भजनलाल ने आचार्य महाश्रमण से लिया आशीर्वाद, बोले—मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शुक्रवार को लाडनूं पहुंचे। उन्होंने वहां जैन विश्व भारती के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद लिया।

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Ashish Bhardwaj
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News In Short

  • सीएम भजनलाल ने लाडनूं में आचार्य महाश्रमण का लिया आशीर्वाद
  • सीएम बोले, महाश्रमण मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक
  • भजनलाल ने जैन विश्व भारती के कार्यक्रम को किया संबोधित
  • जैन धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं, जीवन जीने की एक पूर्ण कला
  • महाश्रमण जैन श्वेतांबर तेरापंथ के हैं 11वें आचार्य

News In Detail    

लाडनूं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को लाडनूं में जैन श्वेतांबर तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद लिया। उन्होंने यहां जैन विश्व भारती में सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। इस दौरान भजनलाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह मानवीय मूल्यों का मंदिर है, जिससे सत्य, करुणा और अहिंसा का संदेश दूर-दूर तक फैलेगा।  

महाश्रमण मानवीय मूल्यों के प्रतीक

भजनलाल ने कहा कि तेरापंथ के आचार्यश्री महाश्रमण मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। इनकी साधना, ज्ञान और त्याग लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण और धर्म प्रचार के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने कहा कि महाश्रमण ने जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक समय के साथ जोड़कर एक नई दिशा दी है। उनका यह योगदान केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए वरदान है। उनकी शिक्षाओं में जो सरलता और व्यावहारिकता है, वह हर वर्ग के लोगों तक पहुँचती है। 

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जैन धर्म जीवन जीने की कला

सीएम भजनलाल ने कहा कि जैन धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। इस धर्म के पंच महाव्रत आज के भौतिकवादी युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। उन्होंने कहा कि संत, मुनि, महंत समाज को दिशा देने का काम करते है। वे हमारी समृद्ध संस्कृति को दुनियाभर में पहुंचाते है। मुख्यमंत्री लाडनूं के जैन विश्व भारती परिसर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 

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जैन विश्व भारती ने विभिन्न क्षेत्रों में दिया योगदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती ने कई दशकों में धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया है। आचार्य तुलसी के बाद आचार्य महाप्रज्ञ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने जैन दर्शन का प्रचार-प्रसार के साथ ही आधुनिक शिक्षा को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर एक नई दिशा दी है। यहां संचालित शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती है। विश्व भारती ने अहिंसा और शांति के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का काम किया है। 

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Photograph: (the sootr)

प्रवचन हॉल का किया लोकार्पण    

इस दौरान भजनलाल ने आचार्यश्री महाश्रमणजी से आशीर्वचन प्राप्त किए। मुख्यमंत्री ने जैन विश्व भारती में नवनिर्मित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा श्रीजी विश्रुत विभा, मुनि श्री महावीर कुमार, साध्वी वर्या श्री सम्बुद्ध यशा जी, पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और जैन विश्व भारती अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ भी उपस्थित थे। 

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महाश्रमण 2010 में बने थे आचार्य

आचार्य महाश्रमण जैन श्वेतांबर तेरापंथ के 11वें आचार्य हैं। उन्होंने यह पद आचार्य महाप्रज्ञ के देहावसान के बाद संभाला। वे मई,1974 में 12 वर्ष की आयु में ही दीक्षित हो गए थे। इस दीक्षा के साथ वे मोहन से मुनि मुदित बन गए। महाप्रभ के महाप्रयाण के बाद उन्हें मई 2010 में आचार्य पद मिला। वे देश में 50 हजार किलोमीटर की अहिंसा यात्रा भी कर चुके हैं।

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राजस्थान पत्रिका जैन विश्व भारती आचार्य महाश्रमण भजनलाल
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