जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026: सुधा मूर्ति ने कहा-किताब इसलिए लिखी कि पोती हमारें संघर्ष को जान सके

राजस्थान के जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में प्रसिद्ध साहित्यकार सुधा मूर्ति ने अपनी किताब "द मैजिकल ऑफ द लॉस्ट ईयररिंग्स" को लेकर कहा कि उन्होंने अपनी पोती के लिए लिखी है, ताकि वह अपने परिवार के संघर्ष और विभाजन के दर्द को समझ सके।

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  1. सुधा मूर्ति ने JLF 2026 में अपनी किताब "द मैजिकल ऑफ द लॉस्ट ईयररिंग्स" के माध्यम से भारत-पाक विभाजन की पीड़ा पर चर्चा की।

  2. किताब उन्होंने अपनी पोती नॉनी के लिए लिखी, ताकि वह अपने परिवार के इतिहास और संघर्ष को समझ सके।

  3. सुधा मूर्ति ने बच्चों को उपदेश के बजाय कहानियों के माध्यम से इतिहास सिखाने की अहमियत पर जोर दिया।

  4. उन्होंने विभाजन को एक गलत निर्णय बताया, जिसने लाखों जिंदगियों को प्रभावित किया।

  5. सुधा मूर्ति ने बच्चों को संघर्ष सहने की क्षमता और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

News In Detail

सुधा मूर्ति ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में अपनी किताब "द मैजिकल ऑफ द लॉस्ट ईयररिंग्स" के माध्यम से भारत-पाक विभाजन की पीड़ा और बच्चों को इतिहास की समझ देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस किताब को उन्होंने अपनी पोती नॉनी के लिए लिखा, ताकि वह अपने परिवार के संघर्ष और विभाजन के दर्द को समझ सके।

सुधा मूर्ति ने कहा कि बच्चों को उपदेश देकर नहीं, बल्कि कहानियों के माध्यम से इतिहास सिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अगर हम इतिहास नहीं जानेंगे तो भविष्य को भी नहीं समझ सकते।

विभाजन को एक गलत निर्णय बताते हुए सुधा ने कहा कि इससे लाखों जिंदगियां प्रभावित हुईं, खासकर सिंधी समुदाय को अपनी भाषा, संस्कृति और ज़मीन से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने बच्चों को संघर्ष सहने की क्षमता और आत्मविश्वास का महत्व समझाया।

भारत-पाक विभाजन की पीड़ा 

प्रसिद्ध लेखिका और समाजसेवी सुधा मूर्ति ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के तीसरे दिन अपनी किताब "द मैजिकल ऑफ द लॉस्ट ईयररिंग्स" पर चर्चा केंद्रित की। इसके माध्यम से उन्होने भारत-पाकिस्तान विभाजन की पीड़ा, इतिहास की समझ और बच्चों में संघर्ष क्षमता विकसित करने की जरूरत बताई ।

वरिष्ठ पत्रकार मंदिरा नायर ने सुधा मूर्ति से पूछा कि उन्होंने यह किताब अपनी पोती के लिए क्यों लिखी और क्यों इसमें भारत-पाक विभाजन को प्रमुखता दी। सुधा मूर्ति ने इसके पीछे की कहानी साझा करते हुए कहा कि यह किताब उन्होंने अपनी पोती नॉनी के लिए लिखी, जो लंदन में रहती है, ताकि वह अपने परिवार के संघर्ष और भूमि के इतिहास को समझ सके।

बच्चों को कहानी के माध्यम से शिक्षा

सुधा मूर्ति ने बताया कि आज की पीढ़ी स्वतंत्रता और जमीन को सहज मानती है, लेकिन इसके पीछे पीढ़ियों का संघर्ष छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि बच्चों को उपदेश देकर नहीं, बल्कि कहानियों के माध्यम से इतिहास को समझाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने दादी और पोती के संवाद के रूप में अपनी किताब को बुना। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम इतिहास नहीं जानेंगे, तो भविष्य को भी नहीं समझ सकते। इतिहास और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

रिश्तों और संस्कृति की महत्वपूर्ण कहानी

किताब के बारे में बात करते हुए सुधा मूर्ति ने कहा कि यह केवल एक जोड़ी बालियों की कहानी नहीं है, बल्कि खोई हुई संस्कृति, रिश्तों और साझा इतिहास की कहानी है। ज़ैनब और सिमरन जैसे पात्रों के जरिए उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दोस्ती, पंजाब की साझा संस्कृति और ईद-दीपावली की साझी परंपरा को दर्शाया है। इन बालियों को केवल आभूषण नहीं, बल्कि दोस्ती और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।

बच्चों को संघर्ष सहने की क्षमता 

सुधा मूर्ति ने सत्र के दौरान बच्चों और अभिभावकों को यह संदेश दिया कि जीवन केवल सुखों का नाम नहीं है। आज के बच्चे छोटी-छोटी बातों पर अवसाद का सामना करते हैं, जबकि उन्हें यह समझना चाहिए कि पिछली पीढ़ियों ने कितने बलिदान दिए हैं। माता-पिता बच्चों को सुविधाएं दे सकते हैं, लेकिन सबसे जरूरी है उन्हें संघर्ष सहने की क्षमता देना और आत्मविश्वास और दृढ़ता विकसित करना।

विभाजन पर आने वाली पीढ़ी को संदेश

सुधा मूर्ति ने विभाजन को एक गलत निर्णय बताया, जिसने लाखों जिंदगियों को प्रभावित किया। उन्होंने पाकिस्तान यात्रा के दौरान तक्षशिला संग्रहालय और रावलपिंडी के पुराने घरों को देखा और वहां लोगों की आंखों में आज भी पीड़ा महसूस की। विशेष रूप से सिंधी समुदाय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिंधियों ने अपनी जमीन, भाषा और संस्कृति को खो दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि मातृभाषा, भूमि और संस्कृति कितनी महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बिंदू: 

  • जेएलएफ 2026: सुधा मूर्ति ने यह किताब अपनी पोती के लिए लिखी, ताकि वह अपने परिवार के इतिहास और संघर्ष को समझ सके, विशेष रूप से भारत-पाक विभाजन के बारे में।
  • सुधा मूर्ति के अनुसार, बच्चों को इतिहास उपदेश के बजाय कहानियों के माध्यम से समझाया जाना चाहिए ताकि वे इसे महसूस कर सकें और गहराई से जान सकें।
  • सुधा मूर्ति ने विभाजन को एक गलत निर्णय बताया, जिसने लाखों जिंदगियों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को विभाजन का इतिहास जानना चाहिए ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

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