डीम्ड फॉरेस्ट को बेचने पर तुला रीको, जयपुर कलक्टर ने भी कानून के विपरीत पक्ष में खोला म्यूटेशन

Mukesh Sharma | Oct 05, 2026, 14:58 IST
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जयपुर कलक्टर ने कानूनी स्थिति जानते हुए भी डीम्ड फॉरेस्ट का म्यूटेशन रीको के पक्ष में करने के आदेश दिए
जयपुर कलक्टर ने कानूनी स्थिति जानते हुए भी डीम्ड फॉरेस्ट का म्यूटेशन रीको के पक्ष में करने के आदेश दिए

जयपुर कलक्टर ने डीम्ड फारेस्ट का म्यूटेशन रीको के नाम करने का आदेश दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करता है। रीको ने दो बार नीलामी की कोशिश की, लेकिन उसे स्थगित करना पड़ा। भू-उपयोग में इस बदलाव से पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। हाल में, रीको ने नीलामी रद्द कर दी ।

राजस्थान में राजस्थान स्टेट इंड्रस्टियल व इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए डीम्ड फारेस्ट यानि आभासी वन भूमि (Deemed Forest Land) को इंड्रस्टियल उपयोग के लिए बेचने पर तुला हुआ है।

आश्चर्य तो यह है कि जयपुर कलक्टर ने कानूनी स्थिति को जानते हुए भी डीम्ड फॉरेस्ट का म्यूटिेशन रीको के पक्ष में करने के आदेश भी कर दिए हैं। इसे दो बार नीलाम करने का नोटिस जारी कर चुका है,लेकिन दोनों ही बार रीको नीलामी (RIICO auction) स्थगित करनी पड़ी है।

यह है मामला?

जयपुर कलक्टर ने 18 दिसंबर,2025 को ग्राम दौलतपुरा तहसील आंधी के खसरा नंबर 345 के 81.600 हैक्टयेर गैर-मुमकिन पहाड़ को व्यावयायिक और गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए रीको के नाम म्यूटेशन खोलने के आदेश कर दिए।

रीको से इस गैर-मुमकिन पहाड़ की जमीन पर 2,24,130 वर्गमीटर का इंड्रस्टियल व व्यावसायिक भूखंड बनाकर नीलामी से बेचने की तैयारी कर ली।


कैसे है डीम्ड फॉरेस्ट?

कपूर कमेटी और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट में गैर-मुमकिन पहाड़,गैर-मुमकिन राड़ा, गैर-मुमकिन बीहड़, बंजड़ बीड़ और रुंद किस्म की जमीन डीम्ड फॉरेस्ट होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई,2018 को इस रिपोर्ट को मंजूर कर लिया था। कोर्ट ने उक्त किस्म की जमीनों का म्यू​टेशन डीम्ड फॉरेस्ट के नाम से खोलने के आदेश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में राज्य के वन विभाग ने 4 सितंबर,2012 को एवं प्रधान वन मुख्य संरक्षक राजस्थान ने 11 अक्टूबर,2012 को अपने अधीन सभी कार्यालयों को उक्त आदेश की पालना करने के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद जयपुर कलक्टर ने गैर-मुमकिन पहाड़ की जमीन का म्यूटेशन रीको के नाम खोलने के आदेश कर दिए,जबकि यह डीम्ड फॉरेस्ट है।


एफसीए एक्ट का सीधा उल्लंघन

जयपुर कलक्टर का आदेश और इस आधार पर रीको का गैर-वानिकी कार्यों के लिए जमीन केा बेचना सुप्रीम कोर्ट के गौडावर्मन मामले के आदेश और वन सरंक्षण अधिनियम-1980 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

वाईल्ड लाईफ कंजर्वेशन प्लान ही नहीं

राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने 14 मई,2019 का एक आदेश है। इस आदेश के अनुसार अभ्यारण्य क्षेत्र, टाईगर रिजर्व, आरक्षित वन क्षेत्र, रक्षित वन क्षेत्र की सीमा से 10 किलोमीटर तक, जहां प्रथम श्रेणी के वन्य जीवों का विचरण हो।

ऐसे क्षेत्र में 10 किलोमीटर की परि​धी में किसी भी प्रकार की गतिविधि शुरु करने से पहले प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से वाईल्फ लाईफ कंजर्वेशन प्लान का एप्रूवल करवान जरुरी है। इस काम के लिए सरकार ने भारी-भरकम फीस तय कर रखी है। लेकिन, इस मामले में ना कोई एप्रूवल लिया है और ना ही फीस जमा हुई है।


एनजीटी के भी आदेश हैं

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल,भोपाल बैंच भी 22 अप्रेल,2026 को कपूर कमेटी रिपोर्ट व सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई,2018 के आदेश की पालना के लिए राज्य सरकार को निर्देश दे चुका है। इस आदेश में तत्काल उक्त किस्म की जमीनों का डीम्ड फॉरेस्ट के नाम म्यूटेशन खोलने के निर्देश हैं।

गैर कानूनी भू-उपयोग परिवर्तन

रीको ने फॉरेस्ट क्लियरेंस के बिना उक्त जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन गैर-मुमकिन पहाड़ से इंड्रस्टियल उपयोग में करवा लिया है। यह वन संरक्षण अधिनियम-1980 की धारा-2 का स्पष्ट उल्लंघन है। क्योंकि जमीन आस-पास घना जंगल है और यहां वन्यजीवों का विचरण होता है। यदि यहां इंडस्ट्रियल या व्यावसायिक गतिविधियां हुईं तो पर्यावरण और ईकॉलोजी को भारी नुकसान होगा।


क्या होता है डीम्ड फॉरेस्ट?

डीम्ड फॉरेस्ट वे भूभाग या क्षेत्र हैं जो देखने में बिल्कुल जंगल या वन जैसे लगते हैं। लेकिन सरकार के आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड या कानूनी दस्तावेजों में उन्हें औपचारिक रूप से जंगल के रूप में दर्ज नहीं किया गया होता है।

कानूनी स्थिति

ये क्षेत्र किसी सरकारी कानून के तहत आरक्षित या संरक्षित वन के रूप में अधिसूचित नहीं होते हैं। फिर भी इन्हें पारिस्थितिक महत्व के कारण वन जैसी सुरक्षा दी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

वर्ष 1996 में टी.एन. गोडावर्मन थिरुमुपाद बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि वन की परिभाषा में वे सभी क्षेत्र शामिल होने चाहिए जो शब्दकोश के अनुसार वन जैसे दिखते हैं। चाहे उनका स्वामित्व किसी के पास भी हो या वे राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हों या नहीं।

क्या कहा रीको ने?

मैनेजमेंट ने फ़िलहाल नीलामी रद्द कर दी है और अमानत राशि भी वापिस करने के आदेश कर दिए हैं। रीको को तो कलेक्टर सहाब ने अलॉट की थी और रीको की जानकारी के अनुसार जमीन वन विभाग के नाम दर्ज नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल के आदेश की जानकारी मुझे नहीं है।

आर.के. सिंह, सीनियर मैनेजर और यूनिट हैड , रीको।

FAQ

  1. राजस्थान में डीम्ड फारेस्ट का क्या मामला है?
    राजस्थान में राजस्थान स्टेट इंड्रस्टियल व इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए डीम्ड फारेस्ट की जमीन को औद्योगिक उपयोग के लिए बेचने की कोशिश की है, जिसके तहत जयपुर कलक्टर ने गैर-मुमकिन पहाड़ की जमीन का म्यूटेशन रीको के नाम पर करने के आदेश दिए हैं।
  2. सुप्रीम कोर्ट के डीम्ड फारेस्ट से संबंधित आदेश क्या हैं?
    सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई, 2018 को कपूर कमेटी रिपोर्ट को मंजूर किया था, जिसमें आदेश दिया गया था कि डीम्ड फारेस्ट की जमीन का म्यूटेशन इसे संरक्षित वन के रूप में मानकर करना चाहिए, लेकिन जयपुर कलक्टर ने इसके विपरीत आदेश दिए हैं।
  3. रीको की नीलामी को क्यों स्थगित किया गया है?
    रीको की नीलामी दो बार स्थगित की गई है, जिसका कारण यह है कि भूमि को अवैध रूप से औद्योगिक उपयोग के लिए बदला गया है, जो वन संरक्षण अधिनियम-1980 का उल्लंघन है, और इस मामले में ना तो वन विभाग की अनुमति ली गई है और ना ही वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन प्लान का एप्रूवल प्राप्त किया गया है।
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