निकाय चुनाव: डोटासरा का दावा-कांग्रेस का वोट शेयर BJP से 1% कम, 2028 में जनता देगी जवाब
Saurabh Mishra | Sept 14, 2026, 20:21 IST
डोटासरा का दावा-कांग्रेस का वोट शेयर BJP से 1% कम
राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की बढ़त के बीच पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने वोट शेयर को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सत्ता की ताकत के बावजूद कांग्रेस से अंतर करीब 1% ही रहा।
राजस्थान में हुए कुल 309 निकायों के चुनाव के सोमवार को नतीजे आ गए। देर शाम तक आए नतीजों में भाजपा 10 हजार से अधिक वार्ड में से 4100 में जीत हासिल कर चुकी थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 3500 से ज्यादा वार्ड आए। कई जगह निर्दलीयों ने बड़ी संख्या में जीत हासिल की। इस बीच, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नतीजों को लेकर भाजपा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर बड़ा हमला बोला है।
डोटासरा का दावा है कि सत्ता, सरकारी मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो के बावजूद भाजपा वोट शेयर में कांग्रेस से करीब एक फीसदी ही आगे रह सकी। उन्होंने इसे भजनलाल सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का संकेत बताया।
पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि निकाय चुनाव में सामान्य तौर पर सत्ताधारी दल को फायदा मिलता। इसके बावजूद भाजपा का प्रदर्शन सरकार के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को 35.35 और कांग्रेस को 34.31 फीसदी वोट मिले।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के मुताबिक दोनों पार्टियों के वोट शेयर में करीब एक फीसदी का ही अंतर रह गया। उन्होंने कहा कि एक समय भाजपा को कांग्रेस पर 8.12 प्रतिशत की बढ़त हासिल थी, लेकिन अब यह फासला काफी कम हो गया।
डोटासरा ने भाजपा के वोट शेयर की तुलना पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव से भी की। उन्होंने दावा किया कि 2023 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर करीब 7 फीसदी और 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब 15 प्रतिशत कम हुआ है।
डोटासरा ने कहा कि शहर और कस्बे भाजपा का मजबूत वोट बैंक माने जाते रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में पार्टी के वोट शेयर में गिरावट सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार के ढाई साल के कामकाज और नीतियों को लेकर लोगों में नाराजगी है और निकाय चुनाव में इसका असर दिखाई दिया है।
हालांकि, उपलब्ध चुनाव नतीजों में भाजपा वार्डों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस से आगे रही। देर शाम की रिपोर्ट में भाजपा ने 4100 से अधिक वार्ड और कांग्रेस ने 3,500 से अधिक वार्ड जीते थे। कई निकायों में निर्दलीयों की संख्या भी निर्णायक स्थिति में पहुंची है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि कुल 309 नगरीय निकायों में भाजपा को केवल 86 निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला है। उनके मुताबिक यह कुल निकायों का करीब 28.2 प्रतिशत है।
डोटासरा ने कहा कि अधिकांश निकायों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है और उसे निर्दलीय पार्षदों की जरूरत पड़ सकती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने वार्डों के नतीजों को भी अपने तर्क का आधार बनाया। उनका दावा है कि घोषित करीब 10 हजार वार्डों में बड़ी संख्या ऐसी है, जहां भाजपा उम्मीदवार जीत नहीं सके।
डोटासरा ने निगम चुनावसे पहले हुए परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों की सीमाओं और स्वरूप में भाजपा सरकार के स्तर पर मनमाने बदलाव किए गए। उनका दावा है कि अगर परिसीमन से जुड़े बदलावों को भी राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा बनाया जाए तो कांग्रेस का प्रदर्शन सामने दिख रहे आंकड़ों से अधिक मजबूत है। यह कांग्रेस का राजनीतिक दावा है। चुनाव परिणामों में भाजपा कुल जीते वार्डों की संख्या में कांग्रेस से आगे रही है।
डोटासरा ने निकाय चुनाव के नतीजों को 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा। उनका कहना है कि वोट शेयर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कम हुआ अंतर आने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत है।
उन्होंने दावा किया कि शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा के वोट शेयर में आई गिरावट भजनलाल सरकार के खिलाफ नाराजगी को दिखाती है। डोटासरा के मुताबिक निकाय चुनाव के नतीजों ने 2028 की राजनीतिक तस्वीर का संकेत अभी से दे दिया है।
हालांकि, निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे और मतदान का स्वरूप अलग होता है। स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड के मुद्दे और स्थानीय समीकरण भी नतीजों पर असर डालते हैं। ऐसे में 2026 के निकाय नतीजे 2028 के विधानसभा चुनाव में किस हद तक असर डालेंगे, यह आने वाले दो वर्षों की राजनीति और सरकार-विपक्ष की रणनीति पर भी निर्भर करेगा।
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डोटासरा का दावा है कि सत्ता, सरकारी मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो के बावजूद भाजपा वोट शेयर में कांग्रेस से करीब एक फीसदी ही आगे रह सकी। उन्होंने इसे भजनलाल सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का संकेत बताया।
डोटासरा बोले- BJP की बढ़त सिमटकर 1% रह गई
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के मुताबिक दोनों पार्टियों के वोट शेयर में करीब एक फीसदी का ही अंतर रह गया। उन्होंने कहा कि एक समय भाजपा को कांग्रेस पर 8.12 प्रतिशत की बढ़त हासिल थी, लेकिन अब यह फासला काफी कम हो गया।
निकाय चुनावों में आमतौर पर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, लेकिन 2026 के नतीजों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और जनआक्रोश का संकेत दिया है।
भाजपाई सत्ता, प्रशासनिक मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो की पूरी ताकत लगाने के बावजूद कांग्रेस से वोट शेयर में महज 1% की… pic.twitter.com/wKSvLAFUMz
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) September 14, 2026
'शहरी इलाकों में गिरावट सरकार के लिए बड़ा संदेश'
हालांकि, उपलब्ध चुनाव नतीजों में भाजपा वार्डों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस से आगे रही। देर शाम की रिपोर्ट में भाजपा ने 4100 से अधिक वार्ड और कांग्रेस ने 3,500 से अधिक वार्ड जीते थे। कई निकायों में निर्दलीयों की संख्या भी निर्णायक स्थिति में पहुंची है।
डोटासरा ने बोर्ड के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने कहा कि अधिकांश निकायों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है और उसे निर्दलीय पार्षदों की जरूरत पड़ सकती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने वार्डों के नतीजों को भी अपने तर्क का आधार बनाया। उनका दावा है कि घोषित करीब 10 हजार वार्डों में बड़ी संख्या ऐसी है, जहां भाजपा उम्मीदवार जीत नहीं सके।
परिसीमन को लेकर भी भाजपा पर आरोप
'2028 के लिए मिल गया राजनीतिक संदेश'
उन्होंने दावा किया कि शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा के वोट शेयर में आई गिरावट भजनलाल सरकार के खिलाफ नाराजगी को दिखाती है। डोटासरा के मुताबिक निकाय चुनाव के नतीजों ने 2028 की राजनीतिक तस्वीर का संकेत अभी से दे दिया है।
हालांकि, निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे और मतदान का स्वरूप अलग होता है। स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड के मुद्दे और स्थानीय समीकरण भी नतीजों पर असर डालते हैं। ऐसे में 2026 के निकाय नतीजे 2028 के विधानसभा चुनाव में किस हद तक असर डालेंगे, यह आने वाले दो वर्षों की राजनीति और सरकार-विपक्ष की रणनीति पर भी निर्भर करेगा।
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