कमजोर मानसून में किसानों के लिए क्यों पसंद बन रहा बाजरा, जानिए पूरा गणित

Jinesh Jain | Jun 26, 2026, 14:49 IST
Share
कमजोर मानसून के आसार के बीच राजस्थान के किसानों के लिए वरदान बन रहा बाजरा
कमजोर मानसून के आसार के बीच राजस्थान के किसानों के लिए वरदान बन रहा बाजरा

इस बार मानसून के कमजोर रहने के आसार हैं। ऐसे में राजस्थान के​ किसानों की उम्मीदें बाजरे की फसल पर टिकी है। कम पानी और कम लागत के कारण यह फसल किसानों की तकदीर हरी कर सकती है।

राजस्थान के अलवर जिले में नौगावां के हेमंत जांगिड़ को उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक मानसून आ जाएगा। ऐसे में खेतों में बोए बाजरे को जीवन मिल जाएगा। दिक्कत तब होगी, जब मानसून में देरी हो जाएगी।

हेमंत ने अपनी 28 में से 15 बीघा जमीन पर बाजरा बोया है। उनके अनुसार खरीफ सीजन में यह सबसे अच्छी फसल है। यह 85-90 दिन में पक जाती है। इससे हमें रबी (सर्दियों) के मौसम में सरसों या गेहूं बोने का पूरा समय मिल जाता है।

​बाजरा चुनने की वजह सिर्फ इसका कम समय नहीं है। हेमंत के लिए बाजरा दोहरा फायदा देता है। इससे प्रति बीघा औसतन 20 मन अनाज मिलता है। साथ ही इससे अधिक कड़बी (सूखा चारा) भी मिल जाती है। यह पशुओं के चारे में काम आ जाती है।

प्री मानसून में ही खेतों में बुआई

यह कहानी केवल हेमंत की नहीं है, बल्कि पूरे मेवात क्षेत्र की है। अधिकतर किसानों ने अपने खेतों में बाजरे की बुआई की है। गोविंदगढ़ के रामसहाय पटेल के पास 8 बीघा जमीन है। उन्होंने जून की शुरुआत में हुई प्री-मानसून बारिश के बाद अपने खेतों के एक-तिहाई हिस्से पर बाजरा बो दिया।

नौगावां के हेमंत जांगिड़
नौगावां के हेमंत जांगिड़
कृषि विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि मेवात क्षेत्र में 90 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई हो चुकी है। कुछ क्षेत्रों में प्री मानसून की कम बारिश होने से बाजरे की बुआई खराब हो चुकी है। लेकिन, राजस्थान में 15 जुलाई तक बाजरे की बुआई की जा सकती है।

इस साल अल नीनो के असर के कारण अभी तक देश में सामान्य से 42.3% कम बारिश हुई है। राजस्थान में मानसून के पहले सप्ताह में आने का अनुमान है। हालांकि, प्रदेश में प्री मौसम की ओवरऑल बारिश ठीक-ठाक हुई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बहुत कम बारिश है। सूखे के ऐसे हालात में किसानों को बाजरा ही सबसे सुरक्षित फसल दिख रही है।

बाजरे को तीन बार पानी की जरूरत

फार्मको कॉप साइंस लिमिटेड के राकेश गोयल बताते हैं, पूर्वी राजस्थान के किसान आमतौर पर जून की शुरुआत से बाजरा बो देते हैं। बुआई के बाद ही मानसून की बारिश आती है। बीज अंकुरित होते हैं। अगर बारिश न हो तो किसान बुआई से पहले एक बार पानी दे देते हैं। इसके बाद पूरी फसल में सिर्फ दो बार (30वें और 60वें दिन) सिंचाई की जरूरत पड़ती है।

फार्मको कॉप साइंस लिमिटेड के राकेश गोयल
फार्मको कॉप साइंस लिमिटेड के राकेश गोयल
​बाजरे को ज़्यादा से ज़्यादा तीन बार पानी चाहिए। इसके मुकाबले कपास को 5-6 बार, गेहूं को 4-5 बार और सरसों को 2-3 बार पानी देना पड़ता है। यही वजह है कि राजस्थान, दक्षिणी हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बाजरा पहली पसंद है।

बुआई में नाम मात्र का खर्चा

दौसा के किसान नारायण सिंह कहते हैं कि बाजरे को पानी बहुत कम चाहिए। इसमें खाद (20 किलो डीएपी और एक बोरी यूरिया) और कीटनाशकों का खर्च भी नाममात्र का है। इसका चारा गेहूं के तूड़े से कहीं बेहतर और पौष्टिक होता है।

नारायण बताते हैं कि हमारे पास बाजरे की बुआई के लिए 15 जुलाई तक का समय है। अगर बाजरे की बुआई में अधिक समय लगा तो अगली फसल रबी में सरसों की बुआई प्रभावित होगी। किसानों का फोकस सरसों पर ही रहता है। बाजरे की बुआई मुख्य रूप से चारे के लिए होती है।

कम पानी वाली फसल होने के बावजूद बाजरे के हाइब्रिड बीजों का बाज़ार करीब 720 करोड़ रुपए का हो चुका है। पायोनियर (कोर्टेवा) और प्रोएग्रो (क्रिस्टल) जैसी बड़ी कंपनियों का इस बाज़ार पर कब्ज़ा है।

हाईब्रिड बीजों से बाजरा कमर्शियल फसल

अलवर में राहुल एंटरप्राइजेज के नरेश गोयल बताते हैं, पहले किसान सिर्फ खुद के खाने और चारे के लिए बाजरा उगाते थे। लेकिन हाइब्रिड बीजों से पैदावार इतनी बढ़ी कि अब यह एक व्यावसायिक फसल बन गई है। हरियाणा से लगते राजस्थान के राठ क्षेत्र में हाइब्रिड बीज की अच्छी डिमांड है।

अलवर में राहुल एंटरप्राइजेज के नरेश गोयल
अलवर में राहुल एंटरप्राइजेज के नरेश गोयल
किसान बंसी लाल के अनुसार बाजरे की खेती की लागत 10,000 से 15,000 रुपए प्रति बीघा आती है। इसमें जुताई, बीज, खाद, निराई-गुड़ाई, कटाई और थ्रेशिंग का खर्च शामिल है।

अगर प्रति बीघा 20 से 22 मन की पैदावार हो तो किसान को प्रति बीघा ठीक-ठीक मुनाफा हो जाता है। इसमें चारे की कीमत शामिल नहीं है, जो अलग से मुनाफा देती है।

कपास में गुलाबी सुंडी का हमला

​राजस्थान में बाजरे का क्रेज इसलिए भी है क्योंकि उत्तरी और पूर्वी राजस्थान में कुछ सालों में कपास पर गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलमॉर्म) के कीड़ों का हमला बढ़ गया है।

हनुमानगढ़ के बीज व्यापारी महिपाल सिंह बताते हैं कि चार साल पहले तक किसान प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल कपास कमा लेते थे, जो अब घटकर सिर्फ 2.5 से 3 क्विंटल रह गई है। इसलिए किसानों को कपास की बजाय बाजरा ठीक लगता हैं।

​सरकारी किस्मों (जैसे HHB 67) से जहां प्रति बीघा 15-20 मन पैदावार होती थी, वहीं प्राइवेट कंपनियों के हाइब्रिड बीज 30 से 320-21 क्विंटल तक पैदावार दे रहे हैं। ये बीज कम दिनों (70 से 90 दिन) में पकने वाली अलग-अलग वैरायटी में आते हैं।

40 लाख हेक्टयर क्षेत्र में बाजरे की बुआई

कृषि विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि प्रदेश में बाजरे का बुआई क्षेत्र लगभग 44 लाख हेक्टयर है। इस बार विभाग ने 40.50 लाख हेक्टयर क्षेत्र में बाजरे की बुआई का लक्ष्य रखा है।

वे कहते हैं कि कम बारिश के अनुमानों के बीच हम किसानों को कम पानी वाली बाजरा जैसी फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

कृषि विभाग ने इस बार खरीफ के लिए 1.64 करोड़ हेक्टयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य है। यह पिछले साल के 1.58 करोड़ के लक्ष्य से थोड़ा अधिक है।

एक अन्य अधिकारी का कहना है कि अगर प्रदेश में मानसून कमजोर रहा तो खरीफ की बुआई प्रभावित होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसका सीधा असर रबी की फसल पर पड़ेगा। हम मौसम की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

FAQ

  1. सूखे के हालात में भी बाजरे की बुआई किसानों की पहली पसंद क्यों है?
    अन्य फसलों की तुलना में बाजरे को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। बाजरा पूरी फसल के दौरान अधिकतम 3 सिंचाई (पानी) में पककर तैयार हो जाता है। इसके अलावा, इसमें खाद और कीटनाशकों का खर्च भी नाममात्र का होता है। कम लागत और कम पानी में सुरक्षित उत्पादन देने के कारण यह कमजोर मानसून में किसानों की पहली पसंद बन रहा है।
  2. हाइब्रिड बीजों ने बाजरे की खेती को व्यावसायिक (कमर्शियल) फसल में कैसे बदल दिया है?
    पहले किसान बाजरा केवल खुद के खाने और चारे के लिए उगाते थे। लेकिन अब प्राइवेट कंपनियों के हाइब्रिड बीजों से पैदावार बहुत ज्यादा बढ़ गई है। जहां सरकारी किस्मों से प्रति बीघा 15-20 मन पैदावार होती थी, वहीं हाइब्रिड बीजों से यह बढ़कर काफी अधिक हो जाती है। यह फसल मात्र 70 से 90 दिनों में पक जाती है, जिससे किसानों को रबी की फसल (जैसे सरसों या गेहूं) के लिए पूरा समय मिल जाता है। इसी मुनाफे के कारण आज बाजरे के हाइब्रिड बीजों का बाजार करीब 720 करोड़ रुपए का हो चुका है।
  3. किसान कपास की खेती छोड़कर बाजरे की तरफ क्यों रुख कर रहे हैं?
    उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में पिछले कुछ सालों से कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलमॉर्म) नामक कीड़े का हमला बहुत बढ़ गया है। इस बीमारी के कारण कपास की पैदावार प्रति एकड़ 8-10 क्विंटल से घटकर मात्र 2.5 से 3 क्विंटल रह गई है। कपास में होने वाले इस भारी नुकसान और बढ़ते जोखिम के कारण किसान अब कपास की बजाय बाजरे की खेती को ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद मान रहे हैं।

ये भी पढ़ें:-

यमुना पानी लाने पर अंतिम सहमति, MoU के बाद जल्द शुरू होगा काम

कृषि मंत्री का 3 फैक्ट्रियों पर छापा, मिला नकली पोटाश और अवैध बायो-स्टिमुलेंट

​अरावली पर पर्यावरणविदों ने सीजेआई को लिखा पत्र, नई कमेटी पर उठाए सवाल

जहां बहती थी नदी, वहां एक बीघा से ज्यादा जमीन पर काट दिए प्लॉट



Tags:
  • अल नीनो
  • अलवर
  • बाजरा
  • मेवात
  • खरीफ सीजन
  • हाइब्रिड बीजों
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि