क्या पावर नैप याददाश्त और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करती है या केवल एक झूठा आराम है?
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 06, 2026, 12:21 IST
15 से 20 मिनट की छोटी झपकी पावर नैप कहलाती है
काम या अध्ययन करते वक्त आंखों में भारीपन आना एक सामान्य समस्या है। ऐसे में छोटी सी झपकी लेने से मानसिक थकान को कम किया जा सकता है। 15 से 20 मिनट की पावर नैप लेने से जागरूकता में सुधार देखने को मिलता है। सही समय और सीमित नैप का लाभ लिए जाने से ध्यान और मूड को भी बेहतर किया जा सकता है।
दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक नींद आने लगे तो इसे सिर्फ आलस्य समझकर नजरअंदाज करना हमेशा सही नहीं है। दिन के बीच थोड़ी देर की झपकी शरीर और दिमाग को आराम देने का एक आसान तरीका हो सकती है। खासतौर पर लगातार स्क्रीन पर काम करने, लंबे सफर, ऑफिस के तनाव और गर्म मौसम के बीच छोटी पावर नैप थकान कम करने और सतर्कता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
दिन में सोने की आदत को लेकर हुए एक बड़े शोध में मस्तिष्क की सेहत से जुड़ा दिलचस्प संबंध सामने आया है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ द रिपब्लिक, उरुग्वे के शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक आंकड़ों और ब्रेन स्कैन का विश्लेषण किया। शोध में करीब 3.78 लाख लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया, जबकि लगभग 35 हजार लोगों के MRI स्कैन उपलब्ध थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित दिन की झपकी लेने की आनुवंशिक प्रवृत्ति वाले लोगों में कुल मस्तिष्क का आयतन औसतन 15.8 घन सेंटीमीटर अधिक था
राजस्थान जैसे गर्म और अधिक तापमान वाले इलाकों के लिए यह शोध खास मायने रखता है। यहां दोपहर के समय बढ़ती गर्मी के साथ शरीर में थकान और सुस्ती महसूस होना आम बात है। जयपुर जैसे शहरों में नौकरी और कारोबार के सिलसिले में लंबी दूरी तय करने वाले लोगों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसके अलावा ट्रैफिक, लगातार स्क्रीन पर काम करना और ऑफिस का मानसिक दबाव दोपहर तक थकान बढ़ा सकता है।
बैंक, निजी कंपनियों, मीडिया हाउस, कॉल सेंटर और IT क्षेत्र में लगातार बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए 10 से 20 मिनट की पावर नैप एक व्यावहारिक ब्रेक हो सकती है। इतनी छोटी झपकी का उद्देश्य लंबी नींद लेना नहीं, बल्कि दिन के बीच मस्तिष्क और शरीर को थोड़ी देर आराम देना है। इससे काम के दौरान महसूस होने वाली सुस्ती कम करने और दोबारा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
दिनभर लगातार मोबाइल, कंप्यूटर स्क्रीन, सूचनाओं और काम के दबाव के बीच मस्तिष्क को भी रिकवरी का समय चाहिए। ऐसे में नियंत्रित और छोटी झपकी को काम से बचने या आलस्य के तौर पर देखने के बजाय एक छोटे रिकवरी ब्रेक के रूप में समझा जा सकता है।
पावर नैप के लिए आमतौर पर 10 से 20 मिनट का समय उपयुक्त माना जाता है। करीब 20 मिनट की झपकी में व्यक्ति आमतौर पर गहरी नींद के चरण में जाने से पहले जाग सकता है। इससे उठने के बाद होने वाली सुस्ती यानी Sleep Inertia कम रहने की संभावना होती है।
अगर आप दिन में नैप लेना चाहते हैं तो अलार्म लगाकर सीमित समय के लिए सोना बेहतर तरीका हो सकता है। खासकर ऑफिस या पढ़ाई के बीच छोटी झपकी लेने वाले लोगों के लिए यह ज्यादा व्यावहारिक है।
1. थकान कम करने में मदद
छोटी झपकी दिन के बीच महसूस होने वाली थकान को कम कर सकती है।
2. फोकस बेहतर हो सकता है
नैप के बाद कुछ समय के लिए ध्यान और सतर्कता में सुधार महसूस हो सकता है।
3. मूड बेहतर करने में मदद
आराम मिलने से चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान कम महसूस हो सकती है।
4. याददाश्त को सपोर्ट कर सकती है
नींद सीखने और याददाश्त से जुड़ी मानसिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। छोटी झपकी कुछ परिस्थितियों में मेमोरी और संज्ञानात्मक प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकती है।
5. काम करने की क्षमता बढ़ सकती है
थकान कम होने और अलर्टनेस बढ़ने से काम या पढ़ाई पर दोबारा ध्यान लगाना आसान हो सकता है।
आमतौर पर दोपहर के शुरुआती समय, करीब 1 से 3 बजे के बीच, छोटी नैप लेना ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है। इस समय शरीर में स्वाभाविक रूप से थोड़ी सुस्ती महसूस हो सकती है। शाम के बहुत देर से सोने पर कुछ लोगों की रात की नींद प्रभावित हो सकती है। इसलिए अगर आपको रात में सोने में परेशानी होती है तो दिन में नैप का समय और अवधि दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
अगर उद्देश्य सिर्फ शरीर और दिमाग को थोड़ी देर आराम देना है तो लंबी दोपहर की नींद लेने से बचना बेहतर है। करीब एक घंटे के आसपास जागने पर व्यक्ति गहरी नींद के चरण से उठ सकता है, जिससे कुछ समय तक भारीपन और सुस्ती महसूस हो सकती है।
हालांकि, नैप की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। जो लोग रात में पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, शिफ्ट में काम करते हैं या लगातार नींद की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि पावर नैप को रात की पर्याप्त नींद का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति रोज पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिन में लगातार बहुत ज्यादा नींद महसूस करता है, तो इसके पीछे नींद से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में सिर्फ बार-बार झपकी लेने के बजाय डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के आयतन में इस अंतर को उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा। उनके अनुमान के मुताबिक यह अंतर करीब 2.6 से 6.5 साल तक कम मस्तिष्कीय उम्र बढ़ने के बराबर हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि रोज 20 मिनट सोने से किसी व्यक्ति का दिमाग सचमुच 3 से 7 साल पीछे चला जाएगा। यह अध्ययन मस्तिष्क के आकार और झपकी की आदत के बीच संबंध की ओर इशारा करता है। इसे दिमाग को फिर से युवा बनाने का सीधा इलाज नहीं माना जा सकता।
शोध में यह भी महत्वपूर्ण बात सामने आई कि झपकी लेने की आनुवंशिक प्रवृत्ति का संबंध बड़े कुल ब्रेन वॉल्यूम से तो मिला, लेकिन हिप्पोकैम्पस के आकार, रिएक्शन टाइम और विजुअल मेमोरी जैसे दूसरे परीक्षणों में स्पष्ट अंतर नहीं मिला। इसलिए इसे यह कहकर पेश करना सही नहीं होगा कि झपकी लेने से व्यक्ति निश्चित तौर पर ज्यादा बुद्धिमान या तेज हो जाता है।
दिन में सोने की आदत को लेकर हुए एक बड़े शोध में मस्तिष्क की सेहत से जुड़ा दिलचस्प संबंध सामने आया है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ द रिपब्लिक, उरुग्वे के शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक आंकड़ों और ब्रेन स्कैन का विश्लेषण किया। शोध में करीब 3.78 लाख लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया, जबकि लगभग 35 हजार लोगों के MRI स्कैन उपलब्ध थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित दिन की झपकी लेने की आनुवंशिक प्रवृत्ति वाले लोगों में कुल मस्तिष्क का आयतन औसतन 15.8 घन सेंटीमीटर अधिक था
दिमाग के लिए क्यों फायदेमंद हो सकती है छोटी झपकी?
बैंक, निजी कंपनियों, मीडिया हाउस, कॉल सेंटर और IT क्षेत्र में लगातार बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए 10 से 20 मिनट की पावर नैप एक व्यावहारिक ब्रेक हो सकती है। इतनी छोटी झपकी का उद्देश्य लंबी नींद लेना नहीं, बल्कि दिन के बीच मस्तिष्क और शरीर को थोड़ी देर आराम देना है। इससे काम के दौरान महसूस होने वाली सुस्ती कम करने और दोबारा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
दिनभर लगातार मोबाइल, कंप्यूटर स्क्रीन, सूचनाओं और काम के दबाव के बीच मस्तिष्क को भी रिकवरी का समय चाहिए। ऐसे में नियंत्रित और छोटी झपकी को काम से बचने या आलस्य के तौर पर देखने के बजाय एक छोटे रिकवरी ब्रेक के रूप में समझा जा सकता है।
20 मिनट की नैप क्यों मानी जाती है बेहतर?
अगर आप दिन में नैप लेना चाहते हैं तो अलार्म लगाकर सीमित समय के लिए सोना बेहतर तरीका हो सकता है। खासकर ऑफिस या पढ़ाई के बीच छोटी झपकी लेने वाले लोगों के लिए यह ज्यादा व्यावहारिक है।
पावर नैप से मिल सकते हैं ये फायदे
छोटी झपकी दिन के बीच महसूस होने वाली थकान को कम कर सकती है।
2. फोकस बेहतर हो सकता है
नैप के बाद कुछ समय के लिए ध्यान और सतर्कता में सुधार महसूस हो सकता है।
3. मूड बेहतर करने में मदद
आराम मिलने से चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान कम महसूस हो सकती है।
4. याददाश्त को सपोर्ट कर सकती है
नींद सीखने और याददाश्त से जुड़ी मानसिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। छोटी झपकी कुछ परिस्थितियों में मेमोरी और संज्ञानात्मक प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकती है।
5. काम करने की क्षमता बढ़ सकती है
थकान कम होने और अलर्टनेस बढ़ने से काम या पढ़ाई पर दोबारा ध्यान लगाना आसान हो सकता है।
पावर नैप का सही समय क्या है?
कितनी देर की नींद से बचना चाहिए?
हालांकि, नैप की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। जो लोग रात में पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, शिफ्ट में काम करते हैं या लगातार नींद की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है।
पावर नैप रात की नींद का विकल्प नहीं
झपकी से दिमाग कितने साल युवा?
शोध में यह भी महत्वपूर्ण बात सामने आई कि झपकी लेने की आनुवंशिक प्रवृत्ति का संबंध बड़े कुल ब्रेन वॉल्यूम से तो मिला, लेकिन हिप्पोकैम्पस के आकार, रिएक्शन टाइम और विजुअल मेमोरी जैसे दूसरे परीक्षणों में स्पष्ट अंतर नहीं मिला। इसलिए इसे यह कहकर पेश करना सही नहीं होगा कि झपकी लेने से व्यक्ति निश्चित तौर पर ज्यादा बुद्धिमान या तेज हो जाता है।
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