राजस्थान पंचायत चुनाव: पहले चरण की अधिसूचना जारी, आज से भरे जाएंगे नामांकन; 22 अक्टूबर को वोटिंग
Jageshwar prasad | Oct 08, 2026, 12:44 IST
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण की अधिसूचना जारी
राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों की शुरुआत हो गई है। पहला नामांकन चरण 13 अक्टूबर तक चलेगा, और मतदान 22 अक्टूबर को आयोजित होगा। राजनीतिक पार्टियां अभी से अपने उम्मीदवारों के चयन में व्यस्त हैं। स्थानीय मुद्दे जैसे विकास कार्य, कृषि और रोजगार चुनाव पर प्रभाव डालेंगे। सभी दल अपनी रणनीतियों को तैयार करने में लगे हैं।
प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का औपचारिक आगाज हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रथम चरण के पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के निर्वाचन के लिए यह नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके साथ ही आज से पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है।
गांवों की सरकार चुनने के लिए अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा-कांग्रेस समेत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने जनाधार को साधने की तैयारी तेज कर दी है। हर दल अपने प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुटा है।
क्या है राजस्थान
राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) की ओर से जारी प्रथम चरण कीअधिसूचना (First Phase Notification) के अनुसार में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए नामांकन पत्र 13 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक दाखिल किए जा सकेंगे।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 14 अक्टूबर को नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा होगी। इसके बाद प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेने का मौका दिया जाएगा। 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय सीमा तय की गई है।
नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रथम चरण के चुनाव का वास्तविक मुकाबला स्पष्ट हो जाएगा। प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में प्रचार अभियान को गति देंगे।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए प्रथम चरण का मतदान 22 अक्टूबर को होगा। मतदान कार्यक्रम के साथ ही गांवों में चुनावी सरगर्मी बढ़ने की उम्मीद है।
राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन से लेकर स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती होगी। पंचायत चुनाव में स्थानीय मुद्दों की भूमिका अहम रहने वाली है।
विकास कार्य, सड़क-पानी, बिजली, रोजगार, कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ ही गांवों में व्यक्तिगत और सामाजिक समीकरण भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित करेंगे। इसलिए दलों को स्थानीय स्तर पर गहराई से रणनीति बनानी होगी।
पहले चरण की अधिसूचना जारी होने के साथ ही अब पंचायत चुनाव (Panchayat Election) की रणभेरी बज चुकी है। नामांकन से लेकर नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन तक अगले कुछ दिन राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।
15 अक्टूबर के बाद तस्वीर साफ होगी कि पहले चरण में किस क्षेत्र में किसके बीच सीधा मुकाबला है। वैसे तो पंचायत चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है।
लेकिन निकाय चुनाव की तर्ज पर आरएलपी, आम आदमी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी सहित अन्य राष्ट्रीय और स्थानीय पार्टियां भी चुनावी मैदान में दमखम दिखाएंगी। इससे मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है।
अब सबकी निगाहें टिकट वितरण पर टिकी हैं। क्योंकि टिकट वितरण से उपजे असंतोष के बाद ही निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनावी बिसात बिछेगी। जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वे निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं।
इससे कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा। दलों को यह भी ध्यान रखना होगा कि असंतुष्ट नेता पार्टी को नुकसान न पहुंचाएं। इसलिए टिकट बंटवारे में संतुलन बनाना जरूरी होगा। अब देखना जरूरी है कि किस दल का टिकट वितरण कैसा रहता है।
पंचायतीराज चुनाव गांव के विकास की दिशा तय करते हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य गांव की योजनाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। इनका सीधा असर आम ग्रामीणों पर पड़ता है।
इसलिए यह चुनाव सभी दलों के लिए अहम हैं। पहले चरण की अधिसूचना से पूरी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब सभी दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। अगले कुछ दिनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
गांवों की सरकार चुनने के लिए अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा-कांग्रेस समेत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने-अपने जनाधार को साधने की तैयारी तेज कर दी है। हर दल अपने प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुटा है।
क्या है राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण का कार्यक्रम?
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 14 अक्टूबर को नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा होगी। इसके बाद प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेने का मौका दिया जाएगा। 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय सीमा तय की गई है।
नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रथम चरण के चुनाव का वास्तविक मुकाबला स्पष्ट हो जाएगा। प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में प्रचार अभियान को गति देंगे।
22 अक्टूबर को होगा मतदान
राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन से लेकर स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती होगी। पंचायत चुनाव में स्थानीय मुद्दों की भूमिका अहम रहने वाली है।
विकास कार्य, सड़क-पानी, बिजली, रोजगार, कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ ही गांवों में व्यक्तिगत और सामाजिक समीकरण भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित करेंगे। इसलिए दलों को स्थानीय स्तर पर गहराई से रणनीति बनानी होगी।
अब पंचायत चुनाव की रणभेरी बज चुकी है
15 अक्टूबर के बाद तस्वीर साफ होगी कि पहले चरण में किस क्षेत्र में किसके बीच सीधा मुकाबला है। वैसे तो पंचायत चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है।
लेकिन निकाय चुनाव की तर्ज पर आरएलपी, आम आदमी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी सहित अन्य राष्ट्रीय और स्थानीय पार्टियां भी चुनावी मैदान में दमखम दिखाएंगी। इससे मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है।
पंचायत चुनाव में रहेगी टिकट वितरण पर नजर
इससे कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा। दलों को यह भी ध्यान रखना होगा कि असंतुष्ट नेता पार्टी को नुकसान न पहुंचाएं। इसलिए टिकट बंटवारे में संतुलन बनाना जरूरी होगा। अब देखना जरूरी है कि किस दल का टिकट वितरण कैसा रहता है।
विकास की दिशा तय करते हैं पंचायत चुनाव
इसलिए यह चुनाव सभी दलों के लिए अहम हैं। पहले चरण की अधिसूचना से पूरी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब सभी दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। अगले कुछ दिनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
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