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Photograph: (the sootr)
News In Short
- 25 फरवरी को विधानसभा के घेराव की घोषणा
- भरतपुर से जयपुर तक आरक्षण संघर्ष समिति की जन अधिकार यात्रा
- 2023 में भी किया था आंदोलन,सात दिन तक बंद रखा था हाईवे
- सरकार पर लगातार उपेक्षा का आरोप
News In Detail
राजस्थान में आरक्षण आंदोलन नया नहीं है। पिछले करीब 30 साल से राजस्थान में अलग-अलग जातियों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किए हैं। इनमें सबसे जर्बदस्त आंदोलन गुर्जर समाज ने किए, जिसमें एक महीने से भी ज्यादा समय तक हाईवे और रेल पटरियां रोकी गईं। पुलिस की गोली से 100 से ज्यादा लोग मारे गए। जातीय तनाव चरम पर पहुंच गया।
अंतत:झुकना पड़ा है सरकारों को
आरक्षण आंदोलनो की विशेषता यह रही है कि अंतत: सरकारों को आरक्षण की मांग के समक्ष घुटने टेकने ही पड़े हैं। इसी कड़ी में माली-सैनी समाज ने अलग से 12 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर पुन: आंदोलन शुरु कर दिया है। समाज ने 2023 में भी आंदोलन किया था और भरतपुर में सात दिन तक हाईवे रोका था। माली-सैनी समाज अभी ओबीसी में आता है। राजस्थान में ओबीसी का 21 फीसदी आरक्षण है ।
अभी यह है राजस्थान में आरक्षण
राजस्थान में वर्तमान में कुल 64 प्रतिशत आरक्षण है।
एससी-16
एसटी-12
ओबीसी-21
एमबीसी-5
आर्थिक पिछड़े-10
दो बार रद्ध हो चुका है गुर्जर आरक्षण
राजस्थान में गुर्जर समुदाय ओबीसी में आता है। उन्हें विशेष पिछड़ा वर्ग में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया और दो बार यह आरक्षण हाई कोर्ट ने रद्ध कर दिया था। हाई कोर्ट के इन आदेश के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। 2019 में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनने पर गुर्जरों को तीसरी बार 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। तीसरी बार भी इस आरक्षण को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और दोनों जगहों पर याचिका लंबित है।
जयपुर आ रही है जन अधिकार यात्रा
आरक्षण संघर्ष समिति राजस्थान के आह्वान पर माली, सैनी, कुशवाह, शाक्य, मौर्य व सुमन समाज के सैकड़ों लोग 11 सूत्री मांग के लिए भरतपुर जिले के गांव मूड़िया गंधार से जयपुर तक जन अधिकार यात्रा पर हैं। समाज ने 25 फरवरी को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है।
शनिवार शाम यात्रा के मानपुर पहुंचने पर राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। रात्रि विश्राम मानपुर में है। रविवार सुबह यात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी। प्रदेशाध्यक्ष चंद्रप्रकाश (सीपी) सैनी के नेतृत्व में निकली यात्रा में शामिल लोगों ने सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
सरकार नहीं कर रही है सुनवाई
सीपी सैनी का कहना है कि अलग से 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग सरकार तक कई बार पहुंचाई जा चुकी है। लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही है। उन्होंने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। सैनी ने कहा है कि जयपुर कूच पूरी तरह लोकतांत्रिक व शांति से कर रहे हैं,लेकिन प्रशासन ने रोका तो समाज बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
2023 में भी हुआ था आंदोलन
माली समाज ने वर्ष 2023 में भी अलग से 12 प्रतिशत आरक्षण के लिए आंदोलन किया था। उस दौरान हलैना के पास बेरी गांव में जयपुर-भरतपुर हाईवे सात दिन तक बंद रहा था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने फुले व लवकुश बोर्ड गठन करने,11 अप्रेल को महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर अवका, विश्वविद्यालयों में फुले पीठ की स्थापना करने तथा फल-सब्जी विक्रेताओं के लिए वेंडिंग जोन बनाने जैसी घोषणाएं की थीं।
यह हैं प्रमुख मांग
समिति ने अलग से 12 फीसदी आरक्षण, महात्मा फुले व लवकुश बोर्ड को वित्तीय अधिकार, संत लिखमीदास जन्मस्थली को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा, सैनी रेजीमेंट गठन, महात्मा ज्योतिबा फुले को भारत रत्न,2023 के आंदोलन से जुड़े मुकदमे वापस लेना, एससी-एसटी की तर्ज पर विशेष कानून, फुले दंपती संग्रहालय निर्माण, बागवानी बोर्ड गठन, महात्मा फुले फाउंडेशन की स्थापना और फल-सब्जी मंडियों में समाज को प्राथमिकता से दुकान आवंटन शामिल हैं।
रमेश सैनी ने बताया कि यात्रा 22 फरवरी को दौसा,23 को बस्सी और 24 को जयपुर विश्राम घाट पहुंचेगी। 25 फरवरी को विधानसभा घेराव किया जाएगा। यात्रा मार्ग पर पुलिस की कड़ी व्यवस्था की गई है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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