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Photograph: (the sootr)
News In Short
- पंचायत चुनाव में दो बच्चों की बाध्यता हटाना भैंरोसिंह शेखावत का अपमान
- राजस्थान विधानसभा में दो बच्चों की बाध्यता हटाने वाले संशोधन विधेयक पर बहस
- संशोधन विधेयक हुआ पारित,राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही लागू होगा कानून
- दावा, दो बच्चों की बाध्यता हटने से बदलेगी पंचायत राज राजनीति की तस्वीर
- शहरी निकाय चुनाव में ऐसा ही विधेयक मंगलवार को होगा पारित
News In Detail
राजस्थान विधानसभा ने पंचायत चुनाव में दो से ज्यादा बच्चों वालों के उम्मीदवार बनने पर लगी पाबंदी हटाने वाला राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक सोमवार को पारित कर दिया। बिल पर बहस में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष व विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे दिवंगत भैंरोसिंह शेखावत का अपमान बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्र ने जनसंख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा सरकार ने ही लगाई थी पाबंदी
डोटासरा ने कहा कि भैंरोसिंह शेखावत ने ही 1995 में जनसंख्या नियंत्रण के चलते यह कानून बनाया था। अब 30 साल बाद भाजपा की सरकार ही इस कानून में बदलाव कर रही है। डोटासरा ने कहा कि तब इस कानून के पीछे जनसंख्या नियंत्रण की मंशा थी। क्या अब जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं है, जो सरकार संशोधन विधेयक लेकर आई है। क्या अब हमारे पास इतने संसाधन हो गए हैं कि जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत नहीं है? क्या केंद्र सरकार ने राजस्थान को जनसंख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं?
कुछ तीन-चार बच्चों वाले नेताओं के कहने से बिल लाए
डोटासरा ने कहा कि देश में 70 फ़ीसदी ग्रामीण परिवेश के लोग हैं। वे आज भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पूरी तरह से जागरूक नहीं है। इस सरकार के पास कोई विजन नहीं है। कुछ नेताओं ने कह दिया कि दो बच्चों वाला नियम हटाना है, क्योंकि उनके तीन चार बच्चे हैं, इसलिए सरकार आनन फानन फानन में यह बिल लेकर आई है। पहले तीन बच्चों के चलते जो लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह गए थे, वे आज क्या सोचेंगे? क्यों कि भाजपा सरकार ही दो बच्चों का कानून लेकर आई थी और अब भाजपा की सरकार ही इस कानून को हटा रही है।
डोटासरा ने कहा कि एक ओर तो राज्य सरकार 2047 तक विकसित राजस्थान की बात कर रही है तो दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण के स्थान पर उसे बढ़ावा दे रही है। आबादी बढ़ेगी तो फिर 2047 तक विकसित राजस्थान कैसे होगा।
तैयार बैठी है जनता सूपड़ा साफ करने की
डोटासरा ने कहा कि एक ओर सरकार पंचायत के चुनाव नहीं करा रही है, वन स्टेट वन इलेक्शन की बात कर रही है। दूसरी ओर हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हुए हैं। भाजपा ने परिसीमन में बेईमानी की है, नियम तोड़े हैं। हजारों लोग हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं।
कांग्रस नेता बोले, सरकार हाईकोर्ट में कह रही है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिली जबकि सरकार ने खुद ही ओबीसी आयोग को रिपोर्ट देने से मना किया हुआ है। पंचायत के चुनाव नहीं हुए, इसलिए तीन हजार करोड रुपए केंद्र सरकार से नहीं मिल रहे हैं। मंत्री को बताना चाहिए कि चुनाव कब होंगे, क्योंकि प्रदेश की जनता भाजपा का सूपड़ा साफ करने के लिए तैयार बैठी है।
दो बच्चों की बाध्यता के कानून की प्रासंगिकता खत्म
पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जब 1995 में जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी। अब वो प्रावधान अप्रासंगिक हो गया है। 1995 की तुलना में अब जनसंख्या पर नियंत्रण हुआ है, क्यों​कि लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण हो रहा है। साक्षरता की दर बढ़ रही है, इसलिए अब वो प्रासंगिक नहीं रहा। कई अनुभवी जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते थे। अब उन्हें मौका मिल सकेगा।
दिलावर ने सरकार पर यू टर्न लेने के आरोप के जवाब में कहा कि 20 जून 2001 को कर्मचारियों के लिए बिल लाया गया था। इसमें दो से ज्यादा बच्चों पर सरकारी नौकरी नहीं मिलने, प्रमोशन नहीं होने का प्रावधान था। कांग्रेस सरकार ने बाद में 2023 में इस प्रावधान को बदलकर कर्मचारियों के दो से ज्यादा बच्चे होने पर प्रमोशन से छूट क्यों दी।
हम नहीं ले रहे यू-टर्न
दिलावर ने कहा कि हम यू-टर्न नहीं ले रहे हैं, बल्कि अब इस कानून की प्रासंगिकता खत्म होने के कारण वापस ले रहे हैं। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित कई प्रदेशों में दो से ज्यादा संतान का प्रावधान हटा दिया है। तेलंगाना के कांग्रेस सरकार के सीएम कह रहे थे कि तीन से कम बच्चों वालों को चुनाव लड़ने का अधिकार ही नहीं होना चा​हिए था। कांग्रेस का यह दोगलापन क्यों है?
अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव
पंचायतीराज चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने वाला राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक-2026 को विधानसभा में सोमवार को बहस के बाद पारित कर दिया गया। संशोधन बिल में राजस्थान पंचायतीराज कानून की धारा 19 में संशोधन करके दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी को हटा दिया है। अब वार्ड पंच,सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिष्द सदस्य,पंचायत समिति प्रधान और जिला प्रमुख के लिए बच्चों की बाध्यता नहीं रहेगी।
दो से ज्यादा बच्चों वाले नेताओं को राहत
बिल पारित होने के बाद अब दो से ज्यादा बच्चे होने के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रहने वाले चुनाव लड़ सकेंगे। इससे पंचायत चुनावों में उम्मीदवार बढ़ सकते हैं और ग्रामीण इलाकों की सियासत की तस्वीर भी बदलेगी। पंचायतीराज संशोधन बिल को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही नोटिफिकेशन जारी होगा। नोटिफिकेशन जारी होते ही पंचायतीराज चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटने का कानून लागू हो जाएगा।
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