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Photograph: (The sootr)
Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर में चौमूं थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का खुलासा किया है, जो एक फर्जी वेबसाइट से लोगों से ठगी कर रहा था। उस वेबसाइट पर महिलाओं की अश्लील तस्वीरें दिखाकर लोगों को लुभाया जाता था। पुलिस ने रिहायशी कॉलोनी के एक फ्लैट पर दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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यूट्यूब से सीखी ठगी की कला
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेन्द्र कुमार यादव और अंकित गलेत के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि दोनों ने यूट्यूब से वीडियो देखकर ठगी का तरीका सीखा था। उन्होंने एक फर्जी वेबसाइट बनाई और उस पर अपने मोबाइल नंबर अपलोड किए। यह ठग किसी भी व्यक्ति को फंसाने के लिए अश्लील तस्वीरें दिखाते थे और फिर उनसे पैसे वसूलते थे।
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ठगी का ऐसा था शातिर तरीका
पुलिस उपायुक्त हनुमान प्रसाद मीणा के अनुसार, ठगी करने का तरीका बहुत ही शातिर था। पहले, आरोपी अश्लील तस्वीरों के जाल में लोगों को फंसाते थे। फिर अपने नंबर पर संपर्क करने को कहते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति संपर्क करता, आरोपी उसे सोशल मीडिया से चुराई गई 10-12 सुंदर लड़कियों की अश्लील तस्वीरें भेजते। इसके बाद, शिकार को एक फर्जी दस्तावेज भेजकर यह यकीन दिलाते कि वे एक मान्यता प्राप्त सर्विस हैं।
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'टोकन मनी' के नाम पर पैसे वसूलना
लड़की पसंद आने पर, आरोपी टोकन मनी के नाम पर शिकार से पैसे वसूलते थे। आरोपी क्यूआर कोड भेजकर पैसे ट्रांसफर करवाते थे। एक बार पैसे मिलने के बाद शिकार को नजदीकी होटल का नाम भेजते थे और कहते थे कि वहां जाकर टोकन दिखाओ तो एंट्री मिल जाएगी। इस चक्कर में, शिकार से बार-बार 4 से 5 हजार रुपए वसूले जाते थे।
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बाहरी राज्यों के लोग थे शिकार
पुलिस ने बताया कि ये आरोपी राजस्थान से बाहर के लोगों को निशाना बनाते थे। इनका मानना था कि बदनामी के डर से और दूरी के कारण लोग पुलिस में शिकायत नहीं करेंगे। इसलिए, उन्होंने बाहरी राज्यों के नागरिकों को शिकार बनाया।
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पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
पुलिस को इस गिरोह के बारे में मुखबिर से जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस ने मयंक एन्क्लेव स्थित फ्लैट पर रेड मारी। पुलिस ने मौके से सात हाई-टेक मोबाइल फोन, क्यूआर कोड स्कैनर्स, फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और लाखों की ठगी के डिजिटल दस्तावेज बरामद किए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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पुलिस की अपील
चौमूं थाना प्रभारी ने आम जनता से अपील की है कि वे डिजिटल जाल से बचें और ऐसी घटनाओं से सावधान रहें। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं, और इन्होंने अब तक कितने लाख रुपये ठगे हैं।
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मुख्य बिंदू:
- इस ठगी में आरोपी अश्लील तस्वीरें दिखाकर लोगों को फंसाते थे, फिर उनसे टोकन मनी के नाम पर पैसे वसूलते थे।
- पुलिस को गिरोह के बारे में मुखबिर से जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने मयंक एन्क्लेव स्थित फ्लैट पर रेड मारी और ठगी से जुड़े डिजिटल दस्तावेज बरामद किए।
- यह गिरोह मुख्य रूप से बाहरी राज्यों के लोगों को निशाना बनाता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि वे बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत नहीं करेंगे।
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