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Photograph: (the sootr)
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार बुधवार 11 फरवरी को प्रात: 11 बजे विधानसभा में अपना नया बजट पेश करने जा रही है। भजनलाल सरकार के कार्यकाल का यह तीसरा बजट होगा। बजट से पहले प्रदेश के वित्तीय आंकड़े बेहद चिंताजनक दिखाई देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में राज्य पर कर्ज़ का बोझ बहुत तेजी से बढ़ा है। मार्च 2022 में जहां कर्ज़ 3.53 लाख करोड़ रुपए था, अब यह आंकड़ा 8 लाख करोड़ रुपये के पार जाने की संभावना जताई जा रही है।
प्रति व्यक्ति कर्ज़ में दोगुनी वृद्धि
राजस्थान के प्रति व्यक्ति कर्ज़ का आंकड़ा 2021-22 में 45,000 रुपए था। यह अब बढ़कर 88,000 रुपए हो चुका है। अगले कुछ साल में यह आंकड़ा 90,000 रुपए को पार कर सकता है। बढ़ते कर्ज से राज्य के विकास कार्यों पर सीध असर दिखाई दे सकता है।
कर्ज़ का बढ़ता मर्ज
राजस्थान की वित्तीय स्थिति को लेकर आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। मार्च 2022 में राज्य का कर्ज़ 3,53,556.08 करोड़ रुपए था, जो अब तक बढ़कर 7.26 लाख करोड़ रुपए के पास पहुंच चुका है। 2024-25 में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, जो राज्य की आर्थिक योजनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
कर्ज़ में 100% से ज्यादा की वृद्धि
पिछले पांच साल में राज्य का कर्ज़ दोगुना से भी ज्यादा बढ़ा है। 2022 में कर्ज़ की वृद्धि की गति 100% से ज्यादा रही है। अगर यही गति जारी रही, तो अगले कुछ वर्षों में यह 8 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाएगा। यह राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
वित्तीय संकट का मुख्य कारण
राज्य सरकार का एक बड़ा हिस्सा अपनी कमाई का खर्च वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में कर रही है। 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन पर 83,775 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। साथ ही पेंशन का खर्च 40,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। इससे राज्य सरकार को बाकी विकास कार्यों के लिए कम फंड्स मिल रहे हैं, और इसे वित्तीय संकट का कारण माना जा रहा है।
ब्याज भुगतान पर भारी खर्च
राजस्थान सरकार को बढ़ते कर्ज़ का सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि उसे हर साल बढ़ते ब्याज भुगतान के लिए भारी रकम का इंतजाम करना पड़ता है। 2025-26 में ब्याज भुगतान के लिए 40,058 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह रकम सरकार के बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रही है और नए विकास कार्यों को रोक रही है।
आय के स्रोत में कमी
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राज्य के राजस्व संग्रह में गिरावट आई है। केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान भी लक्ष्य का केवल एक चौथाई ही प्राप्त हुआ है, जिससे राज्य के कई केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा पड़ गया है। राज्य अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से उधारी पर निर्भर हो रहा है, जो महंगे ब्याज दरों के कारण जोखिम भरा हो सकता है।
राज्य के वित्तीय भविष्य के लिए खतरे की घंटी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बढ़ते कर्ज़ का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो राज्य की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में फंस सकती है। वर्तमान में कर्ज़ का बड़ा हिस्सा केवल ब्याज और वेतन भुगतान में जा रहा है, जबकि यह पैसे का खर्चा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विकास कार्यों पर होना चाहिए।
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