सांवलिया सेठ का आधार कार्ड: चांदी पर कर दी अनूठी चित्रकारी, भक्त कर रहे हैं सराहना

Purshottam Kumar Joshi | Jan 19, 2026, 13:50 IST
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sawliya seth aadhar card
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में भीलवाड़ा के स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने सांवलिया सेठ के लिए चांदी का आधार कार्ड बनाया है। यह श्रद्धा और कला का अनोखा संगम बनकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

News In Short

  1. राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे से सांवलिया सेठ का चांदी का आधार कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
  2. स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने यह विशेष आधार कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी से तैयार किया है।
  3. कार्ड में अशोक स्तंभ और भगवान सांवलिया सेठ की आकर्षक तस्वीर उकेरी गई है।
  4. जन्म तिथि के रूप में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व अंकित की गई है।
  5. भक्त इस अनोखी कलाकारी और कलाकार की श्रद्धा की जमकर सराहना कर रहे हैं।

News In Detail

राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे से श्रद्धा और कला का अनोखा उदाहरण सामने आया है। स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने मेवाड़ के प्रसिद्ध आराध्य श्री सांवलिया सेठ के लिए चांदी का विशेष आधार कार्ड बनाया है। यह कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी से तैयार किया गया है और देखने में बिल्कुल असली आधार कार्ड जैसा लगता है। इसमें अशोक स्तंभ और सांवलिया सेठ की सुंदर तस्वीर के साथ जन्म तिथि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व अंकित है। तस्वीरें सामने आते ही यह कलाकृति सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।



Aadhar-Card-Sanwariya-Seth
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भक्ति और कला का अनूठा संगम

राजस्थान को भक्ति और कला की भूमि कहा जाता है। यहां आस्था से जुड़े अनोखे भक्त अक्सर देखने को मिलते हैं। इसी कड़ी में भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे से श्रद्धा और रचनात्मकता की एक खास मिसाल सामने आई है। यहां के स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने मेवाड़ के प्रसिद्ध आराध्य ठाकुर श्री सांवलिया सेठ के लिए चांदी का विशेष ‘आधार कार्ड’ (Silver Aadhar Card) तैयार किया है। यह कलाकृति इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

पूरी तरह शुद्ध चांदी से तैयार कार्ड

यह आधार कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी (Pure Silver) से बनाया गया है। पहली नजर में देखने पर यह बिल्कुल भारत सरकार द्वारा जारी असली आधार कार्ड जैसा प्रतीत होता है। कार्ड पर भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ उकेरा गया है। इसके साथ ही भगवान सांवलिया सेठ की आकर्षक और सजीव तस्वीर को बेहद बारीकी से तराशा गया है।

नक्काशी और डिजाइन में दिखी कारीगरी

धनराज सोनी ने इस कार्ड में पारंपरिक आभूषण कला और आधुनिक डिजाइन का सुंदर मेल किया है। चांदी पर की गई बारीक नक्काशी कलाकार की उच्च स्तरीय कारीगरी को दर्शाती है। हर अक्षर और चिन्ह को इस तरह उकेरा गया है कि यह कार्ड न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि एक उत्कृष्ट कलाकृति भी बन गया है।

जन्म तिथि ने खींचा लोगों का ध्यान

इस विशेष आधार कार्ड में जन्म तिथि के रूप में ‘भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व’ अंकित की गई है। इसे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दिवस माना जाता है। यही विवरण इस कार्ड को और भी विशेष बनाता है। भक्तों का मानना है कि यह विवरण सांवलिया सेठ को श्रीकृष्ण स्वरूप में दर्शाता है।

श्रद्धा से जुड़ा कलाकार का भाव

धनराज सोनी का कहना है कि वे लंबे समय से सांवलिया सेठ के अनन्य भक्त हैं। वे अपने आराध्य को कुछ अलग और विशेष भेंट करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि यह चांदी का आधार कार्ड उनकी श्रद्धा और पहचान दोनों का प्रतीक है। यह कोई व्यावसायिक प्रयोग नहीं, बल्कि पूरी तरह भावनात्मक भक्ति से जुड़ा प्रयास है।

सोशल मीडिया पर जमकर हो रही तारीफ

जैसे ही इस चांदी के आधार कार्ड की तस्वीरें सोशल मीडिया (Social Media) पर सामने आईं, वे तेजी से वायरल हो गईं। सांवलिया सेठ के भक्त इस अनूठी सोच और कलाकारी की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोग इसे भक्ति और कला का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं।

राजस्थान की कला को मिली नई पहचान

इस अनोखी कलाकृति ने एक बार फिर राजस्थान की पारंपरिक कला और कारीगरों की प्रतिभा को देशभर में पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रचनाएं न केवल आस्था को मजबूत करती हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी नई पहचान देती हैं।

सांवलिया सेठ मंदिर की खासियत

राजस्थान में भगवान सांवलिया सेठ का मंदिर चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया में स्थित है। यह अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

भगवान कृष्ण का स्वरूप: यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यहां 'सांवलिया सेठ' (सांवले रंग के सेठ) के नाम से पूजा जाता है। उन्हें व्यापारियों और व्यापार के संरक्षक के रूप में माना जाता है। व्यापारिक साझेदारी की अनूठी परंपरा: इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कई व्यापारी भगवान सांवलिया सेठ को अपने व्यवसाय में 'बिजनेस पार्टनर' मानते हैं। वे अपने मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 2%, 5% या 10%) मंदिर के दानपात्र में चढ़ाते हैं। अत्यधिक चढ़ावा: अपनी इसी अनोखी परंपरा के कारण यह राजस्थान के सबसे धनी मंदिरों में से एक है। हर महीने जब दानपात्र खोला जाता है, तो उसमें से करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और चांदी निकलता है। ऐतिहासिक महत्व: लोक मान्यताओं के अनुसार यहां की मूर्तियाँ वही हैं जिन्हें संत मीराबाई पूजा करती थीं। ये मूर्तियाँ 1840 के दशक में एक पुराने पेड़ की खुदाई के दौरान मिली थीं। स्थापत्य कला: मंदिर की वास्तुकला बहुत भव्य है, जो सफेद संगमरमर से बनी है और इस पर की गई नक्काशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। भक्तों की आस्था: भक्तों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है और व्यापार में घाटा होने पर सांवलिया सेठ की शरण में जाने से लाभ होता है

क्यों खास है यह चांदी का आधार कार्ड?

  • सांवलिया सेठ का आधार कार्ड
  • भक्ति और आधुनिक पहचान का संगम
  • पारंपरिक स्वर्ण कला का उत्कृष्ट नमूना
  • सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
  • राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा


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मुख्य बिंदू:

  • यह आधार कार्ड भीलवाड़ा जिले के आसींद निवासी स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने तैयार किया है।
  • यह कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी (Pure Silver) से बनाया गया है और इसमें बारीक नक्काशी की गई है।
  • इसकी अनोखी अवधारणा, सुंदर कारीगरी और सांवलिया सेठ से जुड़ी गहरी श्रद्धा के कारण यह कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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