सूरज तो चमक रहा है, पर हांफ रही ग्रिड, स्टोरेज नहीं होने से बेकार हो रही सोलर बिजली

Jageshwar prasad | May 06, 2026, 20:03 IST
Share
Ashish Bhardwaj - 2026-05-06T194308.864
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में सोलर बिजली का बढ़ता उत्पादन चुनौती बनकर सामने आ रहा है। स्टोरेज (बैटरी सिस्टम) की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से सोलर बिजली बेकार हो रही है।

News In Short

  • राजस्थान में सोलर बिजली का बढ़ता उत्पादन चुनौती बना।
  • स्टोरेज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बेकार जा रही बिजली।
  • अप्रैल के 15 दिन में 47 लाख यूनिट बिजली बेकार चली गई।
  • जनता महंगी बिजली से परेशान, वहीं सस्ती सोलर बिजली हो रही खराब।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान की रेतीली धरती पर जब सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेरता है तो वहां लगे अरबों रुपए के सोलर पैनल बिजली उगलने लगते हैं। स्थिति यह है कि यह वरदान आज एक चुनौती बन गया है। देश के सबसे बड़े भड़ला सोलर पार्क (फलोदी) से एक ऐसी रिपोर्ट आई है, जो बिजली प्रबंधन की पोल खोल रही है।

​हालत यह है कि बिजली बन तो रही है, लेकिन उसे संभालने वाला कोई नहीं है। अप्रैल के महज 15 दिन में स्टोरेज क्षमता विकसित नहीं होने से करीब 47 लाख यूनिट बिजली बेकार चली गई। इसे तकनीकी भाषा में 'कर्टेलमेंट' कहते हैं। सोलर बिजली उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार में बिजली स्टोरेज का काम पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।

जब कुदरत मेहरबान तो सिस्टम नाकाम

राजस्थान सरकार और केंद्र का पूरा जोर सोलर एनर्जी पर है। राजस्थान को सोलर हब बनाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन भड़ला सोलर पार्क की रिपोर्ट ने इन दावों की हकीकत बयां कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल के पहले पखवाड़े में मांग और सप्लाई का गणित पूरी तरह बिगड़ गया। जब दोपहर में सूरज अपने चरम पर होता है, तब सोलर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से बिजली पैदा करते हैं। लेकिन उसी वक्त राज्य में बिजली की मांग कम हो जाती है।

हमारे पास इस अतिरिक्त बिजली को जमा करने के लिए स्टोरेज (बैटरी सिस्टम) नहीं है। नतीजा? मजबूरी में सोलर प्लांट्स को बंद करना पड़ता है। यानी बहती हुई गंगा के सामने हम प्यासे खड़े हैं क्योंकि हमारे पास घड़ा (स्टोरेज) ही नहीं है।

​लाखों का नुकसान, करोड़ों का खतरा

बिजली कंपनियों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। तीन प्रमुख प्लांट्स में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही।

​100 मेगावाट का प्लांट: यहां 16.19 लाख यूनिट बेकार गई। राजस्व का 40 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ।

​दूसरा 100 मेगावाट प्लांट: यहां 15.50 लाख यूनिट की बर्बादी हुई। 38 लाख रुपये का चूना लगा।

​250 मेगावाट का बड़ा प्लांट: यहां भी 15.50 लाख यूनिट उत्पादन रोकना पड़ा। नुकसान करीब 51 लाख रुपये रहा।

​एक तरफ जनता महंगी बिजली से परेशान है, वहीं दूसरी ओर सस्ती सोलर बिजली को तारों में बहने से पहले ही दम तोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

​क्यों बनी ऐसी स्थिति?

​आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि हम बिजली का उपयोग नहीं कर पा रहे? इसके चार प्रमुख कारण सामने आए हैं:

​कमजोर ग्रिड क्षमता: हमारे पास बिजली ले जाने वाली तारें (ट्रांसमिशन लाइनें) कम पड़ रही हैं। ग्रिड इतना लोड झेलने के लिए तैयार नहीं है।

​स्टोरेज का अभाव: दुनिया अब लिथियम और अन्य बैटरी स्टोरेज पर जा रही है। राजस्थान में अभी भी हम सिर्फ उत्पादन पर ध्यान दे रहे हैं, भंडारण पर नहीं।

​डिमांड-सप्लाई गैप: दिन में सोलर बिजली भरपूर है, लेकिन फैक्ट्रियां और दफ्तर उस हिसाब से लोड नहीं बढ़ाते। रात में मांग बढ़ती है, तब सूरज डूब चुका होता है।

​मिसमैनेजमेंट: डिस्कॉम स्तर पर लोड बैलेंसिंग की भारी कमी है। मांग और उत्पादन के बीच कोई स्मार्ट तालमेल नहीं है।

अब जागना होगा

​डिस्कॉम के पूर्व सीएमडी आरजी गुप्ता का मानना है कि यह स्थिति खतरनाक है। उनके अनुसार सस्ती बिजली का इस तरह बर्बाद होना सिस्टम की विफलता है। ग्रिड, स्टोरेज और मांग के बीच जो खाई है, उसे तुरंत भरना होगा। जब तक हम स्मार्ट लोड मैनेजमेंट नहीं करेंगे, तब तक यह बर्बादी जारी रहेगी।

कैसे थमेगी यह बर्बादी?

विशेषज्ञों ने इस संकट से निकलने के लिए चार-सूत्रीय एक्शन प्लान सुझाया है:

​ग्रिड को स्मार्ट बनाएं: नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी होंगी। राजस्थान की बिजली को दूसरे राज्यों तक तुरंत भेजने के लिए 'इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी' मजबूत करनी होगी।

​बैटरी स्टोरेज पर दांव: केवल पैनल लगाने से काम नहीं चलेगा। बड़े स्तर पर बैटरी पार्क बनाने होंगे, ताकि दिन की बिजली रात में काम आए।

​टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ: सरकार को ऐसी योजना लानी चाहिए जिससे उद्योगों को दिन में बिजली सस्ती मिले। इससे कंपनियां दोपहर में ज्यादा काम करेंगी और सोलर बिजली का उपयोग बढ़ जाएगा।

​ग्रीन हाइड्रोजन: अतिरिक्त बिजली से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के प्रोजेक्ट्स पर काम तेज करना होगा।

भविष्य की राह

राजस्थान के पास दुनिया का सबसे बड़ा सोलर रेडिएशन है। ​विशेषज्ञों का कहना है कि हम ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकते हैं। लेकिन भड़ला की यह घटना एक वेक-अप कॉल है। बिजली पैदा करना आधा काम है, उसे बचाना और सही वक्त पर इस्तेमाल करना ही असली कामयाबी है।
​
विशेषज्ञों के अनुसार अगर हम आज नहीं चेते, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा जाएगा। करोड़ों की मशीनें रेगिस्तान में लगी रहेंगी और करोड़ों की बिजली हवा में गायब होती रहेगी। उम्मीद है कि सरकार के बैटरी स्टोरेज के वादे कागजों से निकलकर जल्द ही धरातल पर उतरेंगे।

ये भी पढ़ें:-

पहले पत्नी को जहर दिया, फिर बेटे को मार डाला; कातिल पिता को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

नाबालिग 120 दिन से लापता, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गांव वालों के साथ थाने में डाला डेरा

क्यों सचिन पायलट के लिए अशोक गहलोत का दिल नहीं पिघल पा रहा, जानिए सियासत की पूरी कहानी

कोटा मेडिकल कॉलेज में 6 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी, 1 की मौत; परिवार ने लगाए गलत इंजेक्शन देने के आरोप

Tags:
  • राजस्थान
  • बिजली
  • सोलर पैनल
  • सोलर प्लांट
  • सोलर एनर्जी
  • डिस्कॉम
  • भड़ला सोलर पार्क
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग