राजस्थान में 11 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन रोका, अब फिर 20% कटौती, ₹50 करोड़ के स्टोरेज प्रोजेक्ट पर सवाल
Raghvendra Singh Rathore | Oct 23, 2026, 20:04 IST
राजस्थान में सोलर बिजली पर 20% कटौती, 11 करोड़ यूनिट उत्पादन रोका, ₹50 करोड़ के स्टोरेज टेंडर पर सवाल
राजस्थान में सोलर और पवन बिजली उत्पादन पर फिर 20 प्रतिशत कटौती के निर्देश दिए गए हैं। सितंबर में भी प्रदेश में 11 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन रोका गया था। जयपुर डिस्कॉम के ₹50.40 करोड़ के बैटरी स्टोरेज टेंडर के बीच बिजली भंडारण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जानिए किसानों और आम जनता पर संभावित असर।
राजस्थान में एक तरफ सरकार सोलर बिजली बढ़ाने के लिए नई योजनाएं चला रही है, दूसरी तरफ पहले से लगे सोलर प्लांटों को बिजली उत्पादन घटाने के आदेश दिए जा रहे हैं। प्रदेश में दिन के समय इतनी सोलर बिजली उपलब्ध हो रही है कि उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। वहीं, शाम के समय बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टोरेज व्यवस्था नहीं है।
राज्य भार प्रेषण केंद्र (SLDC) ने सोलर और पवन ऊर्जा उत्पादकों को तत्काल प्रभाव से उत्पादन में 20 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए। बिजली की मांग कम होने और ग्रिड में बिजली की अधिकता को इसकी वजह बताया गया है।
इस बीच एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज सामने आया है। जयपुर विद्युत वितरण निगम ने जुलाई 2026 में बैटरी स्टोरेज परियोजना के लिए ₹50.40 करोड़ का टेंडर जारी किया था। इस परियोजना के लिए 270 दिन की कार्य अवधि निर्धारित है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राजस्थान में बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, तो उसे बचाकर रखने की व्यवस्था किस रफ्तार से तैयार हो रही है?
राजस्थान में बिजली उत्पादन घटाने की समस्या कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा सितंबर के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। ऊर्जा क्षेत्र की शोध संस्था JMK Research & Analytics ने ग्रिड-इंडिया के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इसके मुताबिक सितंबर 2026 में देशभर में 37.85 करोड़ यूनिट सोलर और पवन बिजली का उत्पादन रोका गया।
इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 11 करोड़ यूनिट रही। यानी देशभर में रोके गए कुल उत्पादन का करीब 29.1 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का था। खास बात यह है कि राजस्थान में रोका गया यह पूरा उत्पादन सोलर बिजली का था। गुजरात के बाद राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल रहा।
जयपुर डिस्कॉम ने 15 जुलाई 2026 को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए टेंडर जारी किया था। सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक टेंडर की अनुमानित कीमत ₹50 करोड़ 40 लाख है। इसमें बैटरी स्टोरेज सिस्टम के साथ 15 साल तक संचालन और रखरखाव का प्रावधान है।
टेंडर में कार्य अवधि 270 दिन दर्ज है। इसकी तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया के लिए अगस्त में निर्धारित तारीखों का भी उल्लेख है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम की मदद से दिन में बनी अतिरिक्त सोलर बिजली को जमा करके शाम के समय इस्तेमाल किया जा सकता है।
18 हजार
राजस्थान में करीब 18 हजार मेगावाट सोलर बिजली उत्पादन क्षमता चालू होने की बात सामने आई है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के मुताबिक करीब 10 हजार मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं उत्पादन कटौती से प्रभावित हो रही हैं। सोलर कंपनियों की चिंता है कि बार-बार उत्पादन घटाने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है, जबकि प्लांट चलाने और बैंक का कर्ज चुकाने का खर्च बना रहता है।
राजस्थान में पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर बिजली उत्पादन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। योजना के कंपोनेंट-A में किसान या अन्य पात्र भागीदार सोलर प्लांट लगाकर बिजली वितरण कंपनी को बिजली बेच सकते हैं। वहीं, कंपोनेंट-C में कृषि फीडरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने की व्यवस्था भी शामिल है।
ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या उत्पादन घटाने का आदेश पीएम-कुसुम योजना से जुड़े सोलर प्लांटों पर भी लागू हुआ है? यदि इन प्लांटों को बिजली उत्पादन कम करना पड़ता है, तो बिजली बेचने से होने वाली कमाई प्रभावित हो सकती है।
राजस्थान में सोलर बिजली उत्पादन पर कटौती का आदेश आने के बाद आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल बिजली के खर्च का है। दिन में धूप के कारण सोलर बिजली का उत्पादन अधिक होता है। लेकिन शाम को सूरज ढलने के बाद भी घरों, दुकानों और उद्योगों को बिजली की जरूरत रहती है।
यदि दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सोलर बिजली को स्टोर नहीं किया जा सके, तो शाम के समय बिजली कंपनियों को दूसरे स्रोतों से बिजली लेनी पड़ सकती है। इसमें कोयला आधारित बिजलीघरों और बिजली बाजार से खरीद शामिल हो सकती है।
सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनियां परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं। इनमें से कई परियोजनाएं बैंक कर्ज से भी तैयार होती हैं। बिजली उत्पादन कम होने से कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी समय 2,000 मेगावाट उपलब्ध उत्पादन को चार घंटे तक रोका जाए और बिजली की बिक्री दर तीन रुपए प्रति यूनिट मानी जाए, तो उस बिजली का बिक्री मूल्य करीब 24 करोड़ रुपए होगा।
ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली संस्था समता पावर के निदेशक डी.डी. अग्रवाल ने बैटरी स्टोरेज व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। उनके मुताबिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम बिजली उत्पादन और मांग के बीच अंतर कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन स्टोरेज परियोजनाओं को शुरू करने में देरी के कारण समस्या बनी हुई है।
उन्होंने ताप बिजलीघरों की तकनीकी सीमाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। इन बिजलीघरों का उत्पादन मांग के अनुसार तुरंत बंद या शुरू करना आसान नहीं होता।
सोलर कंपनियों से जुड़े प्रतिनिधियों को आशंका है कि सर्दियों में दिन के समय बिजली की मांग कम होने पर उत्पादन कटौती की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में दिन के समय बिजली की खपत बढ़ाने पर भी विचार करने की जरूरत बताई जा रही है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने गुजरात की तर्ज पर कृषि क्षेत्र में दिन के समय बिजली की खपत बढ़ाने का सुझाव दिया है। इससे अतिरिक्त सोलर बिजली का उपयोग बढ़ सकता है।
सोलर प्लांट बढ़ रहे, लेकिन बिजली इस्तेमाल करने की चुनौती
राजस्थान में सोलर बिजली उत्पादन की क्षमता लगातार बढ़ रही है। लेकिन केवल नए प्लांट लगाने से बिजली व्यवस्था मजबूत नहीं होगी। जरूरी है कि बिजली बनाने के साथ उसे स्टोर करने, जरूरत वाली जगह तक पहुंचाने और सही समय पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी तैयार हो।
सितंबर में 11 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन रोका जाना और अक्टूबर में फिर 20 प्रतिशत कटौती का निर्देश सामने आना इसी चुनौती की ओर इशारा करता है।अब सवाल यह है कि सरकार नई सोलर परियोजनाओं के साथ बैटरी स्टोरेज और बिजली नेटवर्क को कितनी तेजी से मजबूत कर पाती है।
राज्य भार प्रेषण केंद्र (SLDC) ने सोलर और पवन ऊर्जा उत्पादकों को तत्काल प्रभाव से उत्पादन में 20 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए। बिजली की मांग कम होने और ग्रिड में बिजली की अधिकता को इसकी वजह बताया गया है।
इस बीच एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज सामने आया है। जयपुर विद्युत वितरण निगम ने जुलाई 2026 में बैटरी स्टोरेज परियोजना के लिए ₹50.40 करोड़ का टेंडर जारी किया था। इस परियोजना के लिए 270 दिन की कार्य अवधि निर्धारित है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राजस्थान में बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, तो उसे बचाकर रखने की व्यवस्था किस रफ्तार से तैयार हो रही है?
सितंबर में ही 11 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन रोका गया
इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 11 करोड़ यूनिट रही। यानी देशभर में रोके गए कुल उत्पादन का करीब 29.1 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान का था। खास बात यह है कि राजस्थान में रोका गया यह पूरा उत्पादन सोलर बिजली का था। गुजरात के बाद राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल रहा।
₹50.40 करोड़ का बैटरी स्टोरेज टेंडर, कब मिलेगी राहत?
टेंडर में कार्य अवधि 270 दिन दर्ज है। इसकी तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया के लिए अगस्त में निर्धारित तारीखों का भी उल्लेख है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम की मदद से दिन में बनी अतिरिक्त सोलर बिजली को जमा करके शाम के समय इस्तेमाल किया जा सकता है।
18 हजार मेगावाट क्षमता, करीब 10 हजार मेगावाट पर असर
पीएम-कुसुम योजना से जुड़े किसानों की कमाई पर क्या असर?
ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या उत्पादन घटाने का आदेश पीएम-कुसुम योजना से जुड़े सोलर प्लांटों पर भी लागू हुआ है? यदि इन प्लांटों को बिजली उत्पादन कम करना पड़ता है, तो बिजली बेचने से होने वाली कमाई प्रभावित हो सकती है।
क्या आम जनता के बिजली बिल बढ़ेंगे?
यदि दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सोलर बिजली को स्टोर नहीं किया जा सके, तो शाम के समय बिजली कंपनियों को दूसरे स्रोतों से बिजली लेनी पड़ सकती है। इसमें कोयला आधारित बिजलीघरों और बिजली बाजार से खरीद शामिल हो सकती है।
बिजली उत्पादन घटने से कंपनियों को कितना नुकसान?
उदाहरण के लिए, यदि किसी समय 2,000 मेगावाट उपलब्ध उत्पादन को चार घंटे तक रोका जाए और बिजली की बिक्री दर तीन रुपए प्रति यूनिट मानी जाए, तो उस बिजली का बिक्री मूल्य करीब 24 करोड़ रुपए होगा।
समता पावर के निदेशक ने बताई स्टोरेज की कमी
उन्होंने ताप बिजलीघरों की तकनीकी सीमाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। इन बिजलीघरों का उत्पादन मांग के अनुसार तुरंत बंद या शुरू करना आसान नहीं होता।
सर्दियों में बढ़ सकती है परेशानी
उद्योग प्रतिनिधियों ने गुजरात की तर्ज पर कृषि क्षेत्र में दिन के समय बिजली की खपत बढ़ाने का सुझाव दिया है। इससे अतिरिक्त सोलर बिजली का उपयोग बढ़ सकता है।
सोलर प्लांट बढ़ रहे, लेकिन बिजली इस्तेमाल करने की चुनौती
राजस्थान में सोलर बिजली उत्पादन की क्षमता लगातार बढ़ रही है। लेकिन केवल नए प्लांट लगाने से बिजली व्यवस्था मजबूत नहीं होगी। जरूरी है कि बिजली बनाने के साथ उसे स्टोर करने, जरूरत वाली जगह तक पहुंचाने और सही समय पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी तैयार हो।
सितंबर में 11 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन रोका जाना और अक्टूबर में फिर 20 प्रतिशत कटौती का निर्देश सामने आना इसी चुनौती की ओर इशारा करता है।अब सवाल यह है कि सरकार नई सोलर परियोजनाओं के साथ बैटरी स्टोरेज और बिजली नेटवर्क को कितनी तेजी से मजबूत कर पाती है।
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