जल जीवन मिशन घोटाला: भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी, पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की 'तलाश'
Ashish Bhardwaj | Feb 18, 2026, 13:29 IST
Photograph: (the sootr)
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन राजस्थान में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। एसीबी की जांच में इसकी गहरी परतें अब सामने आने लगी है। भ्रष्टाचार के इस खेल में पर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
News In Short
- एसीबी की जांच में जल जीवन घोटले की गहरी परतें अब आई सामने।
- एसीबी ने मंगलवर को गिरफ्तार किए राजस्थान के नौ बड़े अधिकारी।
- रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल फरार, एसीबी ने बिछाया जाल।
- एसीबी जांच में उजागर हुआ कि दफ्तर की जंगह होटल का पता।
- दफ्तर की बिल्डिंग में शाम ढलते ही लगती थी 'कैश वैन'।
News In Detail
रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल का मोबाइल बंद
एसीबी की टीम जब उनके आवास पर पहुंची, तो पता चला कि वे पिछले दरवाजे से निकल गए हैं। उनका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है। एसीबी अब उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स और अन्य दस्तावेजों के आधार पर उनकी तलाश कर रही है। विभाग के कई अन्य वरिष्ठ इंजीनियर भी अब जांच की रडार पर हैं, जिनसे जल्द ही पूछताछ की जा सकती है।
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ऑफिस के नाम पर होटल का खेल
हैरानी की बात यह है कि जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के इस फर्जीवाड़े को क्लीन चिट दे दी थी। जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने ऑफिस की फर्जी फोटो खींचकर उसे असली बताया और टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भ्रष्टाचार केवल कागजों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पूरी व्यवस्था की मिलीभगत थी।
शाम ढलते ही लगती थी 'कैश वैन'
भ्रष्टाचार का आलम यह था कि जल जीवन मिशन की बिल्डिंग में शाम होते ही 'कमीशन का खेल' शुरू हो जाता था। सूत्रों के अनुसार साल 2022-23 के दौरान जब फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर दिए जा रहे थे, तब बिल्डिंग में 'कैश वैन' आने की चर्चा आम थी।
कमीशन कॉल: शाम 6 से 8 बजे के बीच जल भवन स्थित जेजेएम बिल्डिंग में फाइलों का खेल चलता था।
गाड़ियों का आना-जाना: प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शाम के वक्त ठेकेदारों की गाड़ियां सीधे बिल्डिंग के पोर्च तक आती थीं, जहां कथित तौर पर लेनदेन होता था।
अधिकारियों की चुप्पी: इतनी बड़ी धांधली के बावजूद विभाग के आला अधिकारियों ने न केवल आंखें मूंद लीं, बल्कि फर्जी फर्मों को करोड़ों रुपये का भुगतान भी जारी रखा।
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