हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब बचपन में हुए अपराध से नहीं जाएगी सरकारी नौकरी

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। इसके अनुसार नाबालिग रहते हुए किए गए छोटे अपराध के आधार पर सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने हनुमानगढ़ के दिव्यांग सफाई कर्मचारी की बर्खास्तगी रद्द कर दी।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  1. राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा, नाबालिग रहते हुए किए गए छोटे अपराध के आधार पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता।

  2. हनुमानगढ़ के दिव्यांग सफाई कर्मचारी श्रवण की बर्खास्तगी रद्द।

  3. श्रवण के खिलाफ 4 आपराधिक मामले थे। इसमें 3 जुआ एक्ट और 1 आबकारी मामले में वह बरी हो गया था।

  4. कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) का हवाला देते हुए सुरक्षा प्रदान की।

  5. हाई कोर्ट ने श्रवण की नौकरी बहाल करने और उसे निरंतर सेवा में रखने के आदेश दिए।

News In Detail 

राजस्थान हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि नाबालिग रहते हुए किए गए छोटे अपराध के आधार पर किसी को सरकारी नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। हनुमानगढ़ के दिव्यांग सफाई कर्मचारी श्रवण की बर्खास्तगी को कोर्ट ने रद्द कर दिया। श्रवण पर 4 आपराधिक मामले थे, जिनमें 3 जुआ एक्ट के तहत सजा हुई थी और एक में वह बरी हो गया था। कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत सुरक्षा प्रदान करते हुए उसकी नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। हालांकि उसकी सेवा में कागजी लाभ मिलेगा, नकद वेतन नहीं मिलेगा।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाई कोर्ट  ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने नाबालिग रहते हुए कोई छोटा अपराध किया था, तो उसे सरकारी नौकरी से निकालने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट का यह फैसला हनुमानगढ़ जिले के दिव्यांग सफाई कर्मचारी श्रवण के मामले में आया है। श्रवण को रावतसर नगरपालिका में सफाई कर्मचारी की नौकरी मिली थी, लेकिन पुलिस जांच में उसके खिलाफ चार पुराने आपराधिक मामले सामने आए थे।

नाबालिग के खिलाफ मामले

श्ववण को इनमें से तीन मामलों में जुआ एक्ट के तहत सजा हुई थी। एक मामले में आबकारी से बरी कर दिया गया था। नगरपालिका ने इसी आधार पर अगस्त 2018 में उसकी नौकरी समाप्त कर दी। इसके बाद श्रवण ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें उसके वकील ने कहा कि यह सभी घटनाएं नाबालिग रहते हुए हुई थीं और ये मामूली अपराध थे।

कोर्ट का तर्क और JJ एक्ट की धारा

राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई किशोर अपराध करता है, तो उसके खिलाफ भविष्य में कोई अयोग्यता या सजा नहीं होनी चाहिए। इस फैसले में कोर्ट ने श्रवण की बर्खास्तगी रद्द करते हुए उसे पुनः नौकरी पर बहाल करने के आदेश दिए।

कोर्ट का अंतिम आदेश

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि जब श्रवण नौकरी से बाहर था, उस समय का असली वेतन नहीं मिलेगा, लेकिन कागजी तौर पर उसकी सेवा निरंतर मानी जाएगी। इससे उसे सीनियरिटी और पेंशन लाभ मिलते रहेंगे। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए राहत की बात है, जिनकी बचपन की गलती अब उनकी नौकरी में रुकावट बन गई थी।

मुख्य बिंदू :

  • नाबालिग अपराध: कोर्ट ने नाबालिग अपराधियों को भविष्य में किसी भी प्रकार की अयोग्यता से बचाया।

  • JJ Act (Juvenile Justice Act): इस एक्ट के तहत नाबालिगों की गलती को भविष्य में उनके करियर पर प्रभाव डालने से बचाया जाता है।

  • बर्खास्तगी रद्द: श्रवण की बर्खास्तगी को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया और उसे नौकरी पर बहाल किया।

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