जर्जर स्कूलों पर हाईकोर्ट सख्त: शिक्षा निदेशक और सचिव की लगाई क्लास, कहां-जमीनी हालात अलग क्यों

राजस्थान हाई कोर्ट ने जर्जर स्कूलों के हालात पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट कागजों में कुछ और धरातल पर हकीकत कुछ और है।

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Ashish Bhardwaj
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Rajasthan high court

Photograph: (the sootr)

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News In Short 

  • राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के जर्जर स्कूलों की स्थिति पर सरकार को फटकार लगाई।
  • कोर्ट ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट कागजों पर सही दिखती है, लेकिन जमीनी हालात अलग हैं।
  • शिक्षा विभाग को स्कूलों की मरम्मत के लिए ठोस रोडमैप प्रस्तुत करने की हिदायत दी।
  • कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर टिप्पणी की।
  • अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी, सरकार से डिटेल रिपोर्ट की मांग की गई है।

News In Detail 

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक बार फिर राज्य के स्कूलों की जर्जर स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई  हैं। इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट कागजों में कुछ और दर्शा रही है। लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है।

सरकार और शिक्षा विभाग को फटकार

सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल और निदेशक सीताराम जाट को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत के लिए कोई ठोस रोडमैप न पेश करने पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने बूंदी हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि रिपोर्ट में ही बताया गया है कि बच्चे बिल्डिंग के गिरने से पहले जान बचाने के लिए पेड़ के नीचे बैठे थे, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।

बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

कोर्ट ने स्वच्छता अभियानों पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब एक बच्ची घर से स्कूल जाती है, तो उसे शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। वे बच्चे स्कूल में पानी की बोतल लेकर जाते हैं, लेकिन कम पानी पीते हैं ताकि उन्हें टॉयलेट न जाना पड़े। यह स्थिति समाज और सरकार की नाकामी को दिखाती है। कोर्ट ने राजनीति में व्यस्त नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि उनका ध्यान केवल ट्रांसफर जैसी बातों पर रहता है, जबकि बच्चों की बुनियादी जरूरतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

16 फरवरी को अगली सुनवाई

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से लगातार डिटेल रिपोर्ट की मांग की है, लेकिन सरकार द्वारा समय पर रिपोर्ट न देने पर नाराजगी जताई है। इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से अधिवक्ता वागीश सिंह ने पैरवी की।

सर्वे रिपोर्ट और जर्जर स्कूलों की स्थिति

सरकार द्वारा पेश की गई सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य में 5,667 स्कूल जर्जर हालत में हैं। इनमें 86,934 भवन भी जर्जर पाए गए हैं। इसके अलावा 17,109 शौचालय पूरी तरह से जर्जर हैं और 29,093 शौचालयों को मरम्मत की आवश्यकता है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार की ओर से किए गए दावे और वास्तविकता के बीच बहुत बड़ा अंतर है।

झालावाड़ स्कूल हुआ था हादसा

झालावाड़ में सरकारी स्कूल  25 जुलाई 2025 को बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 35 बच्चे दब गए थे।  इनमे 7 बच्चों की मौत हो गई थी।  हादसे को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दुख जताया। इस हादसे की चर्चा पुरे देश में चर्चा हुई थी।

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