श्रीअन्न योजना की अनदेखी: सरकारी बैठकों और आयोजनों में नहीं किया जा रहा श्रीअन्न का उपयोग
Purshottam Kumar Joshi | Jan 20, 2026, 18:22 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में श्रीअन्न के प्रचार के लिए जारी आदेशों की पालना नहीं हो रही है। सरकारी बैठकों में बाजरे से बने उत्पाद परोसने का आदेश धरा रह गया है। बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जिलों में अमल में नहीं लाया जा रहा आदेश।
News In Short
- राजस्थान में श्रीअन्न (मिलेट्स) के प्रचार के आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
- सरकारी बैठकों में कचौरी-समोसा की जगह बाजरे से बने उत्पाद परोसे जाने थे।
- बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर में बाजरे की पैदावार, लेकिन आदेशों का पालन नहीं।
- डाक बंगले और सर्किट हाउस में भी बाजरे से बने व्यंजन नहीं परोसे जा रहे।
- राज्य सरकार ने श्रीअन्न के प्रचार के लिए प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की घोषणा की थी।
News In Detail
श्रीअन्न के आदेश की अवेहलना
बाजरे का प्रोत्साहन क्यों नहीं हो रहा
श्रीअन्न के प्रचार की योजना
नया कदम, पुरानी नीतियों का पालन क्यों नहीं
श्रीअन्न के लाभ
मुख्य बिंदु:
- राजस्थान सरकार ने दिसंबर 2024 में श्री अन्न के प्रचार के लिए एक प्रमोशन एजेंसी स्थापित करने की घोषणा की थी और सरकारी कार्यक्रमों में मिलेट्स से बने उत्पादों को शामिल करने का आदेश जारी किया था।
- आदेश के बावजूद, सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में बाजरे से बने उत्पादों को परोसा नहीं जा रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।
- श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषण से भरपूर होते हैं और स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह भारत में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण फसल है, जो उनके आय को बढ़ाने में मदद कर सकती है।
श्री अन्न योजना का शुभारंभ
योजना का उद्देश्य
पोषण सुरक्षा: एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए नागरिकों की थाली में पोषक तत्वों से भरपूर बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाजों को वापस लाना।
किसानों की आय: मोटे अनाज कम पानी और विषम जलवायु में भी उग सकते हैं, जिससे छोटे किसानों की लागत कम होती है और आय बढ़ती है।
अनुसंधान को बढ़ावा: भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान हैदराबाद (IIMR) को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में बढ़ावा देना ताकि नई तकनीकों का विकास हो सके।
श्रीअन्न योजना को लेकर नियम और शर्तें
क्षेत्रीय चयन: कई राज्यों (जैसे ओडिशा) में ब्लॉक स्तर पर कम से कम 1000 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके तहत कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
लाभार्थी: इसमें मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों (WSHGs) और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रोत्साहन: मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार लिंक के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा दी जाती है।
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