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पूरी खबर को 5 पॉइंट में समझें...
राजस्थान में 1 जनवरी से सभी प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज हो गई हैं।
मई 2027 तक नए जिले या तहसील नहीं बनाए जा सकेंगे।
जनगणना ड्यूटी में लापरवाही पर 3 साल की जेल हो सकती है।
करीब 2 लाख कर्मचारियों की जनगणना के काम में ड्यूटी लगेगी।
दो फेज में घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करने का काम होगा।
राजस्थान में नए साल की शुरुआत बड़े बदलावों के साथ हुई है। अब राज्य में किसी भी नई प्रशासनिक यूनिट का गठन नहीं होगा। सरकार ने 1 जनवरी से सभी सीमाओं को फ्रीज कर दिया है। इसका मतलब है कि अब कोई नया जिला नहीं बनेगा।
नई तहसील या उपखंड बनाने पर भी पूरी तरह रोक है। यह फैसला जनगणना की शुद्धता बनाए रखने के लिए लिया गया है।
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ट्रांसफर पर लगा ब्रेक
सरकारी कर्मचारी के लिए यह खबर बहुत बड़ी और अहम है। अगले सवा साल तक ट्रांसफर पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। इसमें कलेक्टर से लेकर पटवारी तक सभी शामिल किए गए हैं। जनगणना में लगे 2 लाख कर्मचारियों का तबादला नहीं होगा।
केवल बहुत जरूरी होने पर ही तबादले पर विचार होगा। सरकार चाहती है कि ट्रेनिंग पाए कर्मचारी ही काम पूरा को करें। इससे जनगणना के काम में कोई रुकावट पैदा नहीं होगी।
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काम में बाधा डाली तो होगी जेल
जनगणना का काम बेहद सावधानी के साथ किया जाना है। इसमें बाधा डालने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। कोई कर्मचारी ड्यूटी से जानबूझकर छुट्टी लेता है, तो उसे जेल होगी। आम जनता को भी सही जानकारी देना अनिवार्य बनाया गया है।
जानकारी छुपाने या गलत बताने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है। जनगणना एक्ट-1948 की धारा 11 के तहत सजा मिलेगी। इसमें 3 साल की कैद और 1 हजार रुपए जुर्माना शामिल है।
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दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रोसेस
राजस्थान सरकार का जनगणना 2026 का पूरा अभियान दो अलग-अलग चरणों में चलेगा। पहले चरण की शुरुआत 15 मई से होने जा रही है। यह काम 15 जून तक लगातार एक महीने चलेगा। इसमें कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों की लिस्टिंग करेंगे।
हर कर्मचारी को लगभग 150 घरों का जिम्मा दिया जाएगा। दूसरे फेज में जनसंख्या से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां ली जाएंगी। इसकी पूरी रूपरेखा विभाग ने पहले ही तैयार कर ली है।
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सटीक डेटा के लिए सीमाएं की गईं लॉक
जनगणना में डेटा की सटीकता सबसे ज्यादा मायने रखती है। इसीलिए गांवों और वार्डों की सीमाओं को लॉक किया गया है। 31 दिसंबर तक जो स्थिति थी, वही अब मान्य रहेगी। नामों की स्पेलिंग की भी बारीकी से जांच की गई है।
हर जिले के लिए अलग जनगणना हैंडबुक तैयार हुई है। यह सब इसलिए किया गया ताकि कोई घर न छूटे। डिजिटल युग में अब डेटा एंट्री भी काफी हाईटेक होगी।
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फरवरी से शुरू होगी कर्मचारियों की ट्रेनिंग
जनगणना के काम के लिए फरवरी महीने से अफसरों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू होगी। इसमें 1.60 लाख फील्ड वर्कर और 40 हजार सुपरवाइजर शामिल हैं। इन्हें टैबलेट और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा भरना सिखाया जाएगा।
मास्टर ट्रेनर्स हर जिले में जाकर कर्मचारियों को पूरी विधि समझाएंगे। सरकार ने इसके लिए बजट और संसाधन पहले ही आवंटित कर दिए हैं।
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