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Photograph: (the sootr)
News in Short
- बंदरों के हमले में मृतक की पत्नी को 9.86 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश
- घातक दुर्घटना अधिनियम-1955 के तहत दिए आदेश
- कोर्ट ने माना बंदरों से नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार की ड्यूटी
- घातक दुर्घटना के मामले में कठोर दायित्व का सिद्वांत लागू होता है
- वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत बंदर संरक्षित व खतरनाक प्राणी की लिस्ट में
- पेड़ पर चढ़े व्यक्ति को बंदरों के गिराने से मौत का मामला
News in Detail
राजस्थान में जयपुर की एक कोर्ट ने एक व्यक्ति की बंदरों के उत्पात से मौत पर मुआवजा देने के आदेश दिए है। मुआवजा के रुप में मृतक की पत्नी को 9,86,032 रुपए मिलेंगे। इस राशि पर परिवाद दायर करने की तारीख से लेकर अदा करने के दिन तक नौ फीसदी ब्याज भी मिलेगा।
पेड़ से गिराया था बंदरों ने
मृतक औंकारमल शाहपुरा के गांव मारखी की इंद्रा कॉलोनी में रहता था। 4 नवंबर,2022 को वह अपने घर में लगे नीम के पेड़ पर लोकी तोड़ने चढ़ा था। इसी दौरान पेड़ पर काले और लाल मूंह के बंदर आ गए और उत्पात मचाने लगे। इन बंदरों ने मृतक को पेड़ से नीचे गिरा दिया था। इस कारण उसकी गर्दन और सिर में गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा था। उसे अमरसर अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों से उसे मृत घोषित कर दिया था।
इसलिए दिलाया जाए मुआवजा
मृतक की पत्नी अमरीदेवी ने घातक दुर्घटना अधिनियम-1955 की धारा (1) के तहत क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए कोर्ट में परिवाद दिया था। परिवाद में कहा गया कि आबादी क्षेत्र में बंदरों को आने से रोकने और नागरिकों की रक्षा करना प्रशासन की ड्यूटी है। लेकिन प्रशासन अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहा है। इसी लापरवाही के कारण औंकारमल की मौत हुई है।
50 लाख रुपए मांगे थे मुआवजे में
परिवादिया की ओर से कहा गया कि उसका दिवंगत पति औंकारमल 50 साल का स्वस्थ व्यक्ति था। वह बकरी व भेड़ पालन करता था और इन्हें बेचकर 15 हजार रुपए महीना कमाता था। इसी कमाई से घर चलता था। परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। वह अपने पति की मौत असमय मौत के कारण दांपत्य सुख से वंचित हो गई है। इसलिए उसे भविष्य की आय,दाह संस्कार,धार्मिक क्रियाकलाप,मानसिक संताप,प्रेम व पत्नी वियोग व शारीरिक पीड़ा के लिए कुल 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति दिलाई जाए। मुख्य वन्य जीव संरक्षक और क्षेत्रीय वन संरक्षक शाहपुरा ने परिवाद का विरोध किया।
सरकार की ड्यूटी थी यह तो
कोर्ट ने कहा है कि घातक दुर्घटना के मामले में कठोर दायित्व के सिद्वांत लागू होते हैं। गांववासियों को बंदरों के उत्पात से बचाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है। दुर्घटना बंदरों के उत्पात के कारण ​हुई है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत बंदरों को संरक्षित व खतरनाक प्राणी की लिस्ट में रखा है।
वहां भी मान चुका है हाई कोर्ट
कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एक मामले के हवाले से बताया है कि वहां एक व्यक्ति अपने घर की छत पर उत्पात मचा रहे बंदरों को पत्थर मारकर भगा रहा था। इसी दौरान एक पत्थर लगने से अमरजीत सिंह नाम के व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में पंजाब-हरियाण हाई कोर्ट ने घटना के लिए चंडीगढ़ नगर निगम को जिम्मेदार मानकर क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए थे। जबकि इस मामले में तो व्यक्ति अपने घर में लगे पेड़ से बंदरों के गिराए जाने से गिरकर मरा है।
ऐसे देने होगी क्षतिपूर्ति...
कोर्ट ने मुख्य वन्य जीव संरक्षक राजस्थान,कलक्टर जयपुर,रेंजर शाहपुरा तथा ग्राम पंचायत हनुतिया,पंचायत समिति शाहपुरा को परिवादिया को क्षतिपूर्ति के तौर पर कुल 9,86,032 रुपए देने के आदेश दिए हैं। इस राशि पर परिवाद दायर करने की तारीख 2 नवंबर,2023 से वास्तविक भुगतान होने की तारीख तक 9 फीसदी ब्याज भी देना होगा।
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