वन अधिकार पट्टों के 66 हजार आवेदन खारिज, पांच जिले में एक भी पट्टा नहीं, सरकार का दोबारा समीक्षा करने से इनकार
Mukesh Sharma | Apr 03, 2026, 20:19 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में आदिवासियों के वन अधिकार पट्टों पर अघोषित ब्रेक लगा दिया है। सरकार ने 66213 आदिवासियों के आवेदन खारिज कर दिए। गंभीर तथ्य यह रहा कि पांच जिलों में एक भी पट्टा नहीं दिया गया।
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- राजस्थान में 66000 से अधिक आदिवासियों के वन अधिकार दावे खारिज।
- आदिवासी जिले प्रतापगढ़ में सर्वाधिक 22 हजार से अधिक दावे हुए खारिज।
- प्रदेश के पांच जिलों में आदिवासियों को एक भी पट्टा आवंटित नहीं।
- राजस्थान सरकार का खारिज आवेदनों पर फिर से विचार करने से इनकार।
- आदिवासी संगठनों ने खारिज दावों की फिर से समीक्षा करने की लगाई गुहार।
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इसका सीधा अर्थ है कि हजारों परिवार अब अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर अतिक्रमी माने जाने के डर में जीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि जयपुर, अलवर और टोंक जैसे 5 जिलों में तो एक भी आदिवासी को वन अधिकार पट्टा नसीब नहीं हुआ।
जंगल सिर्फ जमीन नहीं
प्रतापगढ़ जैसे जिलों में सबसे अधिक 33244 आवेदन आए, लेकिन वहां 22 हजार से अधिक परिवारों के दावों को खारिज कर दिया गया। प्रतापगढ़ प्रदेश का सर्वाधिक आदिवासी क्षेत्र माना जाता है। एक आदिवासी नेता के अनुसार हमारे लिए कानून का क्रियान्वयन धरातल पर जटिल और चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
समीक्षा भी नहीं करेगी सरकार
भारतीय ट्राईबल पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम का आरोप है कि सरकार का यह रवैया उन हजारों आदिवासियों के लिए दरवाजे बंद करने जैसा है, जो प्रशासनिक जटिलताओं या दस्तावेजी साक्ष्यों की कमी से अपना हक साबित नहीं कर पाए। महाराष्ट्र में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए खारिज दावों को दोबारा खोलने के उपाय किए हैं। लेकिन, हमारी राजस्थान सरकार ने आदिवासी वर्ग में असुरक्षा और बेदखली का भय पैदा कर दिया है।
संविधानिक अधिकार का हनन
वेलाराम के अनुसार सरकार इन खारिज किए गए दावों की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा नहीं करती है तो यह वन अधिकार कानून की मूल भावना को कमजोर करेगा। साथ ही आदिवासियों को उनके प्राकृतिक संसाधनों से दूर कर उन्हें गरीबी और विस्थापन की आग में झोंक देगा।
ऐसी है खारिज पट्टों की स्थिति
प्रतापगढ़ जिले में प्रदेश के सबसे ज्यादा 33244 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से केवल 10223 को मंजूरी मिली और 22568 आवेदन खारिज कर दिए। इसी तरह बांसवाड़ा में 28435 आवेदन आए। इनमें से 15551 को पट्टे दिए और 12650 को रद्ध कर दिया है।
उदयपुर में 22533 आवेदनों में से 12758 को हक मिला। इसके उलट 9775 आवेदन खारिज हुए। डूंगरपुर में 13063 आवेदनों में से 6599 को पट्टे मिले और 6,464 खारिज हुए। बारां जिले में 8925 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से मात्र 1581 स्वीकृत हुए तथा 7344 खारिज हुए। सिरोही में 5768 आवेदनों में से 3422 को मंजूरी मिली।
चित्तौड़गढ़ में 1156 आवेदनों में से 457 को पट्टे मिले। राजसमंद में 1083 आवेदनों में से 260 , पाली में 1546 में से 614 और भीलवाड़ा में 534 आवेदन में से 122 स्वीकृत हुए। इसी तरह कोटा में 433 आवेदन में से 86, झालावाड़ में 302 आवेदन में से 88 और बूंदी में 567 आवेदन में से केवल 14 आवेदन मंजूर हुए हैं।
शून्य पट्टा वितरण वाले जिले
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