रेहड़ी से ज्वैलर्स तक, कम तौला तो 5 लाख तक पेनल्टी
ग्राहकों को चूना लगाना पड़ेगा महंगा, गड़बड़ी पर कड़े जुर्माने का मसौदा जारी
Jageshwar prasad | Jun 26, 2026, 08:13 IST
राजस्थान में कम या गलत तौलने वाले दुकानदारों और कारोबारियों पर कसेगा शिकंजा
राजस्थान सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में बदलाव का मसौदा जारी किया। गलत तौल, कम माल और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार पर 2 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में कम या गलत तौलने वाले दुकानदारों और कारोबारियों पर कसेगा शिकंजा।
- विधिक माप विज्ञान (लीगल मेट्रोलॉजी) नियमों में संशोधन का मसौदा जारी।
- रेहड़ी-ठेला चलाने वालों से लेकर बड़े ज्वैलर्स तक, नियम तोड़ने पर 5 लाख तक जुर्माना।
- कांटे-बांट से छेड़छाड़ और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार करने पर भी होगी सख्त पेनल्टी।
- गड़बड़ी मिलने पर कारोबारियों को 15 दिन के भीतर सुधार कर देना होगा जवाब।
रेहड़ी-ठेला वालों से लेकर ज्वैलर्स, पेट्रोल पंप और बड़ी कंपनियां सभी इसके दायरे में हैं।
किन पर लागू होगा यह नियम
ज्वैलर्स, उद्योग, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, पेट्रोल-डीजल पंप और पेट्रोलियम डिपो भी नियमों में शामिल किए गए हैं। अनियमितता मिलने पर 15 दिन में सुधार कर जवाब देना होगा।
गैर-मानक तौल उपकरण पर कितना जुर्माना
रेहड़ी-ठेला वालों पर 2 लाख, किराना स्टोर और होटल-रेस्टोरेंट पर 2.5 लाख, बड़ी रिटेल चेन पर 3 लाख और वेटब्रिज संचालकों पर 3.5 लाख तक जुर्माना लगेगा। ज्वैलर्स, उद्योगों, पेट्रोल पंपों और कंपनियों पर यह राशि 5 लाख रुपए तक पहुंच सकती है।
कांटे-बांट से छेड़छाड़ पर 1 लाख तक
गलत यूनिट में बिक्री पर भी सख्ती
बिना रजिस्ट्रेशन पर 3.5 लाख तक
कम माल और बिना सत्यापन पर दंड
बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट मिलने पर 2 हजार से 8 हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा। पेट्रोल पंपों पर माप जांच व्यवस्था सख्त होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना 1 लाख रुपए तक पहुंच सकेगा।
FAQ
- लीगल मेट्रोलॉजी क्या है?
लीगल मेट्रोलॉजी यानी विधिक माप विज्ञान वह कानूनी व्यवस्था है जो यह सुनिश्चित करती है कि बाजार में इस्तेमाल होने वाले सभी तौल और माप उपकरण सही हों। इससे ग्राहकों को कम माल देने की गड़बड़ी पर रोक लगती है। - राजस्थान में नए लीगल मेट्रोलॉजी नियम कब से लागू होंगे?
यह अभी मसौदा (Draft) के रूप में जारी हुआ है। सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। उसके बाद अंतिम रूप से अधिसूचित होने पर यह लागू होंगे।
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