राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, यौन अपराधों में फोटो-वीडियो सीलबंद लिफाफे में हों पेश

Jageshwar prasad | May 29, 2026, 10:50 IST
Share
Ashish Bhardwaj - 2026-05-29T104923.890
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की निजी फोटो-वीडियो सीडी या पेन ड्राइव में पेश करने पर रोक लगाई है। कोर्ट ने इसे महिलाओं की गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन बताया।

News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने यौन अपराध के मामलों में निजी फोटो-वीडियो खुले तौर पर पेश करने पर लगाई रोक।
  • अदालत ने कहा- पीड़िता के फोटो-वीडियो वायरल होने से उसका भविष्य और वैवाहिक जीवन तबाह हो सकता है।
  • कोर्ट ने सभी साक्ष्य केवल सीलबंद लिफाफे या पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में पेश करने के दिए निर्देश।
  • जस्टिस अनूप ढंढ ने कहा- जब जांच ही अपमान में बदल जाए तो कानूनी प्रक्रिया सजा बन जाती है।
  • आदेश की प्रति डीजीपी, एसीएस होम और सभी थानों के एसएचओ को भेजी जाएगी।

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने यौन अपराधों से संबंधित मामलों में पीड़िता की निजता और गरिमा की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी मामलों में पीड़िता से जुड़ी कोई भी निजी, अश्लील फोटो या वीडियो सीडी या पेन ड्राइव में पेश नहीं की जाएगी। इन्हें केवल सीलबंद लिफाफे अथवा पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर के माध्यम से ही अदालत में पेश किया जाएगा।

सीडी-पेन ड्राइव में देना गलत

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आजकल जमानत याचिकाओं, आपराधिक रिवीजन और अपील के मामलों में आरोपी या पुलिस पीड़िता की फोटो याचिका के साथ या फिर सीडी और पेन ड्राइव में पेश कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरीके से पीड़िता के फोटो और वीडियो वायरल होने की गंभीर आशंका रहती है।

अगर ऐसी सामग्री वायरल हो गई तो यह किसी भी महिला के वर्तमान जीवन, भविष्य और उसके वैवाहिक जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकता है। अदालत ने इसे महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता का सीधा उल्लंघन बताया।

जांच अपमान में नहीं बदलनी चाहिए

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि जब जांच ही अपमान में बदल जाए और अदालती ट्रायल सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने का जरिया बन जाए, तो यह व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

कोर्ट ने कहा कि अक्सर आरोपी या उनके वकील खुद के बचाव में यह दिखाने के लिए कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे, ऐसी निजी तस्वीरें और वीडियो जांच अधिकारी और अदालतों के समक्ष खुले तौर पर पेश कर देते हैं। यह न केवल महिला की निजता पर हमला है, बल्कि खुली फाइलों के जरिए पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक भी करता है।

सभी थानों के एसएचओ को भेजे जाएंगे निर्देश

हाई कोर्ट ने इस आदेश को राज्य भर में लागू कराने के लिए कई अहम कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्री को यौन अपराधों से संबंधित सभी याचिकाओं की सख्त जांच करने का आदेश दिया गया है, ताकि पीड़िता का नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया विवरण कहीं भी उजागर न हो।

रजिस्ट्रार न्यायिक को मामला प्रशासनिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने को कहा गया है, ताकि पूरे राज्य के लिए स्थायी आदेश जारी किए जा सकें।

इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल को सभी न्यायिक अधिकारियों को यह आदेश भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस महानिदेशक, मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग के निदेशक को आदेश की प्रति भेजकर सभी थानों के एसएचओ को सूचित करने के लिए भी कहा गया है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि थाना स्तर पर ही इस नियम का पालन हो और किसी भी पीड़िता के साथ उसकी गोपनीयता के उल्लंघन की स्थिति न बने।

अदालत का फैसला क्यों है ऐतिहासिक?

यह फैसला उन लाखों महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है जो यौन अपराध का शिकार होती हैं और फिर बदनामी के डर से न्याय पाने से कतराती हैं। अक्सर देखा गया है कि मामला कोर्ट में जाने के बाद भी पीड़िता की फोटो या वीडियो वायरल होने का डर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ देता है।

इस फैसले के बाद अब पीड़िताओं को यह भरोसा होगा कि उनकी निजी सामग्री कोर्ट में भी सुरक्षित रहेगी और उसका दुरुपयोग नहीं होगा। यह पीड़िता के मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

FAQ

  1. राजस्थान हाई कोर्ट के किस न्यायाधीश ने यौन अपराधों में पीड़ितों के फोटो-वीडियो को सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया है?
    यह रिपोर्टेबल आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय के जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने दिया है।
  2. हाई कोर्ट के अनुसार खुले तौर पर अश्लील या निजी फोटो-वीडियो को कोर्ट फाइलों में लगाना संविधान के किस अनुच्छेद का उल्लंघन है?
    यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और निजता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
  3. राजस्थान हाई कोर्ट के इस न्यायिक आदेश के तहत अश्लील या निजी डिजिटल साक्ष्यों को किस प्रारूप में पेश किया जा सकेगा?
    ऐसे साक्ष्यों को अब केवल सीलबंद लिफाफे या पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर के सुरक्षित प्रारूप में ही पेश किया जा सकेगा।

ये भी पढ़ें:-

गाली देकर बुरे फंसे मंत्री जी, राजकार्य में बाधा डालने का केस दर्ज, सीआईडी करेगी जांच

2 साल में 13 IAS-IPS आए राजस्थान कैडर में, प्रदेश बना अफसरों की पहली पसंद

मंत्री गौतम दक का आया ऑडियो, तीन मिनट में 17 बार दी गालियां, भाजपा बैकफुट पर

स्कॉर्पियो की खराबी बन गई मुसीबत, कोर्ट ने महिंद्रा से कहा-नई गाड़ी दो या रुपए लौटाओ

Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • वायरल
  • यौन अपराध
  • जस्टिस अनूप कुमार ढंड
  • अनुच्छेद-21
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा