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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की जांच एसआईटी कर रही है।
- जांच में सामने आया है कि कंपाउंडर देवी सिंह ने एक से अधिक इंजेक्शन दिए थे।
- साध्वी के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के अंतिम शब्द "गुरुजी, मुझे न्याय दिलाना" थे।
- एसआईटी ने आश्रम से जुड़े बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी है।
- फॉरेंसिक जांच और सोशल मीडिया डेटा पर भी जांच जारी है।
News In Detail
राजस्थान में एसआईटी की जांच में मारवाड़ की साध्वी प्रेम बाईसा मौत के मामले में कई खुलासे हुए है। एसआईटी एसीपी छवि शर्मा के अनुसार, कंपाउंडर देवी सिंह ने माना है कि उसने साध्वी को एक नहीं, बल्कि कई इंजेक्शन दिए थे। इन इंजेक्शनों के बारे में पता लगाया जा रहा है। देवी सिंह की डिग्री और उसकी योग्यताओं की भी जांच हो रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि उसे इंजेक्शन देने का अधिकार था या नहीं।
पिता का दावा: “मुझे न्याय दिलाना”
साध्वी के पिता वीरमनाथ ने दावा किया कि उनकी बेटी के अंतिम शब्द “गुरुजी, मुझे न्याय दिलाना” थे। इस उद्देश्य से उन्होंने मौत के चार घंटे सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी। उनका आरोप है कि बेटी के इलाज में कोई न कोई गड़बड़ी हुई थी।
साध्वी की मौत की जांच एसआईटी से
बालोतरा जिले की रहने वाली साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच अब एसआईटी कर रही है। इस मामले में कई पहलुओं पर गहन जांच चल रही है। इसमें मेडिकल, आर्थिक और व्यक्तिगत गतिविधियां संबंधी पहलू शामिल हैं।
बैंक खातों और संपत्ति की जांच
एसआईटी साध्वी प्रेम बाईसा के आश्रम से जुड़े सभी बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही संदिग्ध आर्थिक लेनदेन और आयकर से जुड़े मामलों की भी जांच हो रही है।
फॉरेंसिक जांच का अहम भूमिका
फॉरेंसिक जांच को भी इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विसरा और अन्य सैंपल्स की जांच एफएसएल से की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सैंपल सही समय पर और सही तरीके से भेजे गए थे।
एसआईटी ने मांग रिकॉर्ड
एसआईटी ने कंपाउंडर देवी सिंह और प्रेक्षा अस्पताल से जुड़े कागजात और सीसीटीवी फुटेज भी मांगे हैं। इसके साथ ही, साध्वी की यात्रा और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है ताकि इस मामले के हर पहलू को स्पष्ट किया जा सके।
साध्वी प्रेम बाईसा की जीवन यात्रा
साध्वी प्रेम बाइसा बालोतरा जिले के परेऊ गांव की निवासी थीं। उनके पिता वीरमनाथ ट्रक चालक थे और उनकी मां का निधन जब वे केवल दो साल की थीं, तब हो गया था। इसके बाद उनकी जीवन यात्रा में उनकी मां की भक्ति भावना का गहरा असर पड़ा। उनके पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गए, जहां संत राजाराम जी और कृपाराम जी के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा ली।
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