हाई कोर्ट ने एसीबी के डीआईजी से कहा, क्यों बचा रहे हो भ्रष्टाचारियों को ! दो सप्ताह में कार्रवाई करो

राजस्थान हाई कोर्ट ने डीओआईटी में भ्रष्टचार की शिकायतों की जांच करने में ढ़िलाई बरतने पर भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो के प्रति नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को कहा कि कार्रवाई नहीं करने का अर्थ है कि भ्रष्टाचारियों को बचाया जा रहा है

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • एसीबी डीआईजी हुए हाई कोर्ट में पेश,कार्रवाई के लिए मांगा और समय 
  • हाई कोर्ट ने 5 फरवरी को दिया था दो सप्ताह का समय,डीआईजी ने मांगा और समय 
  • शिकायतकर्ता का आरोप एसीबी डरती है बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई करने से 

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी व संचार विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच व कार्यवाही नहीं करने पर भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो के प्रति नाराजगी जताई है। जस्टिस अशोक जैन ने कोर्ट में उपस्थित एसीबी डीआईजी आनंद शर्मा को कहा कि कार्यवाही नहीं करने का अर्थ है कि भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाया जा रहा है। कोर्ट ने 5 फरवरी को डीआईजी आनंद शर्मा को दो सप्ताह का समय दिया ​था। लेकिन सोमवार को सुनवाई के दौरान डीआईजी शर्मा ने कार्यवाही के ​लिए और समय मांगा तो कोर्ट ने नाराजगी जताई। 

27 मामलों के दस्तावेज दे दिए हैं

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के एडवोकेट पूनमचंद भंडारी ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता टी.एन.शर्मा ने 27 शिकायत दस्तावेजों सहित एसीबी को दे रखी हैं। लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही है। मात्र एक मामले में करीब चार महीने पूर्व एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में भी कई प्रयास के बाद एसीबी ने 4 दिन पहले ही शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए हैं। 

डरती है एसीबी बड़े अफसरों पर कार्यवाही से

एडवोकेट पूनमचंद भंडारी ने कोर्ट को बताया कि एसीबी क्लर्क,पटवारी,चपरासी,कांस्टेबल और एसआई जैसे अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ तो तत्काल कार्यवाही करके उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। लेकिन बड़े अधिकारियों पर कार्यवाही करने से बचते हैं,जबकि याचिकाकर्ता ने 27 मामलों की शिकायत दस्तावेज सहित दे रखी हैं। 

आपके विरुद्ध भी कर सकते हैं कार्यवाही

कोर्ट ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को 5 फरवरी को शिकायतों पर कार्यवाही करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। लेकिन एसीबी ने अब तक एक भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। कोर्ट ने डीआईजी शर्मा से पूछा कि क्या शिकायतों से कोई अपराध बनता है या नहीं और क्या एसीबी ने आरोपी के विरुद्ध जांच की है या नहीं ? इस पर डीआईजी ने शर्मा ने बताया कि जांच में अभी समय लगेगा। इस पर नाराज कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ऊपर के अधिकारी कार्यवाही नहीं चाहते । कोर्ट ने डीआईजी शर्मा केा कहा कि वह मामले में कार्यवाही करें अन्यथा कोर्ट उनके विरुद्ध भी कार्रवाई कर सकता है । कोर्ट ने कहा कि यदि वह प्रभावी कार्यवाही करके लाएंगे तो और समय दिया जा सकता है।  

हाईकोर्ट ने दिनांक 5 फरवरी को एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को दो सप्ताह में कार्यवाही करने के आदेश दिया था मगर एसीबी ने एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की और किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई इस पर न्यायालय ने जब डीआईजी शर्मा से पूछा कि की शिकायतो से अपराध बनता है या नहीं और आपने आरोपी के खिलाफ कोई जांच है क्या तो उन्होंने कहा की फोन से बात की है और जांच में अभी समय लगेगा इसपर न्यायालय ने भारी नाराजगी जाहिर की और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ऊपर के अधिकारी कार्रवाई नहीं चाहते हैं आप कार्रवाई करें नहीं तो न्यायालय आपके विरुद्ध भी कार्रवाई कर सकता है। आप प्रभावी कार्यवाही करके लाइए तो आपको समय दिया जा सकता है।

कोर्ट ने दिए थे जांच के आदेश

एडवोकेट पूनमचंद भंडारी ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने छ​ह सितंबर,2024 को डीओआईटी के टेंडरों की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवादी ने एसीबी को 27 मामलों के दस्तावेज सौपे थे। इसके बाद भी परिवादी अलग-अलग मामलों में फैक्ट्स और दस्तोवज एसीबी को देता रहा है। परिवादी ने आरटीआई में दस्तावेज लेकर एसीबी को दिए हैं। लेकिन एसीबी कुछ नहीं कर रही है। जबकि एक मामला तो ऐसा है जिसमें अधिकारी ने व्हाइटनर लगा-लगाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कार्यादेश बढ़ाता रहा है। लेकिन एसीबी ना तो कोई कार्यवाही कर रही है और ना ही एफआईआर दर्ज कर रही है। मामले में अगली सुनवाई 9 मार्च केा होगी।

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