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Photograph: (the sootr)
News In Short
1. बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत
2. मामला एक पान मसाला ब्रांड के विज्ञापन से जुड़ा, व्यक्तिगत पेशी के लिए दिए गए थे निर्देश
3. सलमान को यह निर्देश कोटा जिला उपभोक्ता आयोग ने दिया, कहा-देना होगा नमूना हस्ताक्षर
4. सलमान ने कोटा जिला उपभोक्ता आयेाग के निर्देश को राज्य उपभोक्ता आयोग में दी थी चुनौती
5. सुनवाई के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने सलमान को व्यक्तिगत पेशी से दे दी छूट
News In Detail
​जयपुर। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से बड़ी कानूनी राहत मिली है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग कोटा के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सलमान को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया था। यह मामला एक पान मसाला ब्रांड के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है।
​क्या है पूरा मामला
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ, जब 'राजश्री' पान मसाला के एक विज्ञापन को लेकर कोटा के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की गई थी। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने अदालत के दस्तावेजों पर मौजूद सलमान खान के हस्ताक्षरों की सत्यता पर सवाल उठाते हुए आपत्ति दर्ज की थी।
​शिकायतकर्ता की इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोटा जिला उपभोक्ता आयोग ने सलमान के हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच के आदेश दिए थे। इतना ही नहीं, आयोग ने अभिनेता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने नमूना हस्ताक्षर देने का भी निर्देश दिया था।
​राज्य आयोग का हस्तक्षेप और राहत
जिला आयोग के इस सख्त रुख के खिलाफ सलमान खान और राजश्री पान मसाला की ओर से संयुक्त रूप से एक पुनरीक्षण याचिका राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने सलमान खान को अंतरिम राहत दी है।
​आयोग के फैसले के मुख्य बिंदु:
1. राज्य आयोग ने जिला आयोग के उस आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसके तहत सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से पेश होना था।
​2. राज्य आयोग ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग की कोटा सर्किट बेंच में स्थानांतरित कर दिया है।
​3. अब इस मामले की मेरिट पर चर्चा कोटा सर्किट बेंच में होगी, जिससे अभिनेता को फिलहाल व्यक्तिगत रूप से पेश होने की लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल गई है।
​कानूनी पहलू और महत्व
अक्सर मशहूर हस्तियों को विज्ञापनों में उनके द्वारा किए गए दावों या ब्रांड की विश्वसनीयता के आधार पर कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ता है। इस मामले में पेंच हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर फंसा था। यदि जिला आयोग का आदेश बरकरार रहता, तो सलमान खान को सुरक्षा और व्यस्त शेड्यूल के बीच व्यक्तिगत रूप से कोटा पहुंचना पड़ता।
​राज्य आयोग द्वारा दी गई यह राहत 'अंतरिम' है। इसका अर्थ है कि यह अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि मामले के लंबित रहने तक के लिए एक अस्थायी व्यवस्था है। हालांकि, सर्किट बेंच में केस ट्रांसफर होने से स्थानीय स्तर पर सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
आगे क्या...
​फिलहाल के लिए, सलमान खान को 'पैन मसाला विज्ञापन मामले' में कोर्ट के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। अब सबकी निगाहें कोटा सर्किट बेंच की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि हस्ताक्षरों की जांच की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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