/sootr/media/media_files/2026/01/06/tonk-2026-01-06-12-31-30.jpg)
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के टोंक में खजाना निकलने की अफवाह में पूरा गांव लूटने में जुट गया। चरागाह जमीन से निकले बड़ा घड़ा जिसे देग भी कहा जाता है। लोगों की भीड़ उसमें सोना लूटने के लिए टूट पड़ी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक सूचना पहुंची तो मौके पर पहुंच उस देग को कब्जे में लिया, लेकिन जब पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल की तो पूरा मामला शातिर ठगी का निकला।
weather update: कोहरे की चपेट में एमपी, राजस्थान में कड़ाके की सर्दी, छत्तीसगढ़ में कोहरा-शीतलहर का डबल अटैक
ऐसे शुरू हुआ मामला
3 दिसंबर 2025 को निवाई के सींदड़ा गांव के देवरी ढाणी में एक पुराना धातु का घड़ा मिला था, जिसे लोग खजाना मान बैठे थे। स्थानीय तहसीलदार ने इसकी खुदाई करवाई थी । इसके बाद एक बड़ा घड़ा जमीन की खुदाई कर बाहर निकाला था, जिसमें सोने जैसी धातु के टुकड़े थे। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पाया कि यह कोई खजाना नहीं, बल्कि आरोपियों द्वारा छिपाई गई नकली सामग्री थी।
5 नहीं, 7 प्रतिशत पानी भी देंगे; राजस्थान डिजिफेस्ट में सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान
खजाना, तांत्रिक और शातिर ठग
एक तांत्रिक और उसके साथी ने लोगों को नकली सोना बेचने के लिए एक रहस्यमयी घड़ा दबाया था। आरोपी खुद को तांत्रिक बताकर लोगों को यह झांसा देते थे कि जमीन में गड़ा हुआ खजाना खोजने के लिए तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 5 किलो 242 ग्राम नकली सोना बरामद किया।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य, जानें क्यों
#tonk में ख़ज़ाने के तांत्रिक और शातिर ठग गिरफ्तार pic.twitter.com/jbGw8544fB
— PURSHOTTAM JOSHI (@pkjoshizee) January 6, 2026
नकली सोने का खुलासा
इन दोनों आरोपियों ने घड़े में सोने की ईंट, बिस्किट और टुकड़े जैसे दिखने वाली वस्तुएं छिपाई थीं। जांच में यह पता चला कि ये वस्तुएं असल में पीतल और तांबे की बनी थीं, जिन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। आरोपियों ने इन नकली धातुओं को जमीन में छिपाकर लोगों को यह विश्वास दिलाया कि यह असली सोना है।
राजस्थान स्कूटी योजना में छात्राओं के लिए सुनहरा मौका, अभी करें अप्लाई
कैसे काम करते थे आरोपी?
मुख्य आरोपी मुकेश मीणा और अभिषेक मीणा दोनों युवकों ने खुद को तांत्रिक और अघोरी बताकर लोगों को बहलाया। वे लोगों को यह बताते थे कि जमीन में पुराना खजाना गड़ा हुआ है और तंत्र-मंत्र से इसे निकाला जा सकता है। इसके बाद आरोपी जमीन पर छिपाकर रखे गए घड़े को दिखाकर पीड़ितों को विश्वास दिलाते थे और फिर उनसे मोटी रकम लेते थे।
जिला स्पेशल पुलिस की कार्रवाई
4 जनवरी 2026 को पुलिस की जिला स्पेशल टीम ने सूचना के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी मुकेश और उसके साथी अभिषेक की कार से पीतल की बनी नकली सोने की ईंटें और बिस्किट्स जब्त किए गए। आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को असली सोना बेचने का झांसा देकर ठगते थे। पुलिस ने यह भी पाया कि यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित तरीके से की जा रही थी।
राजस्थान में ईवीएम से ही होंगे पंचायत चुनाव, खास रंग की मंगवाई मशीन
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/01/06/tonk-aaropi-2026-01-06-12-41-50.jpg)
खजाने की ठगी का शातिर तरीका
आरोपी सबसे पहले शिकार को तंत्र-मंत्र के झांसे में लाकर, उन्हें गड़े खजाने के बारे में बताते थे। फिर, मोटी रकम लेने के बाद वे जमीन पर दबा हुआ घड़ा निकालकर कहते थे कि अब इसे खोलने के लिए कुछ दिन तंत्र क्रियाएं करनी होंगी। जब व्यक्ति सोने की जांच कराता, और सोना नकली निकलता, तो आरोपी कह देते थे कि तंत्र क्रिया सही से नहीं की गई थी, इसलिए सोना पीतल बन गया।
पुरातत्व विभाग की टीम ने भी किया सर्वे
टोंक जिले में निवाई के देवरी गांव में बीते दिनों सिवायक चक जमीन से निकले देग (बड़ा घड़ा) जिसे लोग ऐतिहासिक खजाना बता कर लूट रहे थे उसकी जांच पुरातत्व विभाग जयपुर की टीम ने कर ली है।
सोमवार को पुरातत्व विभाग जयपुर के सुप्रीडेंट नीरज त्रिपाठी अपनी टीम के साथ निवाई पहुंचे जहां तहसील कार्यालय के कोषगार में सीज देग यानी बड़े घड़े की जांच पड़ताल की शुरूआती जांच पड़ताल की थी। शुरुआती जांच में ही पुरातत्व विभाग के नीरज त्रिपाठी से साफ कर दिया था कि यह कोई नकली खजाने का मामला है।
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/01/06/tonk-fake-gold-2026-01-06-12-45-01.jpg)
नीरज त्रिपाठी का नकली खजाने का दावा
इसके बाद टीम ने मौके पर पहुंच सर्वे किया और सैम्पलिंग की इसके बाद तो पुरातत्व विभाग के सुप्रीडेंट नीरज त्रिपाठी ने भी स्पष्ट कर दिया कि घड़े में सिर्फ मिट्टी थी और यह कोई नकली खजाना निकालने के नाम पर षड़यंत्र रचा गया है। पुरातत्व विभाग की टीम के सर्वे के दौरान ही टोंक की निवाई पुलिस के हत्थे शातिर ठग चढ़ चुके थे इसके बाद निवाई सीओ रवि कुमार ने मीडिया के सामने पूरी वारदात का खुलासा कर पर्दा उठा दिया।
#tonk ख़ज़ाने के मामले में पुरातत्व विभाग के नीरज त्रिपाठी ने किया ख़ुलासा pic.twitter.com/cKKzIPOD1e
— PURSHOTTAM JOSHI (@pkjoshizee) January 6, 2026
सरकारी कर्मचारी और पूंजीपति निशाने पर
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खासतौर पर सरकारी कर्मचारियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को निशाना बनाया। इससे वे डरते थे कि यदि शिकायत की तो उनकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठेंगे और वे बदनामी से बचने के लिए चुप रहते थे। इस ठगी में तांत्रिक और अघोरी का खेल बहुत ही चालाकी से खेला जाता था।
मुख्य बिंदू :
- आरोपी तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल करके लोगों को यह झांसा देते थे कि वे गड़े खजाने को निकाल सकते हैं और फिर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
- पुलिस ने आरोपियों से 5 किलो 242 ग्राम नकली सोना बरामद किया है, जो असल में पीतल और तांबे की धातु थी।
- यह तरीका प्रभावी था क्योंकि आरोपियों ने तंत्र-मंत्र और अघोरी के नाम से लोगों को डराकर और लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया।
- जमीन से खजाना गढ़ा होने की अफवाह को लेकर 3 जनवरी को निवाई के देवरी में लोगों की भीड़ उमड़ गई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंच हालात काबू किए थे।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us