पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में सियासी घमासान, डोटासरा के आरोपों पर राठौड़ का पलटवार
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 05, 2026, 14:09 IST
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
पंचायत चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस नेताओं ने डीजीपी से मिलकर कई शिकायतें प्रस्तुत की हैं, जिससे राजस्थान की राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के इन कदमों को राजनीतिक स्टंट बताया और लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका चुनाव का हवाला देकर भाजपा की स्थिति को स्पष्ट किया।
समझें क्या है पूरा मामला
- पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
- कांग्रेस नेताओं ने DGP से मुलाकात कर चुनाव से जुड़ी शिकायतें रखीं।
- मदन राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक स्टंट बताया।
- राठौड़ ने लक्ष्मणगढ़ निकाय चुनाव के नतीजे को अपने तर्क का आधार बनाया।
- भाजपा की ओर से पंचायत चुनाव में संगठन और जनाधार मजबूत होने का दावा किया गया।
राठौड़ ने कांग्रेस की शिकायतों को राजनीतिक कदम बताते हुए कहा कि भाजपा ने हालिया निकाय चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि यदि भाजपा चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस एक वोट से जीत हासिल नहीं कर पाती।
डोटासरा के आरोपों पर राठौड़ का पलटवार
राठौड़ ने लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि डोटासरा के गृह क्षेत्र में कांग्रेस महज एक वोट से जीत हासिल कर पाई थी। उनके मुताबिक, अगर भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग किया होता तो वहां ऐसा चुनाव परिणाम सामने नहीं आता। यह तर्क देते हुए राठौड़ ने कांग्रेस पर अपने राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर सफाई देने का आरोप लगाया।
पंचायत चुनाव को लेकर भी निशाना
वहीं, कांग्रेस पहले से ही चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाती रही है। हाल के निकाय चुनावों के दौरान भी कांग्रेस ने पुलिस और प्रशासन के कथित हस्तक्षेप को लेकर आरोप लगाए थे, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कानून के मुताबिक कार्रवाई होने की बात कही थी।
पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
ऐसे में DGP से कांग्रेस नेताओं की मुलाकात और उसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में चुनाव प्रक्रिया, प्रशासन की भूमिका और स्थानीय स्तर पर संगठन की तैयारियां दोनों दलों के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बन सकती हैं।
गांव-गांव तक प्रधानमंत्री के सफर को पहुंचाने की तैयारी
बताया गया है कि इनमें 600 कार्यक्रम शहरों और 600 गांवों में होंगे। इसके लिए 50 टीमें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के बचपन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक के सफर को प्रस्तुत करेंगी।
कार्यक्रम की थीम ‘माटी रो सरदार, सेवा से संकल्प’ रखी गई है। इसके अलावा ‘सेवा स्मरण’ कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के जीवन, संघर्ष और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रसंगों को लोगों तक पहुंचाने की योजना है।
भाजपा की ओर से इसे संगठनात्मक और जनसंपर्क गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचायत चुनाव से पहले पार्टी केंद्र सरकार की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन से जुड़े संदेशों को भी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है।
कुल मिलाकर पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। चुनावी तैयारियों के साथ-साथ प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं।
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