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News In Short
- शनिवार को नहीं करेंगे काम हाई कोर्ट के अधिवक्ता
- जयपुर-जोधपुर में बार एसोसिएशन का फैसला
- महीने में दो शनिवार काम करने का मामला
- हाईकेार्ट ने प्रशासन ने जारी की 24 जनवरी की मुकदमों की लिस्ट
News In Detail
राजस्थान हाईकोर्ट में हर महीने में दो शनिवार को काम करने के मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अधिवक्ता शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के फैसले को वापिस लेने की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस विवाद केा सुलझाने के लिए हाईकोर्ट जजों की एक कमेटी बनाई थी।
कमेटी ने 21 जनवरी को रिपोर्ट दे दी है। लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है और हाई कोर्ट रजिस्ट्री ने शनिवार 24 जनवरी को सुनववाई के लिए मुकदमों की लिस्ट भी जारी कर दी है।
नहीं करेंगे अधिवक्ता काम
शुक्रवार को मुख्य पीठ जोधपुर और जयपुर बैंच की बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से शनिवार को काम नहीं करने की घोषणा कर दी है। राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने बताया कि अधिवक्ताओं ने 6 जनवरी को एक्टिंग सीजे से हुई वार्ता में शनिवार को कार्यदिवस नहीं रखने की मंशा स्पष्ट कर दी थी।
कमेटी को देनी थी रिपोर्ट
वार्ता के बाद एक्टिंग सीजे ने पांच जज की एक कमेटी गठित की थी। कमेटी को बार प्रतिनिधियों से बात करके शनिवार को कार्यदिवस के मुद्दे पर रिपोर्ट एक्टिंग सीजे को देनी थी। इस कमेटी में जस्टिस समीर जेन,जस्टिस कुलदीप माथुर,जस्टिस अनिल कुमार उपमन,जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित और जस्टिस सुनील बेनीवाल शामिल थे।
रिपोर्ट ​भी आ गई लेकिन
हाईकोर्ट राजस्थान बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने बताया कि कमेटी ने एक्टिंग सीजे को रिपोर्ट दे दी है,लेकिन क्या रिपोर्ट दी है यह नहीं पता। ना ही शनिवार को कार्यदिवस के फैसले को वापिस लेने के लिए शुक्रवार को फुल कोर्ट की मीटिंग ही हुई है। हाईकोर्ट ने शनिवार को सुनवाई के लिए लगने वाले मुकदमों की लिस्ट भी जारी कर दी है। ऐसे में अधिवक्ताओं के समक्ष न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं बचा है।
दिसंबर में हुआ था फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट में सोमवार से शुक्रवार की कार्यदिवस होता है यानि मुकदमों की सुनवाई होती है। शनिवार को अदालतें सुनवाई नहीं करतीं लेकिन,दफ्तर खुलता है। राजस्थान हाईकोर्ट में एक कलैंडर ईयर में कुल 210 कार्य दिवस होते हैं।
दिसंबर—2025 में राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट की बैठक जैसलमेर में हुई थी। इस बैठक में हाई कोर्ट में हर महीने दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित कर दिया था। इससे साल में कुल 17 कार्यदिवस बढ़ते हैं।
अधिवक्ताओं ने शुरु किया विरोध
हर महीने दो शनिवार कार्यदिवस घोषित होने के फैसला होते ही अधिवक्ताओं ने इसका विरोध शुरु कर दिया था। अधिवक्ताओं का कहना है कि लंबित मुकदमों केा तेजी से निपटाने के लिए कार्यदिवस बढ़ाने से ज्यादा जरुरी जजों की संख्या बढ़ाने और नियुक्तियां करना जरुरी है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि शनिवार को उन्हें अपने मुवक्किलों के साथ ​मीटिंग करने,विभिन्न प्रकार की याचिकाएं और अर्जियां लिखवाने के साथ ही निजी काम भी निपटाने होते हैं। रविवार को सोमवार के मुकदमों की तैयारी करनी होती है। ऐसे में यदि शनिवार को अदालत में काम करना संभव नहीं है। और यह ना केवल अधिवक्ताओं के लिए बल्कि स्वयं न्यायाधीश और कोर्ट स्टॉफ के लिए भी उचित नहीं होगा।
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