ट्रम्प टैरिफ से लगेगा राजस्थान को 20 हजार करोड़ का फटका! लाखों के सामने रोजगार का भी संकट
Nitin Kumar Bhal | Aug 11, 2025, 10:10 IST
Photograph: (The Sootr)
ट्रम्प टैरिफ की घोषणा से राजस्थान के निर्यात पर भारी असर पड़ेगा, 20,000 करोड़ रुपए के निर्यात को संकट का सामना करना पड़ेगा। श्रमिक वर्ग के रोजगार पर खतरा बढ़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 25% टैक्स (tax) और 25% पैनल्टी (penalty) की घोषणा ने राजस्थान के निर्यात क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है। इससे राजस्थान के उद्योगों को विशेष रूप से श्रम प्रधान उद्योगों जैसे टेक्सटाइल (textiles), गारमेंट्स (garments), जेम्स और ज्वेलरी (jewelry), मार्बल (marble), ग्रेनाइट (granite), क्वार्ट्ज (quartz), हैंडीक्राफ्ट्स (handicrafts), और कारपेट (carpets) के निर्यात में कमी का सामना करना पड़ेगा। इन उद्योगों की निर्माण लागत का एक बड़ा हिस्सा लेबर (labor) लागत से जुड़ा हुआ है, जो 30-65% तक हो सकती है। इस पर अमेरिकी टैरिफ (tariff) की वृद्धि से यह लागत और बढ़ सकती है, जिससे लगभग 7 लाख लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Rajasthan Export Promotion Council) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में राज्य का कुल निर्यात 83,407 करोड़ रुपए रहा। इस निर्यात का लगभग 50-70% हिस्सा अमेरिकी खरीदारों से आता है, विशेषकर श्रम प्रधान उद्योगों में। मार्बल, ग्रेनाइट और क्वार्ट्ज उद्योगों में यह आंकड़ा और भी अधिक है, जहां 95% निर्यात अमेरिका को होता है। अब अमेरिकी टैरिफ की वृद्धि से निर्यात में गिरावट आने की संभावना है।
निर्यातक और व्यापारी पहले ही इस बदलाव का प्रभाव महसूस करने लगे हैं। कई अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर होल्ड (orders hold) करने या कैंसिल (cancel) करने का निर्णय लिया है। कुछ निर्यातकों का कहना है कि बायर्स अब इतनी बढ़ी हुई ड्यूटी पर अपने ऑर्डर का माल लेने को लेकर संकोच कर रहे हैं। इस स्थिति ने निर्यातक समुदाय को चिंता में डाल दिया है क्योंकि कई उद्योगों के लिए इस संकट का सामना करना कठिन हो सकता है। खासकर वे उद्योग जो पहले से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा (competition) से जूझ रहे हैं, जैसे वियतनाम (Vietnam) और इंडोनेशिया (Indonesia), जो कम टैरिफ दरों पर उत्पाद बेच रहे हैं।
एक और चिंता का कारण तुर्की (Turkey) है, जिसे ट्रम्प ने 10% टैरिफ दर पर रखा है। 50% टैरिफ के साथ भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फर्नीचर और मार्बल उद्योगों के लिए तुर्की का मुकाबला करना लगभग असंभव हो जाएगा। इस बदलाव के कारण राजस्थान में निर्यात करने वाले उद्योगों में काम करने वाले लगभग 10 लाख लोग प्रभावित होंगे। इनमें कारीगर, कुशल श्रमिक, इंजीनियर और लॉजिस्टिक्स पेशेवर शामिल हैं।
निर्यातक समुदाय की चिंता का एक बड़ा कारण बेरोजगारी (unemployment) है, जो इस टैरिफ की वजह से बढ़ सकती है। आंकड़ों के अनुसार, 30-65% लागत श्रम से जुड़ी हुई है, और यहां हर श्रमिक का वार्षिक श्रम मूल्य लगभग दो लाख रुपए है। ऐसे में यदि ऑर्डर पूरे नहीं होते तो प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ सकती है, जिससे 40,000 करोड़ रुपए तक की विदेशी मुद्रा (foreign currency) की कमी हो सकती है।
राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट्स निर्यातकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) को पत्र लिखकर एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट वर्किंग कैपिटल लोन (working capital loans) पर ब्याज समानीकरण योजना (interest equalization scheme) को फिर से शुरू किया जाए, जो साल की शुरुआत में बंद कर दी गई थी। इसके अलावा, निर्यातकों की यह भी मांग है कि सरकार विदेशों में ट्रेड फेयर्स (trade fairs) में भाग लेने के लिए सहायता बढ़ाए, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश बजट भारत टैक्स ट्रेड फेयर (India Tax Trade Fair) में खर्च हो रहा है।
पिछले कुछ महीनों में डॉलर (dollar) की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, जो निर्यातकों के लिए एक और चिंता का कारण बन गई है। 1 अगस्त को डॉलर की कीमत 87.24 रुपए थी, जबकि 4 अगस्त को ट्रम्प के पैनल्टी टैरिफ की घोषणा के बाद डॉलर की कीमत 87.83 रुपए तक पहुंच गई थी। इसके बाद वर्तमान में डॉलर की कीमत 87.58 रुपए है, जो निर्यातकों के लिए महंगी हो सकती है।
निर्यातकों का कहना है कि अगर सरकार जल्द ही कोई राहत पैकेज जारी नहीं करती, तो इन उद्योगों को भारी नुकसान हो सकता है। हैंडीक्राफ्ट्स और अन्य उद्योगों के निर्यातकों ने मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (Market Access Initiative) योजना के तहत विदेशी ट्रेड फेयर्स में भाग लेने के लिए सरकार से मदद की अपील की है।
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राजस्थानी निर्यात का 50-70% हिस्सा अमेरिकी खरीदारों से
अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर होल्ड या कैंसिल किए
तुर्की ने बढ़ाई राजस्थानी निर्यातकों की चिंता
राजस्थान में बढ़ सकती है बेरोजगारी
एमएसएमई सेक्टर को राहत की जरूरत
लगातार बढ़ रही डॉलर की कीमत
निर्यातक बोले- राहत पैकेज हो जारी
FAQ
- 1. ट्रम्प के टैरिफ से राजस्थान के किस-किस उद्योग पर असर पड़ेगा?
ट्रम्प द्वारा लागू किए गए 50% टैरिफ से राजस्थान के प्रमुख उद्योगों जैसे टेक्सटाइल, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, मार्बल, ग्रेनाइट, और हैंडीक्राफ्ट्स पर सीधा असर पड़ेगा। इन उद्योगों में अमेरिकी खरीदारों की मांग काफी ज्यादा है, और इस बदलाव से निर्यात में गिरावट आ सकती है। - 2. अमेरिका के टैरिफ का असर राजस्थान के रोजगार पर क्या होगा?
अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ का असर राजस्थान में काम करने वाले श्रमिकों और कारीगरों पर पड़ेगा। अनुमान के अनुसार, इससे 7 लाख लोगों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है, और अगर निर्यात कम होता है तो बेरोजगारी में वृद्धि हो सकती है। - 3. राजस्थान के निर्यातक इस समस्या का समाधान कैसे चाहते हैं?
राजस्थान के निर्यातकों का कहना है कि उन्हें एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत की आवश्यकता है, खासकर वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज समानीकरण योजना को फिर से शुरू किया जाए। इसके अलावा, सरकार को विदेशी व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए सहायता बढ़ानी चाहिए। - 4. वियतनाम और इंडोनेशिया के मुकाबले भारत कैसे टिकेगा?
वियतनाम और इंडोनेशिया में कम टैरिफ दरों के कारण भारत को इन देशों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। भारत के उत्पादों पर उच्च टैरिफ होने से यह देशों के लिए एक अवसर बन सकता है, लेकिन भारत के निर्यातकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है। - 5. डॉलर की बढ़ती कीमत निर्यातकों के लिए कैसे प्रभावित कर रही है?
डॉलर की बढ़ती कीमत के कारण निर्यातकों के लिए लागत अधिक हो रही है, जिससे उनका मुनाफा घट सकता है। 1 अगस्त से लेकर 4 अगस्त तक डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी हुई, और अब तक यह 87.58 रुपए तक पहुंच चुकी है।
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