झाड़ू से ही बीजेपी-कांग्रेस को किया जा सकता है साफ-नरेश मीणा, मांगा अरविंद केजरीवाल से पार्टी सिंबल
Ashish Bhardwaj | Oct 15, 2026, 14:46 IST
नरेश मीणा
राजस्थान के पंचायती राज चुनावों के बीच नरेश मीणा का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में नरेश मीणा अपने उम्मीदवारों के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से बारां, बूंदी और देवली-उनियारा में अपने उम्मीदवारों के लिए झाड़ू का सिंबल मांगा रहे है। इस पर आप की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया है
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। इस बीच भगत सिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वे आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल से अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांग रहे हैं। नरेश चाहते हैं कि बारां, बूंदी और देवली-उनियारा में उनके प्रत्याशियों को आम आदमी पार्टी का चुनाव चिह्न ‘झाड़ू’ मिले।
वीडियो में नरेश मीणा ने केजरीवाल को भरोसा दिलाया कि अगर उनके उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल मिलता है, तो वे चुनाव में पूरी ताकत लगाएंगे और AAP को अच्छे नतीजे दिलाने की कोशिश करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजस्थान की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।
नरेश मीणा ने वीडियो में कहा कि बारां की जनता के मन में यह बात बैठ चुकी है कि कांग्रेस और बीजेपी को चुनौती देने के लिए झाड़ू एक मजबूत विकल्प बन सकता है। इसी आधार पर उन्होंने केजरीवाल से अपने उम्मीदवारों को AAP के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने का मौका देने की अपील की।
उन्होंने खास तौर पर बारां, बूंदी और देवली-उनियारा का जिक्र किया। नरेश के मुताबिक, इन इलाकों में उनके उम्मीदवार झाड़ू के निशान पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने केजरीवाल को भरोसा दिलाया कि वे उम्मीदवारों की जीत के लिए दिन-रात मेहनत करेंगे।
वीडियो में नरेश मीणा ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया पर भी निशाना साधा। हालांकि, उनके बयान पर संबंधित नेताओं या आम आदमी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई है, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं है।
नरेश मीणा की इस अपील के पीछे बारां नगर परिषद चुनाव का नतीजा भी अहम माना जा रहा है। दी गई जानकारी के अनुसार, बारां नगर परिषद की 60 सीटों में आम आदमी पार्टी ने 31 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस को 18 और बीजेपी को 9 सीटें मिली थीं। इसके बाद AAP की शीतल राठौड़ नगर परिषद की सभापति बनीं।
इस नतीजे को राजस्थान में आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता के तौर पर देखा गया। बारां में पार्टी के प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीति में उसकी मौजूदगी को चर्चा में ला दिया। माना जा रहा है कि इसी नतीजे से प्रभावित होकर नरेश मीणा ने भी अपने उम्मीदवारों को झाड़ू के निशान पर चुनाव लड़ाने की इच्छा जताई है।
हालांकि, किसी एक नगर परिषद में मिली सफलता के आधार पर पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रदर्शन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। पंचायती राज चुनाव में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की पकड़ और पार्टी संगठन की भूमिका भी अहम रहेगी।
नरेश मीणा की अपील के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम आदमी पार्टी बारां, बूंदी और देवली-उनियारा में उनके उम्मीदवारों को अपना चुनाव चिह्न देगी? फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में केजरीवाल या पार्टी की ओर से इस मांग पर फैसले की पुष्टि नहीं है।
अगर AAP इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, तो इन क्षेत्रों में चुनावी रणनीति को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। लेकिन इसके लिए पार्टी की औपचारिक सहमति और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अहम होगी।
फिलहाल नरेश मीणा के वीडियो ने पंचायती राज चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी अपील को आम आदमी पार्टी कितनी गंभीरता से लेती है और क्या झाड़ू के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की उनकी योजना आगे बढ़ पाती है।
मीणा करेंगे पार्टी को मजबूत
झाड़ू से ही हो सकता है कांग्रेस-बीजेपी का सफाया
कहा के लिए मांगा समर्थन
वीडियो में नरेश मीणा ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया पर भी निशाना साधा। हालांकि, उनके बयान पर संबंधित नेताओं या आम आदमी पार्टी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई है, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं है।
बारां में AAP की जीत से बढ़ी चर्चा
झाड़ू के निशान पर चुनाव लड़ाने की इच्छा
हालांकि, किसी एक नगर परिषद में मिली सफलता के आधार पर पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रदर्शन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। पंचायती राज चुनाव में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की पकड़ और पार्टी संगठन की भूमिका भी अहम रहेगी।
अब केजरीवाल के फैसले पर नजर
अगर AAP इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, तो इन क्षेत्रों में चुनावी रणनीति को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। लेकिन इसके लिए पार्टी की औपचारिक सहमति और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अहम होगी।
फिलहाल नरेश मीणा के वीडियो ने पंचायती राज चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी अपील को आम आदमी पार्टी कितनी गंभीरता से लेती है और क्या झाड़ू के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की उनकी योजना आगे बढ़ पाती है।
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