रोडवेज की नई तबादला नीति लागू: बीमार, दिव्यांग, विधवा और महिला कर्मियों को मिलेगी प्राथमिकता

Ashish Bhardwaj | Feb 09, 2026, 19:22 IST
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Roadwaj
Photograph: (the sootr)

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने कर्मचारियों के तबादलों के लिए नई नीति लागू की है। इसमें कर्मचारियों को प्राथमिकता, दिव्यांगों और स्वास्थ्य मुद्दों के आधार पर स्थानांतरण की सुविधा दी जाएगी।

News In Short

  • राजस्थान रोडवेज में कर्मचारियों के लिए लागू की नई तबादला नीति।
  • वर्ष 2010 और 2021 के तबादला नीतियों में किया संशोधन।
  • तबादलों में बीमारी और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को सर्वोच्च प्राथमिकता।
  • सरकारी सेवा में होने पर पति-पत्नी को रखा जाएगा एक ही जिले में।
  • रिटायरमेंट से 12 माह या उससे कम समय रहने वालों को मिलेगा गृह जिला।

News IN Detail

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) ने रोडवेज कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इसमें पहले की 2010 और 2021 की तबादला नीतियों में संशोधन किया गया है। नई नीति का सबसे अहम प्रावधान यह है कि किसी भी कर्मचारी का एक स्थान से स्थानांतरण होने के बाद उसे कम से कम दो वर्ष तक उसी स्थान पर दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा। इससे बार-बार तबादलों की परंपरा पर रोक लगेगी और कार्यस्थलों पर स्थायित्व बढ़ेगा।

बीमारी और गंभीर स्वास्थ्य को प्राथमिकता

तबादले के मामलों में प्राथमिकता क्रम भी स्पष्ट कर दिया गया है। इसके तहत कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, हृदय रोग (ओपन हार्ट सर्जरी/बायपास), डायलिसिस, लकवा, गंभीर मानसिक रोग जैसी असाध्य बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को तबादलों कमें सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा जिन कर्मचारियों ने किडनी या लिवर दान किया है, उन्हें ऑपरेशन के बाद तीन वर्ष तक विशेष प्राथमिकता मिलेगी।

दिव्यांग कर्मचारियों के लिए विशेष व्यवस्था

नीति में दिव्यांग कर्मचारियों के लिए भी विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। स्थायी दिव्यांगता, मानसिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, बहु-दिव्यांगता, दृष्टिहीनता और मूक-बधिर कर्मचारियों को तबादलों में प्राथमिकता दी जाएगी। यदि दिव्यांग महिला कर्मचारी है तो उसे अतिरिक्त प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही, यदि कर्मचारी के परिवार में कोई अन्य सदस्य दिव्यांग है, तो उस स्थिति में भी प्राथमिकता का प्रावधान रखा गया है।

महिला, विधवा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को मान्यता

नई तबादला नीति में सामाजिक संवेदनशीलता को भी शामिल किया गया है। विधवा महिला कर्मचारियों, एकल महिला कर्मचारियों और ऐसे विधुर पुरुष कर्मचारियों को, जिन पर अवयस्क संतानों की देखभाल की जिम्मेदारी है, तबादले में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, पति-पत्नी यदि राज्य सरकार या निगम की सेवा में अलग-अलग स्थानों पर पदस्थापित हैं, तो जहां तक संभव हो, उन्हें एक ही जिले में तैनाती देने का प्रयास किया जाएगा।

अनुशासनहीनता पर सख्ती

नीति में अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त रुख अपनाया गया है। एक बार में तीन या उससे अधिक बिना टिकट यात्रियों का मामला पाए जाने, ड्यूटी के दौरान शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करने, अथवा निर्धारित ड्यूटी पर स्टेपनी (अनधिकृत व्यक्ति) पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद उसे अन्य जोन में स्थानांतरित किया जाएगा और तीन वर्ष तक उसी जोन में पुनः तैनाती नहीं दी जाएगी। जिस आगार या इकाई से निलंबन हुआ है,
वहां पांच वर्ष तक पदस्थापन नहीं किया जाएगा।

सेवानिवृत्ति के नजदीक कर्मचारियों को राहत

जो कर्मचारी सेवानिवृत्ति से 12 माह या उससे कम समय दूर हैं, उनकी प्रार्थना पर उन्हें गृह जिले या निकटवर्ती आगार में स्थानांतरण दिया जा सकेगा। हालांकि, भ्रष्टाचार या गंभीर अनियमितता के
मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी।

ईमानदार कर्मियों को प्रोत्साहन

ऐसे कर्मचारी जिनके विरुद्ध पिछले एक वर्ष में मार्ग ड्यूटी के दौरान कोई शिकायत या दंड नहीं लगा है और जिनकी आय निर्धारित मानकों के अनुरूप है, उनके तबादले के मामलों में प्राथमिकता से विचार किया जाएगा।

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