JJM घोटाले में हाईकोर्ट का बड़ा रुख, चार आरोपियों को नहीं दी राहत

Jageshwar prasad | Jun 02, 2026, 07:33 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-06-02T073236.271
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन के 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले में चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। वहीं, हृदय रोग से पीड़ित आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य कारणों से सशर्त जमानत दे दी गई।

News In Short

  • हाई कोर्ट ने 979.27 करोड़ के JJM घोटाले में चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
  • अदालत ने कहा- टेंडर प्रक्रिया में आरोपियों की सक्रिय भूमिका थी, जांच अभी जारी है।
  • एसीबी ने अब तक सात टेंडरों की जांच कर 16 हजार पेज का आरोप पत्र पेश किया है।
  • फर्जी अनुभव और कार्य निष्पादन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर अवैध तरीके से लिए गए ठेके।
  • गंभीर हृदय रोग से पीड़ित आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य आधार पर दी गई जमानत।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन (JJM) के टेंडरों से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं हैं। वहीं, आरोपी अरुण श्रीवास्तव को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने यह आदेश दिया।

किन आरोपियों की जमानत हुई खारिज?

कोर्ट ने राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड के तत्कालीन सचिव शुभांशु दीक्षित, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, तत्कालीन मुख्य लेखाधिकारी एवं वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा तथा तत्कालीन मुख्य अभियंता स्पेशल प्रोजेक्ट्स दिनेश गोयल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने 27 मई को सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब यह आदेश सुनाया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अधिकारी टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य थे। पूरी प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका रही है। निविदाओं के संबंध में गंभीर शिकायतें मिलने के बावजूद प्रक्रिया को जानबूझकर आगे बढ़ाया गया। इससे प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित होते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि एसीबी की ओर से अब तक सात टेंडरों की जांच कर अदालत में करीब 16 हजार पेज का आरोप पत्र पेश किया है, जबकि कुल 104 टेंडरों की जांच होनी है। ऐसे में जांच के इस नाजुक चरण पर आरोपियों को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।

क्या है JJM घोटाला?

पूरा मामला जल जीवन मिशन के तहत 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले से जुड़ा हुआ है। एसीबी की जांच में पाया गया कि JJM के तहत जारी सरकारी टेंडरों में कुछ लोगों ने कथित अनुभव और कार्य निष्पादन प्रमाण पत्रों का गलत इस्तेमाल कर अवैध रूप से ठेके हासिल किए।

यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और सरकारी धन बर्बादी का एक गंभीर उदाहरण है। एसीबी ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।

एक आरोपी को स्वास्थ्य आधार पर जमानत

अदालत ने मामले के सह-आरोपी, तत्कालीन चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव, को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी उम्र 58 वर्ष से अधिक है और वह लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से ग्रस्त हैं। राहत केवल उनकी चिकित्सीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए दी गई है, मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

जमानत की शर्तें

अदालत ने अरुण श्रीवास्तव को कई शर्तों पर जमानत दी है। उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा। वह साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेगा। उसे अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपना होगा। साथ ही, वह ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेगा। यदि वह इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो उसकी जमानत रद्द अदालत द्वारा की जा सकती है।

आगे क्या?

अब इस मामले में जांच जारी रहेगी। एसीबी को कुल 104 टेंडरों की जांच करनी है, जबकि अब तक सिर्फ सात टेंडरों की जांच पूरी हुई है। चार आरोपियों को जमानत नहीं मिलने से वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे। वहीं, स्वास्थ्य कारणों से रिहा हुए श्रीवास्तव को नियमित रूप से अदालत में पेश होना होगा और जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा।

FAQ

  1. जल जीवन मिशन क्या है?
    जल जीवन मिशन (JJM) केंद्र सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर तक 'हर घर नल से जल' पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लाल किले से इस मिशन की शुरुआत की थी। इस योजना का नोडल मंत्रालय जल शक्ति मंत्रालय है।मिशन के विस्तारित चरण (जल जीवन मिशन 2.0) के तहत अब ग्रामीण परिवारों को वर्ष 2028 तक नल से शुद्ध पेयजल सुनिश्चित कराने का लक्ष्य रखा गया है।

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