राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले MLA भाटी का EWS दांव, क्या हैं इसके सियासी मायने?
Saurabh Mishra | Sept 26, 2026, 17:32 IST
पंचायत चुनाव से पहले भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की है। जमीन, सर्टिफिकेट और राजनीतिक प्रतिनिधित्व समेत कई मांगें उठाई हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- पंचायत चुनाव से पहले भाटी ने EWS सरलीकरण यात्रा शुरू की।
- EWS पात्रता में जमीन के मौजूदा नियम बदलने की मांग उठाई।
- सर्टिफिकेट की वैधता तीन से पांच साल करने की मांग की।
- भाटी के मुताबिक 75 से ज्यादा विधायकों ने समर्थन दिया।
- पंचायती राज संस्थाओं में EWS प्रतिनिधित्व की मांग भी उठाई।
विधायक भाटी जमीन की सीमा, EWS सर्टिफिकेट की वैधता, केंद्र और राज्य में अलग-अलग नियम, प्रतियोगी परीक्षाओं में छूट और पंचायती राज संस्थाओं में ईडब्ल्यूएस प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठा रहे।
निर्दलीय विधायक रवींद्र भाटी ने शुरू की EWS सरलीकरण यात्रा
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बाड़मेर से निकली यात्रा, निशाने पर EWS के नियम
उनका कहना है कि EWS का फायदा जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव जरूरी है। खास तौर पर केंद्र सरकार की 5 एकड़ कृषि भूमि वाली शर्त पर उन्होंने सवाल उठाया।
सरलीकरण यात्रा के दौरान जसोल स्थित मां माजीसा राणी भटियाणी सा के मंदिर में दर्शन कर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मां माजीसा से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।#सरलीकरण pic.twitter.com/kJXzgNTLPq
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EWS आरक्षण में 5 एकड़ जमीन के नियम पर सवाल उठाए
उनकी मांग है कि EWS पात्रता में जमीन का सिर्फ रकबा नहीं देखा जाए। जमीन की पैदावार, सिंचाई की सुविधा, स्थानीय बाजार भाव और उससे होने वाली वास्तविक आमदनी को भी आधार बनाया जाए।
“सरलीकरण-हकदारों के सपनों की मुहीम”
सरलीकरण की मुहीम आज से शुरू होने वाली कोई नई पहल नहीं है। यह एक लंबे समय से चली आ रही मुहीम है, जिसके तहत राजस्थान में सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम संभव हुए हैं।
विधानसभा और… pic.twitter.com/0foWLeD900
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राजस्थान में 2019 से मिल रहा 10% EWS आरक्षण
राजस्थान सरकार ने 19 फरवरी 2019 को सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए EWS को 10% आरक्षण देने की अधिसूचना जारी की थी। शुरुआत में परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम होने के साथ जमीन, फ्लैट और आवासीय प्लॉट से जुड़ी शर्तें भी लगाई गई थीं। लेकिन कुछ महीने बाद राजस्थान ने अपने नियम बदल दिए।
“सरलीकरण-हकदारों के सपनों की मुहीम”
सरलीकरण की मुहीम आज से शुरू होने वाली कोई नई पहल नहीं है। यह एक लंबे समय से चली आ रही मुहीम है, जिसके तहत राजस्थान में सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम संभव हुए हैं।
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पांच एकड़ जमीन का सवाल क्यों उठा रहे भाटी?
केंद्रीय नियमों में 5 एकड़ या उससे ज्यादा कृषि भूमि रखने वाला परिवार EWS के दायरे से बाहर हो सकता। इसी तरह तय सीमा से बड़ा फ्लैट या आवासीय प्लॉट होने पर भी पात्रता प्रभावित होती। यानी राजस्थान की राज्य भर्ती में जो व्यक्ति EWS के लिए पात्र हो सकता है, जरूरी नहीं कि केंद्रीय भर्ती में भी उन्हीं शर्तों पर पात्र हो। भाटी इसी अंतर को खत्म करने की मांग कर रहे। उनका कहना है कि केंद्र के नियम बनाते समय राज्यों की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
EWS व्यवस्था के सरलीकरण को लेकर यात्रा करेंगे रविंद्र सिंह भाटी!
EWS व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार और युवाओं को अधिक अवसर देने की मांग को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी देशभर में आवाज उठाने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक भविष्य को लेकर भी उनके अगले कदम पर नजरें टिकी हैं। pic.twitter.com/YFU8I7w2Db
— Rajput of भारत (@rajput_of_bihar) September 22, 2026
एक ही EWS सर्टिफिकेट की मांग कर रहे विधायक भाटी
भाटी का तर्क है कि युवाओं को बार-बार प्रमाण-पत्र बनवाने और दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने विवाहित महिलाओं के लिए आय और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े नियमों को आसान करने की बात भी कही है।
भर्ती में उम्र और फीस में भी चाहते हैं राहत
इन मांगों में कुछ केंद्र सरकार से जुड़ी हैं तो कुछ पर राज्य सरकार के स्तर पर फैसला हो सकता है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में लोकसभा में बताया था कि मौजूदा EWS आरक्षण प्रावधानों में संशोधन का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
पंचायत चुनाव से जुड़ता है प्रतिनिधित्व का सवाल
उनका तर्क है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए पंचायत चुनाव लड़ना भी आसान नहीं है। चुनावी खर्च के बीच कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों की राजनीतिक भागीदारी कैसे बढ़े, इस सवाल को भी उन्होंने अपनी यात्रा से जोड़ा है।पंचायतों में EWS के लिए अलग राजनीतिक आरक्षण अभी मौजूदा व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। भाटी इसे नई मांग के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।
75 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा
निकाय चुनाव में निर्दलीयों का असर नजर आया
लेकिन इन नतीजों को सीधे पंचायत चुनाव से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। शहर और गांव के चुनाव में मुद्दे, उम्मीदवार और सामाजिक समीकरण अलग हो सकते हैं। इतना जरूर है कि निकाय चुनाव ने दिखाया है कि स्थानीय चुनावों में पार्टी के बाहर के उम्मीदवारों के लिए भी जगह बनी हुई है।
भाटी खुद निर्दलीय विधायक हैं। इसलिए पंचायत चुनाव से ठीक पहले उनकी गांवों में बढ़ती सक्रियता पर भाजपा और कांग्रेस के साथ दूसरे राजनीतिक समूहों की नजर रहना स्वाभाविक है।
EWS के बहाने गांवों तक पहुंच रहे भाटी
यह यात्रा उन्हें अपनी विधानसभा सीट से बाहर पश्चिमी राजस्थान के दूसरे इलाकों में लोगों से संवाद का मौका दे रही है। इसमें नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े युवा हैं तो जमीन की शर्त से प्रभावित ग्रामीण परिवार भी।
अब असली सवाल यह है कि यात्रा के बाद EWS की इन मांगों पर राज्य सरकार क्या रुख अपनाती है? पंचायत चुनाव में इसका कोई असर पड़ता है या नहीं, इसका जवाब उम्मीदवारों और नतीजों के बाद ही मिलेगा।
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