज्य चुनाव आयोग से यह भी संकेत मिला है कि ओबीसी सीट तय नहीं होने की स्थिति में भी चुनाव तय समय में कराए जाएंगे। पंचायत और पालिका चुनाव में ओबीसी सीट तय करने के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व ओबीसी आयोग ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। हालांकि, उसकी तरफ से कहा गया है कि रिपोर्ट जल्द ही पेश कर दी जाएगी। दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि ओबीसी सीट तय नहीं होने पर चुनाव कराने में मुश्किल आ सकती है।
यह सरकार का काम
राजस्थान में 27 नवंबर, 1995 के बाद दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता पर पंचायत व नगर पालिका चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस पाबंदी को खत्म करने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार बजट सत्र में पंचायती राज कानून में संशोधन कर सकती है। बजट सत्र में संशोधन नहीं होने पर सरकार अध्यादेश भी ला सकती है।
तो चुनाव कैसे होंगे
राजस्थान सरकार ने पंचायतों व स्थानीय निकायों में ओबीसी की सीट तय करने के लिए ओबीसी आयोग बनाया है। इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी सीट तय होंगी। लेकिन, आयोग ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद निर्वाचन आयोग को भी ओबीसी सीट तय करने में करीब एक सप्ताह का समय लगेगा।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ओबीसी सीट तय हुए बिना भी पंचायत व नगर पालिकाओं के चुनाव हो सकेंगे! हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पंचायतों व नगर पालिकाओं में ओबीसी सीट तय हुए बिना चुनाव नहीं हो सकते। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार ओबीसी सीट तय हुए बिना भी वर्तमान स्थिति के अनुसार चुनाव करवाए जा सकते हैं।
एक साथ चुनाव में कानूनी अड़चन
सत्तारुढ़ भाजपा सभी पंचायतों, जिला परिषदों तथा नगर पालिकाओं के चुनाव एक साथ करने की मंशा जता चुकी है। लेकिन, इसमें सबसे बड़ी बाधा वह पंचायत व पालिका हैं जिनका कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है। पंचायतों व नगर पालिकाओं का पांच साल का कार्यकाल संविधानिक अधिकार है। सरकार अपनी मर्जी से संविधानिक व्यवस्था को भंग नहीं कर सकती।
समय बढ़ाने को कोर्ट जा सकती है सरकार
राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव करवाने के निर्देश दे रखे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के इस आदेश को बहाल रखा है। राजनीतिक मजबूरियों के चलते सरकार ओबीसी सीट हुए बिना चुनाव करवाकर ओबीसी जैसे बड़े ​वर्ग को नाराज नहीं करना चाहेगी। इसलिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी होने पर सरकार बचाव के लिए हाईकोर्ट में चुनाव पूरे करवाने की तारीख 15 अप्रैल से बढ़ाने के लिए गुहार कर सकती है।
आ सकती है कानूनी दिक्कतें
पंचायताओं व नगर पालिकाएं संविधानिक संस्थाएं हैं और इनका कार्यकाल पांच साल तय है। इसलिए इनका कार्यकाल तय समय से पहले घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर इसमें कानूनी रुप से बड़ी परेशानी हो सकती है।
आर.बी.माथुर, सीनियर एडवोकेट,राजस्थान हाई कोर्ट
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