दो से अधिक बच्चे वाले भी लड़ सकते है पंचायत-निकाय चुनाव, सरकार ने दिया लिखित जवाब

राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक योग्यता और संतान संबंधी प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार ने इस पर लिखित जवाब दिया है।

author-image
Ashish Bhardwaj
New Update
vidha

Photograph: (the sootr)

News In Short

  • पंचायत और निकाय चुनावों के लिए शैक्षिक योग्यता अनिवार्य करने का प्रावधान लागू नहीं होगा।
  • 2 से ज्यादा संतान वालों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक हटाने के लिए विधि विभाग में बिल प्रक्रियाधीन है।
  • 1994-95 में लागू किए गए नियम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
  • वसुंधरा राजे सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन संबंधी नियमों में भी राहत दी थी।
  • कांग्रेस के पूसाराम गोदारा के सवाल पर सरकार ने विधानसभा में लिखित जवाब दिया।

News In Detail

राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों में चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक योग्यता अनिवार्य नहीं होगी। साथ ही 2 से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने पर लगी रोक को हटाने के लिए विधि विभाग में बिल प्रक्रियाधीन है। सरकार ने पहली बार इन दोनों मुद्दों पर राज्य विधानसभा में लिखित रूप में जवाब दिया है।

शैक्षिक योग्यता पर कोई प्रस्ताव नहीं

कांग्रेस विधायक पूसाराम गोदारा ने विधानसभा में सरकार से सवाल पूछा था। उन्होंने सवाल किया कि राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए शैक्षिक योग्यता और संतान संबंधी प्रावधानों में संशोधन का विचार कर रही है। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 21 में शैक्षिक योग्यता के बारे में कोई प्रावधान नहीं है। इस मुद्दे पर संशोधन का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

दो से ज्यादा संतान  वाले भी लड़ सकते हैं चुनाव

सरकार ने इस बात पर भी स्पष्ट किया कि 1994-95 में लागू किए गए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम में दो से अधिक संतान वाले जनप्रतिनिधियों को पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान था। इसके अलावा, अगर किसी जनप्रतिनिधि के चुनाव जीतने के बाद तीसरा बच्चा होता तो उसे पद से हटा दिया जाता। अब इस प्रावधान में बदलाव के लिए विधि विभाग में बिल भेजा गया है, जो प्रक्रियाधीन है।

1994-95 में आई थी रोक

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994-95 के तहत यह नियम लागू किया गया था। जिन जनप्रतिनिधियों के दो से अधिक बच्चे होंगे, वे पंचायत और निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते। इसके साथ ही यह भी प्रावधान था कि यदि चुनाव जीतने के बाद तीसरा बच्चा होता तो उस जनप्रतिनिधि को पद से हटा दिया जाएगा। अब तक इस नियम में कोई शिथिलता नहीं दी गई है।

कर्मचारियों को मिली राहत

वर्ष 2002 में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह कानून लाया गया था कि अगर किसी कर्मचारी के दो से अधिक बच्चे हैं तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। अगर नौकरी के दौरान तीसरा बच्चा हो जाता तो उसका 5 साल तक प्रमोशन नहीं होता। लेकिन, वसुंधरा राजे सरकार ने 2018 में इस नियम को खत्म करने की घोषणा की थी और प्रमोशन पर लगने वाले प्रतिबंध को 5 साल से घटाकर 3 साल कर दिया था।

चुनाव प्रचार में लाउडस्पीकर के उपयोग पर पाबंदी

निकाय और पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों को अपने चुनाव कार्यालय में लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों से 100 मीटर की दूरी तक लाउडस्पीकर से प्रचार नहीं किया जा सकेगा। लाउडस्पीकर का उपयोग केवल सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक मजिस्ट्रेट की अनुमति से किया जा सकेगा। इसके अलावा, रैली निकालने से पहले भी उम्मीदवारों को मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

ये भी पढे़:-

अदालत का आदेश, फिर भी भ्रष्टाचार पर एक्शन नहीं, अब एसीबी डीआईजी होंगे हाई कोर्ट में हाजिर

भारत-अमेरिका ट्रेड राजस्थान के लिए होगा गेम चेंजर, देश अब आर्थिक शक्ति के रूप में बना रहा है पहचान - भजन लाल शर्मा

विश्वेन्द्र सिंह की बढ़ती भगवा निकटता, क्या बदलने वाले हैं राजस्थान के सियासी समीकरण?

आईआईटी बॉम्बे में राजस्थान के छात्र ने की खुदकुशी, आखिर क्यों टूट रहे हैं 'सुपर माइंड्स', जानें पूरा मामला

नगरपालिका कांग्रेस विधायक विधानसभा सरकार राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव
Advertisment