शिक्षिका की अवैध बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर किया 20 लाख
Mukesh Sharma | Aug 20, 2026, 19:50 IST
20 साल की सेवा के बाद अवैध बर्खास्तगी, HC ने 1 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर 20 लाख किया
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक शिक्षिका की अवैध बर्खास्तगी मामले में ट्रिब्यूनल के एक लाख रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी बर्खास्तगी पर नाममात्र मुआवजा देना नियोक्ता की मनमानी को बढ़ावा देना है।
समझें क्या है पूरा मामला
- महिला शिक्षक की अवैध बर्खास्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
- अवैध सेवा समाप्ति पर कड़ा रुख अपनाया।
- 20 साल की सेवा और अचानक बर्खास्तगी।
- ट्रिब्यूनल के 1 लाख के मुआवजे को बताया नाकाफी।
- दो महीने में 9% ब्याज की शर्त के साथ भुगतान का निर्देश।
कोर्ट ने कहा कि अवैध बर्खास्तगी के मामले में मामूली मुआवजा देना नियोक्ता की गलत कार्रवाई को बढ़ावा देने जैसा है।
20 साल से ज्यादा की सेवा के बाद हुई बर्खास्तगी
28 जनवरी 2015 को स्कूल मैनेजमेंट ने उनकी सेवाएं खत्म करने का प्रस्ताव पास किया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि स्कूल में हिंदी विषय पढ़ने वाले छात्र ही नहीं हैं। इसके बाद 11 फरवरी 2015 को उन्हें तीन महीने का नोटिस दिया गया और 14 मई 2015 से सेवा समाप्त कर दी गई।
ट्रिब्यूनल ने माना था बर्खास्तगी गलत
हालांकि, तब तक महिला टीचर की रिटायरमेंट की उम्र पूरी हो चुकी थी। उनका रिटायरमेंट 31 दिसंबर 2020 को होनी थी। इसलिए ट्रिब्यूनल ने नौकरी पर वापस लेने के बजाय 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट पहुंची महिला शिक्षक
महिला शिक्षक की ओर से अधिवक्ता सुनील समदरिया ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 20 साल तक बिना किसी दाग के सेवा देने वाली शिक्षिका को इस कार्रवाई से आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ।
आखिरी वेतन करीब 50 हजार रुपए था
कोर्ट ने कहा कि जब बर्खास्तगी को गैर-कानूनी माना जा चुका, तो मुआवजा कर्मचारी की सेवा अवधि और उसकी गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। एक लाख रुपये की राशि बेहद कम और उचित अनुपात से बाहर थी।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला शिक्षक को किसी अनुशासनहीनता या कदाचार के कारण नौकरी से नहीं निकाला गया था। साथ ही, इस अवधि में उनके किसी दूसरी जगह लाभ वाली नौकरी करने की बात भी सामने नहीं आई।
दो महीने में देना होगा 20 लाख
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