द सूत्र एक्सप्लेनर: आखिर गहलोत सरकार का ऑनर किलिंग बिल राज्यपाल ने क्यों लौटाया
Mukesh Sharma | Jan 30, 2026, 15:55 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने गहलोत सरकार के उस विधेयक को लौटा दिया है, जो ऑनर किलिंग पर अंकुश लगाने के लिए विधानसभा में पारित किया था। आखिर विधेयक में क्या प्रावधान हैं, इसे किन बाधाओं का सामना करना पड़ा? हम इसे विस्तार से बता रहे हैं।
News In Detail
राजस्थान ऑनर किलिंग बिल की क्या जरूरत थी?
ऐसी धमकियों में परिवार, जाति या समुदाय के सम्मान की रक्षा का नाम लिया जाता है। ऐसे मामलों में हिंसा भड़काने का सहारा लिया जाता है। नवविवाहित जोड़ों या शादी करने के इच्छुक व्यक्तियों को इसका शिकार बनाया गया है। कुछ मामलों में उनकी हत्या भी कर दी गई है। हालांकि, यह भारतीय दंड संहिता में अपराध हैं। लेकिन, ऐसे कृत्यों में दोषियों को कड़ी सजा देना आवश्यक है।
इसमें क्या-क्या प्रावधान थे?
स्वतंत्रता को खतरे में डालने को ऐसे परिभाषित किया कि जब व्यक्ति किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को विवाह को रोकने या अस्वीकार करने के लिए खुले तौर पर या अन्यथा सलाह देते हैं, उकसाते हैं या दबाव डालते हैं।
“इकट्ठा होना”, “एकत्रित होना” या “इकट्ठा होना” में किसी भी तकनीकी साधन या माध्यम के जरिए मिलकर कार्य करना शामिल था। क्योंकि, आम तौर ऐसी प्रस्तावित कार्रवाइयों का प्रचार सोशल मीडिया पर किया जाता है। विधेयक का उद्देश्य ऐसे दंपत्ति या उनके परिवार को बहिष्कृत करने वालों को जवाबदेह ठहराना भी था, जो उन्हें गांव छोड़ने के लिए दबाव डालना, उनकी जमीन या संपत्ति छीनना या उन पर जुर्माना लगाना शामिल था।
प्रस्तावित विधेयक में संबंधित डीएम या एसडीएम को इस तरह की गैरकानूनी सभाओं पर रोक लगाने सहित निवारक उपाय करने का निर्देश भी दिया गया था।
इस विधेयक में क्या-क्या दंड प्रावधान थे?
ऐसे मामलों में मामूली चोट पहुंचाने पर तीन से पांच साल तक की कैद और 2 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता था। गंभीर चोट पहुंचाने पर कम से कम दस साल की कैद, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता था। साथ ही 3 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता था।
ऐसे दंपत्ति या उनमें से किसी एक की मृत्यु होने पर दोषी को मृत्युदंड और आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया। साथ ही ऐसे मामलों में 5 लाख रुपए तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
राज्यपाल ने विधेयक वापस क्यों लौटाया?
क्या देश में कहीं और ऐसा कानून हैं?
पिछले साल दिसंबर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में ऑनर किलिंग को रोकने कानूनी और नीतिगत उपायों की सिफारिश करने के लिए एक आयोग के गठन की घोषणा की थी।
2011 में, गैरकानूनी सभा निषेध (वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप) विधेयक का मसौदा भारत के विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित किया गया था। लेकिन, इसे कभी अधिनियमित नहीं किया गया।
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