राजस्थान में नीट-पीजी की 1122 सीटें अब भी खाली, निजी मेडिकल कॉलेजों का बुरा हाल

राजस्थान में दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद नीट—पीजी की 1122 सीटें खाली रह गई हैं। इसमें प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का बुरा हाल है। प्राइवेट मेडिकल में 980 सीटें रह गई खाली

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • राजस्थान में दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद नीट-पीजी की 1122 सीटें खाली
  • प्राइवेट मेडिकल में 980 सीटें रह गई खाली, कारण मोटी फीस तो नहीं
  • अभ्यर्थियों की नजरें अब 13 फरवरी को तीसरी राउंड की काउंसलिंग पर टिकी
  • प्राइवेट कॉलेज में सीटें रिक्त रहना बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा
  • यह स्थिति देशभर के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम के लिए एक चेतावनी

News In Detail

Jaipur: राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। नीट पीजी (NEET-PG) की काउंसलिंग के दो राउंड पूरे होने के बावजूद प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 1122 सीटें खाली पड़ी हैं। इनमें निजी मेडिकल कॉलेजों की 980 सीटें शामिल हैं। 

​खाली सीटों का गणित

कुल खाली सीटों में से बड़ा हिस्सा निजी मेडिकल कॉलेजों का है। आंकड़ों पर नजर डालें तो-

​कुल खाली सीटें: 1122

​निजी मेडिकल कॉलेज: 980 सीटें

​सरकारी मेडिकल कॉलेज: 142 सीटें

इसलिए तो सरकारी कॉलेजों में सीटें रिक्त नहीं

नीट-पीजी स्टेट काउंसलिंग के दो चरणों के बाद भी सरकारी कॉलेजों में 142 सीटों का खाली रहना इस बात का संकेत है कि छात्र अपनी पसंद के विशेष विषयों को लेकर समझौता नहीं करना चाहते। वहीं, निजी कॉलेजों में लगभग एक हजार सीटों का रिक्त होना एक बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा करता है।

निजी कॉलेज का अर्थ मोटी फीस

निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस आज इतनी अधिक हो चुकी है कि एक मध्यमवर्गीय परिवार का मेधावी छात्र, जिसने नीट परीक्षा में शानदार अंक प्राप्त किए हैं, वह भी इन कॉलेजों की चौखट तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। अच्छे अंक लाने वाला मध्यमवर्गीय अभ्यर्थी आज फीस के बोझ के कारण दौड़ से बाहर खड़ा है, जबकि कम अंक लाने वाला लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न (फाइनेंशियल फिट) छात्र आसानी से प्रवेश पाकर डॉक्टर बनने की राह पर है। यह स्थिति चिकित्सा जैसे सेवाभावी पेशे में योग्यता के साथ एक बड़ा समझौता है।

​अब तीसरे चरण से उम्मीद

अब इन खाली सीटों को भरने के लिए तीसरे चरण की काउंसलिंग होगी। वर्तमान में चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया जारी है। चिकित्सा विभाग और अभ्यर्थियों की नजरें अब 13 फरवरी पर टिकी हैं, जब इस राउंड के परिणाम घोषित किए जाएंगे।
 ​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तीसरे राउंड के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो यह मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन और सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होगा। क्या फीस का निर्धारण इतना अधिक होना चाहिए कि सीटें खाली रह जाएं ?

प्रतिभा बनाम पैसा

​राजस्थान की यह स्थिति देशभर के मेडिकल एजुकेशन सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। एक तरफ जहां देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, वहीं दूसरी तरफ 1100 से ज्यादा सीटों का खाली रहना संसाधनों की बर्बादी है। अगर प्रतिभा को पैसे की तराजू में तौला जाता रहा, तो भविष्य में चिकित्सा जगत की गुणवत्ता पर इसका गंभीर असर पड़ना तय है।

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