हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत, कुचेरा एफआईआर पर लगी अंतरिम रोक
Jageshwar prasad | Oct 06, 2026, 11:49 IST
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने सांसद हनुमान बेनीवाल को नागौर के कुचेरा थाने में दर्ज एफआईआर पर अंतरिम राहत दी।
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने सांसद हनुमान बेनीवाल को पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इस मामले में निषेधाज्ञा के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था, जो कि 2024 के चुनाव से जुड़ा है।
राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) की जोधपुर पीठ ने सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) को नागौर के कुचेरा थाने में दर्ज एफआईआर पर अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जज फरजंद अली की एकलपीठ ने बेनीवाल की याचिका पर यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। इससे बेनीवाल को बड़ी राहत मिली है।
यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कुचेरा में हुई एक राजनीतिक सभा से जुड़ा है। इसमें निषेधाज्ञा (Model Code of Conduct) के उल्लंघन का आरोप है।
उप-निरीक्षक मुकेश कुमार की शिकायत पर 4 मई 2024 को एफआईआर दर्ज हुई थी। यह आईपीसी की धारा 143, 147, 283 और 188 के तहत दर्ज की गई थी। इन धाराओं में गैरकानूनी सभा और निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं।
बेनीवाल के वकीलों ने अदालत को बताया कि यह मामला राजनीतिक प्रदर्शन का है। इसमें हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई आरोप नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। ऐसे में इसे आपराधिक मामला बनाना उचित नहीं है। अदालत ने इन तर्कों को गंभीरता से सुना और अंतरिम राहत दी।
अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार है। इसे आपराधिक मामले के रूप में देखना ठीक नहीं है। अदालत ने सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है।
अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक बेनीवाल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। यह राहत उन्हें तीन सप्ताह के लिए मिली है। इस दौरान सरकार और पुलिस को अपना पक्ष रखना होगा।
यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। अदालत ने साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन अपराध नहीं है। इससे आम नागरिकों को भी संदेश जाता है।
साथ ही यह फैसला राजनीतिक मामलों में अदालत की भूमिका को भी दिखाता है। अब देखना जरूरी है कि अगली सुनवाई में सरकार और पुलिस क्या जवाब देती है। फिलहाल बेनीवाल को बड़ी राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा है। सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। इससे बेनीवाल को बड़ी राहत मिली है।
क्या है पूरा मामला?
उप-निरीक्षक मुकेश कुमार की शिकायत पर 4 मई 2024 को एफआईआर दर्ज हुई थी। यह आईपीसी की धारा 143, 147, 283 और 188 के तहत दर्ज की गई थी। इन धाराओं में गैरकानूनी सभा और निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं।
वकीलों ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। ऐसे में इसे आपराधिक मामला बनाना उचित नहीं है। अदालत ने इन तर्कों को गंभीरता से सुना और अंतरिम राहत दी।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक बेनीवाल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। यह राहत उन्हें तीन सप्ताह के लिए मिली है। इस दौरान सरकार और पुलिस को अपना पक्ष रखना होगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
साथ ही यह फैसला राजनीतिक मामलों में अदालत की भूमिका को भी दिखाता है। अब देखना जरूरी है कि अगली सुनवाई में सरकार और पुलिस क्या जवाब देती है। फिलहाल बेनीवाल को बड़ी राहत मिली है।
छत्तीसगढ़ में नदी प्रदूषण के 30 हजार से ज्यादा मामले, रायपुर सबसे आगे, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
By Harrison Masih
राजस्थान में MBBS की 61% सीटें खाली, NEET UG काउंसलिंग के राउंड-3 में निजी कॉलेजों की स्थिति ने चौंकाया
By Jyoti Mahender Bhardwaj
कर्मचारियों-पेंशनर्स के कैशलेस इलाज में नया पेंच! नॉन-इंपैनल्ड अस्पतालों की लिमिट 4 लाख से घटाकर 1.50 लाख करने का प्रस्ताव
By Amresh Kushwaha
पंचायत चुनाव: 2.27 लाख कर्मचारियों की लगेगी चुनाव ड्यूटी, उपसरपंच चुनाव के बाद ही लौट सकेंगे कर्मचारी
By Jageshwar prasad
एमपी में सरकारी नौकरी: एक लाख पदों पर होगी सीधी भर्ती, सीएम मोहन यादव ने किया एलान, इन पदों पर मिलेगी नौकरी
By Kaushiki
पुलिस अब रिक्रूटर और सरगना तक पहुंचेगी; साइबर अपराधों पर लगाम लगाने की नई रणनीति
By Jyoti Mahender Bhardwaj
राजस्थान: धनतेरस के चलते पंचायत चुनाव की तारीखों में बड़ा बदलाव, जानें पूरा शेड्यूल
By Jageshwar prasad