मौत के जबड़े से लौट आया राजस्थान का यह 'बाहुबली' किसान, 15 मिनट तक लेपर्ड से चला खूनी संघर्ष

Purshottam Kumar Joshi | Feb 07, 2026, 18:28 IST
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penthor alwar
Photograph: (the sootr)

यह जीवंत घटना राजस्थान में नारायणपुर की है। किसान श्रवण गुर्जन और पैंथर के बीच 15 मिनट तक खूनी जंग हुई। आखिरकार श्रवण मौत के जबड़े से जिंदा लौट आया। पैंथर वहीं ढेर हो गया।

News in Short

  • राजस्थान के नारायणपुर थाना क्षेत्र में 15 मिनट तक चला किसाान श्रवण और पैंथर का संघर्ष।
  • झाड़ियों में घात लगाए बैठे पैंथर ने खेत में गए 52 साल के श्रवण पर अचानक हमला बोला।
  • पैंथर ने गर्दन पर दांत गड़ाने की कोशिश की, लेकिन श्रवण ने हाथों को गर्दन के आगे अड़ा दिया।
  • जमीन लहूलुहान हो चुकी थी, लेकिन किसान की सांसें हार मानने को तैयार नहीं थीं।
  • श्रवण ने पूरी ताकत से पैंथर के सिर पर वार किया और वन्यजीव वहीं ढेर हो गया।
सुनील जैन @ अलवर

News in Detail

राजस्थान की वीर धरा से साहस और शौर्य की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन शनिवार सुबह कोटपूतली-बहरोड़ जिले में नारायणपुर थाना क्षेत्र के खरकड़ी कला गांव में जो हुआ, उसने रोंगटे खड़े कर दिए। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है एक 52 वर्षीय किसान की जीवटता की, जिसने मौत को करीब से देखा और उसे मात देकर वापस लौट आया। जिंदगी और मौत के बीच करीब 15 मिनट तक चले इस संघर्ष में एक तरफ जंगल का खूंखार शिकारी 'पैंथर' था, तो दूसरी तरफ अपने परिवार का पेट पालने वाला निहत्था किसान श्रवण गुर्जर। अंत में जीत श्रवण के हौसले की हुई।

​अचानक हुआ मौत का हमला​

शनिवार सुबह करीब 7:00 बजे का वक्त था। गांव में चारों तरफ शांति थी। 52 वर्षीय श्रवण गुर्जर रोज़ की तरह अपने खेत पर पेड़ की टहनियां (डाली) काटने गए थे। वे जैसे ही पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करने लगे, तभी पास की झाड़ियों में घात लगाकर बैठे पैंथर ने उन पर बिजली की रफ्तार से हमला कर दिया।
​पैंथर ने श्रवण को संभलने का मौका तक नहीं दिया। उसने उन्हें दबोच लिया और झाड़ियों की तरफ काफी दूर तक घसीटते हुए ले गया। जंगल का नियम है कि शिकारी सबसे पहले गर्दन पर वार करता है, और यहाँ भी पैंथर की नजर श्रवण की गर्दन पर ही थी।

​रणनीति: जब ढाल बने किसान के हाथ

​घायल अवस्था में भी श्रवण ने हिम्मत नहीं हारी। उन्हें पता था कि अगर पैंथर ने गर्दन पकड़ ली, तो खेल खत्म हो जाएगा। पैंथर ने बार-बार गर्दन पर दांत गड़ाने की कोशिश की, लेकिन श्रवण ने अपनी सूझबूझ से दोनों हाथों को अपनी गर्दन के आगे अड़ा दिया।
​पैंथर उनके पैर, जांघ, पीठ और हाथों को अपने नुकीले पंजों और दांतों से छलनी कर रहा था, लेकिन श्रवण किसी चट्टान की तरह डटे रहे। यह संघर्ष करीब 10 से 15 मिनट तक चलता रहा। जमीन लहूलुहान हो चुकी थी, लेकिन किसान की सांसें हार मानने को तैयार नहीं थीं।

​शोर, साहस और पैंथर का अंत​

श्रवण की चीख-पुकार सुनकर पास के खेत में काम कर रहे कैलाश वहां दौड़कर पहुंचे। कैलाश ने शोर मचाना शुरू किया, जिससे पैंथर का ध्यान थोड़ा भटका। यही वह पल था जब मौत के साये में दबे श्रवण को जिंदगी की उम्मीद दिखी। जैसे ही पैंथर की पकड़ ढीली हुई, श्रवण ने अपनी पूरी ताकत बटोरकर पैंथर के सिर पर जोरदार वार किया। वार इतना सटीक और शक्तिशाली था कि खूंखार शिकारी वहीं ढेर हो गया।

दहशत और इलाज की जद्दोजहद

​घटना के बाद ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लहूलुहान श्रवण को तुरंत नारायणपुर CHC ले जाया गया। उनके शरीर पर गहरे घाव थे और काफी खून बह चुका था, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अलवर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

​वन विभाग की कार्रवाई और ग्रामीणों में रोष

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची। फोरेस्टर मनोज नागा ने पुष्टि की है कि पैंथर की मौत हो चुकी है। विभाग इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पैंथर की आवाजाही लंबे समय से बनी हुई है। वन विभाग को बार-बार सूचित करने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। किसानों को अब अपने ही खेतों में जाने से डर लग रहा है।

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