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Photograph: (the sootr)
News In Short
- पुलिस साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में एफएसएल जांच रिपोर्ट का इंतजार।
- साध्वी के पिता वीरमनाथ का आरोप, कम्पाउण्डर ने जहर जैसा इंजेक्शन लगाया था।
- पुलिस ने पिता, सेवादार सुरेश और कम्पाउण्डर देवी सिंह से पूछताछ की हैं।
- साध्वी के शरीर में जहर या इंजेक्शन का रिएक्शन होने का सवाल उठ रहा है।
- पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या बाहरी प्रभाव से।
News In Detail
राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब भी मिस्टी बना हुआ हैं। साध्वी की 28 जनवरी को अचानक तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें जोधपुर के हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। बताया जाता है कि पुलिस की जांच अब साध्वी के पिता समेत तीन लोगों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामान्य आई है, लेकिन साध्वी की मौत पर अभी भी कई सवाल उठ रहे हैं। एफएसएल जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि उनकी मौत का कारण क्या था। पुलिस ने विसरा को जांच के लिए एफएसएल भेजा है। रिपोर्ट आने की संभावना अगले दो से तीन दिन में जताई जा रही है।
एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए एफएसएल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस ने विसरा को जांच के लिए भेजा है। इससे यह निर्धारित हो सकेगा कि उनकी मौत का कारण किसी जहर या इंजेक्शन के रिएक्शन के कारण था। इस मामले में जोधपुर पुलिस ने तीन मुख्य संदिग्धों के बयानों और भूमिका की जांच की है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस में तीन लोगों के आसपास
पुलिस की जांच अब तीन मुख्य लोगों के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है। इनमें से एक व्यक्ति साध्वी के पिता वीरमनाथ, दूसरा सेवादार सुरेश और तीसरा कम्पाउण्डर देवी सिंह है। इन सभी से अलग-अलग पूछताछ की गई है, और पुलिस इन बयानों का मिलान कर रही है।
वीरमनाथ (साध्वी के पिता) का बयान
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ ने पुलिस को बताया कि 28 जनवरी को उनकी बेटी को सामान्य जुकाम था। इस।के बाद उन्होंने आश्रम में क्लिनिक चलाने वाले कम्पाउण्डर देवी सिंह को बुलाया। कम्पाउण्डर ने साध्वी को दो इंजेक्शन लगाए थे। लेकिन इसके बाद उनकी तबियत बिगड़ गई और सांस लेने में समस्या होने लगी। वीरमनाथ ने कम्पाउण्डर से पूछा कि क्या उसने कोई जहरीला इंजेक्शन लगाया था। लेकिन कम्पाउण्डर ने इसे सामान्य बताया। फिर वीरमनाथ ने अपनी बेटी को प्रेक्षा अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वीरमनाथ ने कम्पाउण्डर देवी सिंह के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। लेकिन उन्होंने पोस्टमार्टम से इनकार क्यों किया, और शव को मोर्चरी की बजाय आश्रम क्यों ले गए, यह एक बड़ा सवाल है।
सेवादार सुरेश का बयान
आश्रम में सेवादार के रूप में काम करने वाले सुरेश का कहना है कि साध्वी ने जुकाम और गला खराब होने के कारण दो इंजेक्शन लगवाए थे। इसके बाद उन्होंने दाल बनाई थी, और कुछ समय बाद उन्हें सांस लेने में समस्या होने लगी। सुरेश ने बताया कि हॉस्पिटल जाते समय साध्वी बार-बार कह रही थीं, "पापा मुझे न्याय दिला देना"। उनका कहना था कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते साध्वी के हाथों के नाखून नीले पड़ चुके थे। पुलिस ने आश्रम में कमरे की जांच की और खाना बनाने में प्रयुक्त सामग्री के सैम्पल भी लिए हैं, इससे यह भी पता चल सके कि क्या खाने में जहर दिया गया था।
कम्पाउण्डर देवी सिंह का बयान
कम्पाउण्डर देवी सिंह का कहना है कि उसने साध्वी को कोई जहर नहीं लगाया था। वह कई सालों से उनके परिवार को जानता था और पहले भी उपचार के लिए आश्रम में आ चुका था। उसने कहा कि जो इंजेक्शन लगाए गए, वे सामान्य प्रोटोकॉल के तहत थे। हालांकि, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि साध्वी की मौत इंजेक्शन के रिएक्शन के कारण तो नहीं हुई। एफएसएल रिपोर्ट के बाद ही इस बात का स्पष्ट जवाब मिल पाएगा।
पुलिस की जांच और आगे का एक्शन
साध्वी प्रेम बाइसा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस अब एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साध्वी को कौन सी दवाइयां दी गईं, उनके शरीर में किस प्रकार का रसायन था, और इंजेक्शन की मात्रा कितनी थी। यह जांच भी की जा रही है कि क्या साध्वी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी या फिर किसी बाहरी प्रभाव के कारण।
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